Saturday, July 11, 2026

नोएडा में फर्जी लोन कॉल सेंटर का बड़ा खुलासा: सस्ते ब्याज का झांसा देकर करोड़ों की साइबर ठगी, 5 गिरफ्तार

ऑपरेशन 'साइबर वज्र' के तहत फेस-1 थाना पुलिस की बड़ी कार्रवाई। सेक्टर-2 स्थित फर्जी कॉल सेंटर से 5 आरोपी गिरफ्तार, मोबाइल, लैपटॉप, कॉलिंग डेटा, स्क्रिप्ट बुक और बैंक दस्तावेज बरामद। देशभर में दर्ज हैं 10 से अधिक शिकायतें।

New Delhi , Latest Updated On - Jul 11 2026 | 17:30:00 PM
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नोएडा पुलिस ने 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत सेक्टर-2 स्थित एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी कम ब्याज दर पर लोन दिलाने का झांसा देकर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर लोगों से ठगी करते थे। पुलिस ने मौके से लैपटॉप, मोबाइल, कॉलिंग डेटा, स्क्रिप्ट बुक और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।

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साइबर अपराध पर शिकंजा कसते हुए थाना फेस-1 पुलिस ने एक बड़े फर्जी लोन कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 11 जुलाई 2026 को लोकल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से सेक्टर-2 स्थित एक कॉल सेंटर पर छापेमारी कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह गिरोह लोगों को कम ब्याज दर पर लोन दिलाने का झांसा देकर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये की साइबर ठगी कर रहा था।

पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत की गई, जिसके दौरान साइबर ठगी से जुड़े संदिग्ध खातों और मोबाइल नंबरों की गहन जांच के बाद इस गिरोह तक पहुंच बनाई गई।


सेक्टर-2 में चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर

पुलिस ने डी-80, सेक्टर-2, नोएडा की प्रथम मंजिल पर संचालित फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपी

  1. पवन कुमार पुत्र सत्यपाल सिंह (33 वर्ष)
    निवासी – इन्द्रा मार्केट, सेक्टर-27, नोएडा
    मूल निवासी – गांव वहांपुर, थाना वी.वी. नगर, बुलंदशहर।
  2. मोहित पुत्र सुशील कुमार (24 वर्ष)
    निवासी – मयूर विहार, फेस-1, नोएडा
    मूल निवासी – गांव शेरपुर लुहारा, बड़ौत, बागपत।
  3. हर्ष शर्मा पुत्र मुकेश शर्मा (23 वर्ष)
    निवासी – ग्राम ममूरा, सेक्टर-66, नोएडा
    मूल निवासी – गांव गढ़ी बहादुर, थाना शाहपुर, मुजफ्फरनगर।
  4. स्वाती (27 वर्ष)
    निवासी – सेक्टर-135, नोएडा।
  5. प्रीती (35 वर्ष)
    निवासी – सेक्टर-26, नोएडा।

'ऑपरेशन साइबर वज्र' से खुला पूरा नेटवर्क

थाना फेस-1 पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन साइबर वज्र के तहत थाना स्तर पर प्राप्त लगभग 159 संदिग्ध बैंक खातों का विश्लेषण किया गया।

जांच के दौरान विभिन्न बैंकों के खातों को हॉटस्पॉट और रेड जोन के रूप में चिन्हित किया गया।

इनमें 19 रेड जोन क्षेत्रों में करीब 2500 मोबाइल नंबरों तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों की जांच के दौरान पुलिस को इस फर्जी कॉल सेंटर की जानकारी मिली।

इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और स्थानीय सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरे गिरोह को गिरफ्तार कर लिया।


ऐसे करते थे लोगों से साइबर ठगी

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे ऐसे लोगों का डेटा जुटाते थे जिन्हें लोन की आवश्यकता होती थी।

इसके बाद कॉल सेंटर से फोन कर उन्हें बेहद कम ब्याज दर पर आसान लोन दिलाने का भरोसा दिया जाता था।

जब ग्राहक भरोसा कर लेता था, तब उससे—

  • आधार कार्ड
  • पैन कार्ड
  • बैंक विवरण
  • ओटीपी

मंगवाए जाते थे।

इसके बाद प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम जमा करा ली जाती थी।

रुपये मिलने के बाद न तो लोन जारी किया जाता था और न ही जमा की गई राशि वापस की जाती थी।

इस तरह आरोपी सस्ते लोन का झांसा देकर सुनियोजित तरीके से साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देते थे।


देशभर में दर्ज हैं 10 से अधिक शिकायतें

पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर विभिन्न राज्यों से 10 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं।

प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी अब तक कई लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुके हैं।

पुलिस इस पूरे नेटवर्क के आर्थिक लेन-देन, बैंक खातों और अन्य सहयोगियों की भी जांच कर रही है।



क्या-क्या हुआ बरामद

पुलिस ने कॉल सेंटर से ठगी में इस्तेमाल होने वाला भारी मात्रा में सामान बरामद किया है।

बरामदगी

  • 05 मोबाइल फोन
  • 03 लैपटॉप
  • 06 चेकबुक
  • 01 पासबुक
  • 160 कॉलिंग डेटा शीट
  • 11 स्क्रिप्ट बुक
  • 01 बिलिंग बुक
  • 01 इंटरनेट राउटर

इन सभी उपकरणों का उपयोग कथित रूप से साइबर ठगी को संचालित करने में किया जा रहा था।


मामला दर्ज

आरोपियों के खिलाफ थाना फेस-1, गौतमबुद्ध नगर में

मु0अ0सं0 340/2026

के तहत

  • धारा 318(4) भारतीय न्याय संहिता (BNS)
  • धारा 66D, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act)

में मुकदमा दर्ज किया गया है।


पुलिस करेगी नेटवर्क की गहन जांच

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्य कौन हैं, कॉलिंग डेटा कहां से प्राप्त किया जाता था, ठगी की रकम किन खातों में ट्रांसफर होती थी और इस नेटवर्क का संचालन कितने समय से किया जा रहा था।

साइबर विशेषज्ञों की मदद से जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी।

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All Comments (11)
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