उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के फेज-3 और फेज-4 के कार्यों की सभी 75 जिलों में समीक्षा की गई। बैठक में 46 मार्गों से जुड़े लंबित प्रकरणों का तत्काल निस्तारण करने और लापरवाह ठेकेदारों को नोटिस देकर जरूरत पड़ने पर ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए गए।
गांवों को बेहतर सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत चल रहे कार्यों की निगरानी तेज कर दी गई है। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के सभी 75 जनपदों की परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों (PIU) के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि काम में अनावश्यक देरी करने और निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन नहीं करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर नियमानुसार उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशों के क्रम में 22 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से यह समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता अभिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिव सहाय अवस्थी और उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी राम भरत तिवारी ने की।
समीक्षा का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के फेज-3 और फेज-4 के अंतर्गत चल रहे कार्यों की प्रगति का आकलन करना और लंबित मामलों को समयबद्ध तरीके से निस्तारित कराना रहा।
46 मार्गों से जुड़े मामले पीआईयू स्तर पर लंबित
बैठक में सामने आए आंकड़ों ने लंबित कार्यों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने की जरूरत को रेखांकित किया। अधिकारियों ने 16 मार्गों की वर्तमान स्थिति ओमास पर दर्ज करने तथा 23 मार्गों से संबंधित एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) अपलोड करने के मामलों की समीक्षा की।

इसके अलावा, 46 मार्गों से संबंधित मामले परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों के स्तर पर लंबित पाए गए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन सभी प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर तत्काल निस्तारित किया जाए। साथ ही, की गई कार्रवाई की जानकारी मुख्यालय को पत्र और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि समीक्षा बैठक में बताए गए ये आंकड़े लंबित प्रक्रियाओं और प्रकरणों से संबंधित हैं। इन्हें सीधे तौर पर 46 अधूरी सड़कों या निर्माण में खराब गुणवत्ता के मामलों की संख्या नहीं माना जा सकता। प्रत्येक मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित अभिलेखों और विभागीय कार्रवाई के आधार पर स्पष्ट होगी।
गुणवत्ता से समझौता नहीं, ठेकेदारों पर कार्रवाई के निर्देश
बैठक में अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि ग्रामीण सड़कों के निर्माण और सुधार कार्यों में निर्धारित तकनीकी मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए। कार्यों में अनावश्यक विलंब करने वाले या अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करने वाले ठेकेदारों को चिह्नित कर नोटिस जारी किए जाएं।
यदि नोटिस जारी होने के बाद भी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होता है, तो नियमानुसार ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही अभियंताओं को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने और अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से पालन करने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता, समय पर काम पूरा करने और वित्तीय पारदर्शिता के मामले में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। इसका उद्देश्य केवल निर्माण कार्य पूरा कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि तैयार सड़कें निर्धारित मानकों के अनुरूप हों।
ओमास, एफडीआर और जियो टैगिंग के लंबित मामलों पर नजर
समीक्षा बैठक में ग्रामीण मार्गों की वीसी, सीसी, ओमास, एफडीआर, एटीआर और जियो टैगिंग से संबंधित कार्यों की स्थिति पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इनसे जुड़े लंबित प्रकरणों का तत्काल निस्तारण किया जाए और सभी आवश्यक विवरण निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं।

जहां तकनीकी या प्रक्रियागत समस्याएं आ रही हैं, वहां संबंधित स्तर पर तत्काल पत्राचार कर मुख्यालय को जानकारी देने को कहा गया। इससे लंबित मामलों के समाधान में देरी कम करने और कार्यों की निगरानी को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
इन प्रक्रियाओं का महत्व इसलिए भी है क्योंकि निर्माण कार्यों की स्थिति, निरीक्षण से संबंधित रिकॉर्ड और आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध होने से जवाबदेही तय करने में मदद मिलती है।
गांवों को बाजार, स्कूल और अस्पताल तक बेहतर पहुंच का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर और बारहमासी सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है। अच्छी सड़कें गांवों के लोगों के लिए केवल आवागमन का साधन नहीं होतीं, बल्कि वे कृषि उपज को मंडियों तक पहुंचाने, विद्यार्थियों को विद्यालय जाने, मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने और रोजगार के अवसरों से जुड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को निर्माण के साथ-साथ नियमित अनुरक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और पारदर्शी कार्यप्रणाली पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
समीक्षा के दौरान जिन जनपदों में कार्यों की प्रगति और निष्पादन संतोषजनक पाया गया, वहां के अधिकारियों के प्रयासों की सराहना भी की गई। उनसे आगे भी इसी प्रतिबद्धता और कार्यनिष्ठा के साथ काम करने की अपेक्षा की गई।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
वर्चुअल बैठक में मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिव सहाय अवस्थी, उप मुख्य कार्यपालक अधिकारी राम भरत तिवारी, वित्त एवं लेखाधिकारी बृजेश कुमार, मुख्य अभियंता मायाराम गुप्ता, सूचना अधिकारी रतन कुमार सिंह और आईटी कोऑर्डिनेटर मोहम्मद मुर्तजा सहित लोक निर्माण विभाग तथा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिकारी और अभियंता शामिल हुए।
प्रदेश के सभी 75 जनपदों की परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों की भागीदारी के साथ हुई इस समीक्षा में ग्रामीण सड़क परियोजनाओं की प्रगति और लंबित प्रक्रियाओं को गति देने पर जोर दिया गया।
अब अहम सवाल यह है कि लंबित प्रकरणों का निस्तारण कितनी तेजी से होता है और काम में लापरवाही करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई जमीन पर कब दिखाई देती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुविधा का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब गुणवत्ता, समयसीमा और जवाबदेही से जुड़े निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन हो।
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