कौशांबी के महमूदपुर मनौरी में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण ब्लास्ट के बाद पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्य आरोपी नौशाद मुठभेड़ में घायल होकर गिरफ्तार हुआ है। वहीं थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है। मामले में छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज है और ATS भी विस्फोटक सामग्री के स्रोत की जांच कर रही है।
कौशांबी में सोमवार को पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण ब्लास्ट ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास के कई मकान मलबे में तब्दील हो गए और कई घरों को भारी नुकसान पहुंचा। हादसे में बच्चों और महिलाओं समेत 11 लोगों की मौत हो चुकी है। इस दर्दनाक घटना के बाद अब पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई का रुख बेहद सख्त कर लिया है।
जिस आरोपी की पुलिस को तलाश थी, अब वह पुलिस की गिरफ्त में है। मुख्य आरोपी नौशाद को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन इस पूरे मामले में कहानी सिर्फ मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। पुलिसकर्मियों की भूमिका पर उठे सवालों के बाद उनके खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
तड़के 4 बजे पुलिस और नौशाद का आमना-सामना
पुलिस के मुताबिक, चरवा थाना क्षेत्र के तेरह मील गांव के पास तड़के करीब 4 बजे पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना के आधार पर घेराबंदी की थी। पुलिस को जानकारी मिली थी कि पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले का आरोपी नौशाद इलाके में मौजूद है।
बताया गया कि पुलिस टीम ने जब नौशाद को रोकने का प्रयास किया तो उसने पुलिस पर फायरिंग कर दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। इसी दौरान गोली नौशाद के पैर में लगी। पुलिस ने उसे मौके से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस का दावा है कि आरोपी के कब्जे से अवैध तमंचा और कारतूस भी बरामद किए गए हैं। घायल नौशाद को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। अब पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पटाखा फैक्ट्री में विस्फोटक सामग्री कहां से आई और इस पूरे मामले में उसकी क्या भूमिका थी।
ब्लास्ट के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि अगर इलाके में इतनी बड़ी मात्रा में पटाखे और विस्फोटक सामग्री मौजूद थी तो संबंधित पुलिस और प्रशासनिक तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? इसी सवाल के बीच पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है।
लापरवाही के आरोपों के बीच पिपरी थाना प्रभारी विकास सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इसके अलावा चौकी प्रभारी चायल अमित द्विवेदी और पूर्व चौकी प्रभारी मनीष पाल को भी लाइन हाजिर किया गया है।
वहीं बीट आरक्षी जितेंद्र कुमार और कृष्ण कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
बताया जा रहा है कि अवैध पटाखा फैक्ट्री और विस्फोटक सामग्री के भंडारण की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न किए जाने के आरोपों को गंभीरता से लिया गया है। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित पुलिसकर्मियों की वास्तविक भूमिका और लापरवाही कितनी थी।

सोमवार को पिपरी थाना क्षेत्र के महमूदपुर मनौरी कस्बे में पटाखा फैक्ट्री में आग लगने के बाद अचानक जोरदार धमाका हुआ था। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देने की बात सामने आई।
कुछ ही पल में इलाके में चीख-पुकार मच गई। कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए और कुछ घर मलबे में बदल गए। हादसे में 11 लोगों की जान चली गई। इस घटना ने पटाखा कारोबार और विस्फोटक सामग्री के भंडारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने मामले में छह लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। FIR में नौशाद, शकील, उसके बेटे आदिल, पत्नी शबाना, कहकशा और बेटी शाइना को नामजद किया गया है।
पुलिस ने नामजद आरोपियों में शकील की पत्नी शबाना और शाइना को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की चार टीमें लगाई गई हैं।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि नौशाद कथित तौर पर अपने बेटे आदिल के नाम से ‘आदिल डीजे’ के नाम पर पटाखा फैक्ट्री चला रहा था।
लाइसेंस से लेकर विस्फोटक के दस्तावेजों तक जांच
इस मामले में अब फैक्ट्री के लाइसेंस और विस्फोटक सामग्री के भंडारण से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आई है कि करीब दो साल पहले जिला प्रशासन ने फैक्ट्री के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बावजूद फैक्ट्री दोबारा चोरी-छिपे संचालित होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

हालांकि, जिला प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं की गई है कि फैक्ट्री वैध थी या अवैध। इसलिए जांच का अहम हिस्सा यह भी है कि फैक्ट्री के पास किस तरह की अनुमति थी और विस्फोटक सामग्री रखने के लिए जरूरी नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
प्रशासन ने चलाया बुलडोजर
हादसे के बाद प्रशासन ने घनी आबादी के बीच विस्फोटक सामग्री के कथित अवैध भंडारण के खिलाफ भी अभियान तेज कर दिया है। मनौरी कस्बे में एक मकान से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद होने के बाद उसे सुरक्षित तरीके से दो DCM वाहनों में लोड कराया गया।
सामग्री को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद प्रशासन ने संबंधित मकान पर बुलडोजर चलाकर उसे जमींदोज कर दिया। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब आबादी के बीच विस्फोटक सामग्री के भंडारण को लेकर कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
ATS के हाथ में भी पहुंची जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए ATS भी जांच में जुट गई है। अब जांच सिर्फ फैक्ट्री तक सीमित नहीं है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री आखिर कहां से आई, इसे किसने उपलब्ध कराया और इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा था।
कौशांबी का यह हादसा कई सवाल छोड़ गया है। 11 लोगों की मौत के बाद मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी जरूर हुई है, पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई हुई है और प्रशासन ने बुलडोजर एक्शन भी लिया है। लेकिन असली सवाल अब यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री आबादी के बीच पहुंची कैसे और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
आने वाले दिनों में पुलिस और ATS की जांच से इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।
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