लखनऊ में औद्योगिक विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ ने उत्तर प्रदेश में निवेश और रोजगार की स्थिति की समीक्षा की। सरकार अब प्रत्येक जिले के लिए वार्षिक निवेश लक्ष्य निर्धारित करेगी। उद्यमी मित्रों और जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों के प्रशिक्षण तथा प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन भी किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश की औद्योगिक विकास यात्रा को अब जिला स्तर पर और तेज करने की तैयारी है। राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मंगलवार को हुई महत्वपूर्ण मंथन एवं समीक्षा बैठक में औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ ने अधिकारियों और उद्यमी मित्रों को साफ संदेश दिया कि अब केवल निवेश प्रस्ताव और एमओयू तक सीमित रहने का दौर नहीं है। असली चुनौती है—निवेश को जमीन पर उतारना, उद्योग शुरू कराना और उससे रोजगार पैदा करना।
बैठक में प्रदेश की बदलती औद्योगिक तस्वीर, निवेशकों के बढ़ते भरोसे और रोजगार की नई संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री नन्दी ने इन्वेस्ट यूपी, उद्यमी मित्रों और जीएम डीआईसी यानी जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों द्वारा उद्योगों के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण फैसला यह रहा कि उत्तर प्रदेश सरकार अब प्रत्येक जिले के लिए वार्षिक निवेश लक्ष्य निर्धारित करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि औद्योगिक विकास कुछ बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के हर जिले की अपनी क्षमता और स्थानीय संसाधनों के आधार पर निवेश और उद्योगों को बढ़ावा मिले।
सरकार परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन के लिए उद्यमी मित्रों और जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों के प्रशिक्षण तथा कार्य-प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन भी करेगी।
मंत्री नन्दी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने यह साबित किया है कि अगर नीति स्पष्ट हो, नीयत ईमानदार हो और व्यवस्था परिणाम देने के लिए प्रतिबद्ध हो, तो निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदला जा सकता है।

नन्दी ने कहा कि औद्योगिक विकास विभाग अब सिर्फ एमओयू करने तक सीमित नहीं है। विभाग की कार्यशैली और प्रतिबद्धता का उद्देश्य निवेश परियोजनाओं को वास्तविकता में बदलना है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था नए शिखर की ओर बढ़ रही है और प्रदेश देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में तेजी से उभर रहा है।
मंत्री के अनुसार राष्ट्रीय जीडीपी में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 9.1 प्रतिशत है। वर्ष 2016-17 में प्रदेश का जीएसडीपी लगभग ₹13.30 लाख करोड़ था, जो 2024-25 में बढ़कर करीब ₹30.25 लाख करोड़ पहुंच गया। सरकार ने आने वाले समय में इसे ₹39.8 लाख करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
औद्योगिक विकास के प्रभाव को रोजगार से जोड़ते हुए मंत्री नन्दी ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 33,068 पंजीकृत कारखाने संचालित हैं। इनमें लगभग 38.09 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।
इनमें 2.09 लाख से अधिक महिलाएं भी शामिल हैं। सरकार का मानना है कि बढ़ता औद्योगिक निवेश सिर्फ आर्थिक गतिविधि नहीं बढ़ाता, बल्कि युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार तथा परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम भी बनता है।
उत्तर प्रदेश में आयोजित चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी यानी GBC के जरिए निवेश परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की स्थिति पर भी बैठक में चर्चा हुई।
मंत्री नन्दी के मुताबिक चार GBC के माध्यम से 16,478 परियोजनाओं में ₹12 लाख 10 हजार 274 करोड़ के निवेश को क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ाया जा चुका है। साथ ही GBC 5.0 की तैयारियां भी चल रही हैं।

यानी अब सरकार का फोकस केवल निवेश आकर्षित करने पर नहीं, बल्कि प्रस्तावित परियोजनाओं को समय पर शुरू कराने पर है।
निवेशकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए विकसित की गई इन्वेस्ट यूपी की भूमिका पर भी समीक्षा बैठक में जोर दिया गया।
मंत्री ने कहा कि निवेशकों की समस्याओं का समाधान, आवश्यक अनुमोदन, परियोजना क्रियान्वयन और निवेश के बाद जरूरी सहयोग उपलब्ध कराने में इन्वेस्ट यूपी प्रभावी भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा स्पष्ट है—सरकार हर निवेशक का स्वागत करती है और लगातार संवाद के माध्यम से उनकी समस्याओं को समझकर समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है
नन्दी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का औद्योगिक विकास अब केवल लखनऊ, नोएडा, कानपुर या दूसरे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रत्येक जिले की क्षमता और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर उद्योगों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
किसी जिले में कृषि आधारित उद्योग और फूड प्रोसेसिंग, तो कहीं टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, सेवा क्षेत्र और नई तकनीक आधारित उद्योग विकसित किए जा रहे हैं।

सरकार का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों, स्थानीय प्रतिभा और स्थानीय उद्यमिता को वैश्विक बाजार से जोड़ना
बैठक में मंत्री नन्दी ने उद्यमी मित्रों को केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश के औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। संदेश साफ था कि उद्यमी मित्र निवेशकों और सरकार के बीच मजबूत कड़ी बनकर परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाएं।
साथ ही अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि निवेश प्रस्ताव अनावश्यक देरी में न फंसें और निवेशक को जरूरी मंजूरियां तथा सहयोग समय पर मिले।
बैठक में राज्य मंत्री औद्योगिक विकास जसवंत सिंह सैनी, आईआईडीसी दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास आलोक कुमार, सचिव औद्योगिक विकास विजय किरण आनंद, एसीईओ इन्वेस्ट यूपी श्रीमती प्रेरणा शर्मा और एसीईओ इन्वेस्ट यूपी शशांक चौधरी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
उत्तर प्रदेश में निवेश के बड़े आंकड़े सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार के सामने अगली बड़ी चुनौती इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारने की है। इसी दिशा में जिलेवार निवेश लक्ष्य, उद्यमी मित्रों की जवाबदेही और अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यानी यूपी के औद्योगिक विकास का अगला अध्याय सिर्फ “कितना निवेश आया” पर नहीं, बल्कि “कितने उद्योग वास्तव में शुरू हुए और कितने रोजगार पैदा हुए” पर तय होगा।
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