लखनऊ, 9 अप्रैल — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) ने अपने 10 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं और इस अवसर पर योजना की व्यापक सफलता को रेखांकित किया गया। उत्तर प्रदेश में इस योजना ने लाखों लोगों की आर्थिक स्थिति को सशक्त किया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान, प्रदेश के 46.92 लाख लाभार्थियों को कुल 49,501 करोड़ रुपये का ऋण प्रदान किया गया है। इनमें से 30.76 लाख को बैंकों द्वारा और 16.16 लाख को NBFCs द्वारा सीधे लाभ पहुंचाया गया। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लाभार्थियों से संवाद करते हुए उनकी जीवन यात्रा को सुनना योजना की जन सरोकारिता को दर्शाता है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से यह प्रदेश में आर्थिक क्रांति का माध्यम बन चुकी है।
हर वर्ग को मिला लाभ, महिला उद्यमिता को मिला बढ़ावा मुद्रा योजना का सबसे बड़ा लाभ यह रहा कि इसका दायरा व्यापक रहा — छोटे व्यापारी, कृषि आधारित उद्योग, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, खुदरा व्यापार एवं सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग इससे सशक्त हुए। महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति, पिछड़े वर्ग और दिव्यांगजनों को प्राथमिकता देकर योजना ने सामाजिक समावेशिता का उदाहरण प्रस्तुत किया।
डिजिटल भुगतान से व्यापार को नई दिशा अक्टूबर 2024 में ऋण सीमा को 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये किए जाने के बाद छोटे उद्यमियों के लिए विस्तार के रास्ते खुले। साथ ही, लाभार्थियों को QR कोड, UPI, POS जैसी डिजिटल सुविधाओं से जोड़कर योजना को डिजिटल इंडिया से भी जोड़ा गया।
बेरोजगारी में गिरावट और आत्मनिर्भरता में इजाफा पिछले 10 वर्षों में मुद्रा योजना ने ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक विकास की गति बढ़ाई है। स्वरोजगार के नए अवसरों से बेरोजगारी में गिरावट दर्ज की गई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। राज्य सरकार की नियमित समीक्षा, बैंकिंग संस्थानों के सक्रिय सहयोग और उद्यमियों की मेहनत ने मिलकर इस योजना को वास्तविक आर्थिक सशक्तिकरण का उदाहरण बना दिया है।
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