जल जीवन मिशन 2.0 के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री C. R. Patil ने सभी राज्यों के मंत्रियों और अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की। बैठक में उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री Swatantra Dev Singh ने बताया कि नल से जल कनेक्शन देने में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है।
देश के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई Jal Jeevan Mission के अगले चरण यानी जल जीवन मिशन 2.0 के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर शुक्रवार को एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री C. R. Patil ने सभी राज्यों के मंत्रियों और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल माध्यम से मंथन किया।
बैठक का उद्देश्य यह तय करना था कि जल जीवन मिशन 2.0 को भविष्य में किस प्रकार से जमीन पर अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा और इसमें ग्राम पंचायतों तथा स्थानीय जल समितियों की भागीदारी कैसे बढ़ाई जा सकती है।
इस वर्चुअल बैठक में उत्तर प्रदेश की ओर से राज्य के जलशक्ति मंत्री Swatantra Dev Singh और नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव Anurag Srivastava शामिल हुए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के अधिकारियों ने सभी राज्यों के सामने जल जीवन मिशन 2.0 की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में इस योजना को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की क्या-क्या जिम्मेदारियां होंगी। साथ ही राज्यों से सुझाव भी मांगे गए कि इस योजना को और प्रभावी तरीके से कैसे लागू किया जा सकता है।

बैठक में उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने राज्य में जल जीवन मिशन के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश आज देश में सबसे अधिक नल से जल कनेक्शन देने वाला राज्य बन चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब तक 2.43 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। यह उपलब्धि देश में सबसे बड़ी मानी जा रही है।
स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि विशेष रूप से विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र में भी बड़ी प्रगति हुई है। इन क्षेत्रों में 95 प्रतिशत से अधिक घरों तक नल से जल की आपूर्ति पहुंचाई जा चुकी है।
उन्होंने यह भी बताया कि जिन गांवों में 100 प्रतिशत जलापूर्ति सुनिश्चित हो चुकी है, वहां “जल अर्पण कार्यक्रम” आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत जलापूर्ति व्यवस्था को ग्राम पंचायतों को सौंपा जा रहा है ताकि स्थानीय स्तर पर पानी की आपूर्ति और रखरखाव की जिम्मेदारी प्रभावी तरीके से निभाई जा सके।
सरकार का मानना है कि ग्राम पंचायतों और स्थानीय जल समितियों की सक्रिय भागीदारी से जलापूर्ति प्रणाली अधिक टिकाऊ और प्रभावी बन सकेगी।

गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की अवधि को बढ़ाते हुए इसे दिसंबर 2028 तक लागू रखने का फैसला किया है। इस विस्तारित योजना को अब जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।
सरकार के अनुसार इस योजना पर कुल 8.69 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के हर घर तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है।
नई व्यवस्था में डिजिटल मॉनिटरिंग, ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी, और जल आपूर्ति की दीर्घकालिक व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही जल स्रोतों के संरक्षण और बेहतर प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जाएगा।
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने बैठक के दौरान कहा कि जल जीवन मिशन देश के ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योजना है और इसके दूसरे चरण को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी राज्यों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
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