कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र स्थित एमडी इन्फोटेक परीक्षा केंद्र पर बुधवार को BSF कांस्टेबल (मिनिस्ट्रियल) की परीक्षा के दौरान जमकर हंगामा हुआ। परीक्षार्थियों ने सिस्टम खराब होने, बिजली-पंखे बंद होने और बिना चेकिंग प्रवेश दिए जाने के साथ पेपर लीक होने का आरोप लगाया। गुस्साए छात्रों ने सेंटर में तोड़फोड़ कर दी। करीब चार घंटे के हंगामे के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और अब 18 सितंबर को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया है।
कानपुर में बुधवार को BSF कांस्टेबल (मिनिस्ट्रियल) की परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि जिस परीक्षा की तैयारी उन्होंने महीनों की होगी, वह परीक्षा शुरू होने से पहले ही अव्यवस्थाओं और हंगामे की भेंट चढ़ जाएगी। चकेरी थाना क्षेत्र के श्याम नगर स्थित एमडी इन्फोटेक परीक्षा केंद्र पर पहली पाली की परीक्षा शुरू हुई तो कुछ ही देर में छात्रों की परेशानी बढ़ने लगी।
परीक्षार्थियों का आरोप है कि परीक्षा शुरू होने के बाद करीब 40 मिनट तक सिस्टम बंद रहे। इसके बाद जब कंप्यूटर सिस्टम चालू हुए तो समस्या खत्म होने के बजाय और बढ़ गई। छात्रों के मुताबिक, कई कंप्यूटरों में कीबोर्ड और माउस काम नहीं कर रहे थे, जबकि सिर्फ CPU चालू था। ऐसे में परीक्षार्थियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर वे परीक्षा देंगे तो कैसे?
इसी बीच परीक्षा केंद्र में बिजली की समस्या ने भी हालात बिगाड़ दिए। छात्रों के अनुसार, परीक्षा हॉल में न तो पर्याप्त लाइट थी और न ही पंखे चल रहे थे। बाहर बारिश और उमस का माहौल था और अंदर परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थी तकनीकी दिक्कतों से जूझ रहे थे।
बिना चेकिंग प्रवेश का आरोप, फिर पेपर लीक की बात से बढ़ा आक्रोश
मामला सिर्फ कंप्यूटर सिस्टम की खराबी तक सीमित नहीं रहा। परीक्षा देने मुंबई से कानपुर पहुंची छात्रा शालिनी बागुन ने केंद्र की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों को बिना उचित चेकिंग के सीधे अंदर प्रवेश दिया गया।
छात्रों का कहना था कि जब उन्होंने बिजली कटौती, सिस्टम और दूसरी अव्यवस्थाओं को लेकर केंद्र प्रबंधन से शिकायत की तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी दौरान पेपर लीक होने का आरोप भी सामने आया। हालांकि पेपर लीक के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इस आरोप ने पहले से नाराज परीक्षार्थियों के गुस्से को और भड़का दिया।
देखते ही देखते परीक्षा केंद्र का माहौल तनावपूर्ण हो गया। आक्रोशित छात्रों ने परीक्षा केंद्र में रखे कीबोर्ड और CPU तोड़ दिए और जमकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। परीक्षा केंद्र के बाहर भी बड़ी संख्या में परीक्षार्थी जमा हो गए।
चार घंटे तक चला हंगामा, कई थानों की पुलिस पहुंची
छात्रों के उग्र प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह, एसीपी चकेरी आशुतोष कुमार सिंह समेत कई अधिकारी पहुंचे।
तनाव को देखते हुए चकेरी के साथ-साथ कैंट, जाजमऊ, नौबस्ता और रेलबाजार थानों से भी भारी पुलिस बल बुलाया गया। करीब चार घंटे तक मौके पर हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा।
प्रदर्शन कर रहे परीक्षार्थियों की मांग साफ थी—जब तक BSF के आधिकारिक पोर्टल पर अगली परीक्षा की तारीख घोषित नहीं होती, तब तक वे प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे। छात्रों का कहना था कि उन्होंने परीक्षा के लिए समय, पैसा और मेहनत लगाई है, ऐसे में परीक्षा केंद्र की लापरवाही का खामियाजा उन्हें नहीं भुगतना चाहिए।
बीएसएफ अधिकारियों से संपर्क के बाद रद्द हुई परीक्षा
मामला बढ़ता देख पुलिस कमिश्नर ने तत्काल एडीजी बीएसएफ मकरंद देवेशकर से संपर्क किया। अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
इसके साथ ही अभ्यर्थियों को नई तारीख की जानकारी दी गई। अब 18 सितंबर को परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी। इस फैसले के बाद काफी देर से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को राहत मिली और स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आई।
एसीएम ने सेंटर को ब्लैकलिस्ट करने की कही बात
मौके पर पहुंचीं एसीएम-2 कैंट शिखा शुक्ला ने भी परीक्षा केंद्र की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही करने वाले परीक्षा केंद्रों को पूरी तरह ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए।
एसीएम ने यह भी कहा कि वह पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेंगी। यानी अब इस पूरे घटनाक्रम में सिर्फ परीक्षा रद्द होने तक मामला सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि परीक्षा केंद्र की व्यवस्थाओं और कथित लापरवाही की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
राजस्थान और जयपुर से भी सामने आई गड़बड़ी की खबरें
कानपुर की घटना के बीच राजस्थान और जयपुर के कुछ परीक्षा केंद्रों पर भी इसी तरह की गड़बड़ियों की खबरें सामने आने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ कानपुर के एक परीक्षा केंद्र की व्यवस्था पर नहीं, बल्कि परीक्षा आयोजित कराने वाली पूरी व्यवस्था पर भी उठ रहे हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कानपुर में हुई तकनीकी अव्यवस्था केवल सेंटर की लापरवाही थी या इसके पीछे कोई बड़ी गड़बड़ी भी थी? पेपर लीक के आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही साफ होगी। लेकिन इतना जरूर है कि महीनों की तैयारी के बाद परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों के लिए यह दिन बेहद निराशाजनक रहा।
अब निगाहें 18 सितंबर की दोबारा होने वाली परीक्षा पर हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि इस बार परीक्षा केंद्रों पर ऐसी कोई तकनीकी या प्रशासनिक चूक न हो, जिससे अभ्यर्थियों को फिर सड़क पर उतरकर अपने हक के लिए आवाज उठानी पड़े।
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