उत्तर प्रदेश में 1.43 लाख शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 18,000 किया गया, गोरखपुर में भव्य कार्यक्रम के साथ शुरुआत।
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 18,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया है। इस निर्णय को सम्मानपूर्वक लागू करने के लिए गोरखपुर में योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह एवं सांस्कृतिक केंद्र में भव्य “शिक्षामित्र सम्मान समारोह” का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 10 चयनित शिक्षामित्रों को प्रतीकात्मक चेक वितरित कर इस फैसले के क्रियान्वयन की औपचारिक शुरुआत की। इस राज्यस्तरीय आयोजन के साथ-साथ प्रदेश के सभी जनपदों में भी समानांतर रूप से सम्मान समारोह आयोजित किए गए, जिससे इस पहल की व्यापकता स्पष्ट हुई।

इस अवसर पर ‘अरुणोदय’ कैलेंडर का विमोचन भी किया गया, जो विद्यार्थी नेतृत्व आधारित प्रार्थना सभाओं की नवाचार गतिविधियों पर आधारित है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए उपलब्धि-आधारित स्टॉलों का अवलोकन कर विभाग की उपलब्धियों की जानकारी भी ली।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि यह दिन शिक्षामित्रों के लिए ऐतिहासिक है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में शिक्षामित्रों का मानदेय 3,500 रुपए था, जिसे पहले बढ़ाकर 10,000 रुपए किया गया और अब इसे बढ़ाकर 18,000 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है और इसके लिए सरकार द्वारा 230.11 करोड़ रुपए की धनराशि जारी की जा चुकी है।
मंत्री ने कहा कि सरकार केवल वादे नहीं करती, बल्कि उन्हें पूरा भी करती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से अब तक बेसिक शिक्षा में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। “ऑपरेशन कायाकल्प” के तहत विद्यालयों में 19 मानकों पर काम करते हुए पेयजल, शौचालय, फर्नीचर और अन्य मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित किया गया है।

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को सरकारी स्कूलों में लागू किया गया है, जिससे निजी और सरकारी स्कूलों के बीच का अंतर कम हुआ है। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 31,878 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 14,988 में आईसीटी लैब और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई हैं। इसके अलावा शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए 2.61 लाख से अधिक टैबलेट वितरित किए गए हैं।
बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को कक्षा 6 से 12 तक विस्तारित किया गया है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, जूते, बैग और अन्य आवश्यक सामग्री के लिए 1200 रुपए की डीबीटी सहायता सीधे उनके खातों में भेजी जा रही है।

“स्कूल चलो अभियान” के तहत 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक चले विशेष नामांकन अभियान में 20 लाख से अधिक नए छात्रों का नामांकन हुआ, जो सरकार की शिक्षा नीति की सफलता को दर्शाता है।
अपने संबोधन में मंत्री संदीप सिंह ने शिक्षामित्रों से अपील की कि वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहें। उन्होंने कहा कि “उत्तम प्रदेश” बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षामित्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के अंत में शिक्षामित्रों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया। यह आयोजन न केवल आर्थिक राहत का प्रतीक बना, बल्कि शिक्षामित्रों के योगदान को सम्मान देने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।
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