दिल्ली के Sadar Bazar से सामने आए एक मामले की जांच करते हुए PS Cyber North ने फर्जी Paytm/UPI स्क्रीनशॉट के जरिए दुकानदारों को ठगने वाले कथित मल्टी-स्टेट साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस के मुताबिक अब तक ₹30.81 लाख से ज्यादा की ठगी की रकम ट्रेस हुई है और मुख्य आरोपी Nikhil Yadav को गिरफ्तार किया गया है।
अगर कोई ग्राहक दुकान पर सामान खरीदे, मोबाइल पर Paytm या UPI का सफल पेमेंट स्क्रीनशॉट दिखाए और कहे कि “पेमेंट हो गया है”, तो क्या आप उस पर भरोसा करेंगे? शायद हां। लेकिन राजधानी दिल्ली में साइबर ठगों ने इसी भरोसे को अपना हथियार बना लिया। पहले नकली पेमेंट का स्क्रीनशॉट दिखाया जाता था, फिर दुकानदार के मोबाइल तक पहुंच बनाने की कोशिश होती थी और मौका मिलते ही खाते से रकम उड़ाने का खेल शुरू हो जाता था।
PS Cyber North की जांच में सामने आए इस मामले ने पुलिस को दिल्ली से मुंबई तक फैले ऐसे कई मामलों की कड़ियों तक पहुंचाया है। पुलिस के मुताबिक, अब तक सामने आए मामलों में ₹30,81,700 से अधिक की ठगी की रकम ट्रेस की जा चुकी है। हालांकि पूरी रकम और नेटवर्क की जांच अभी जारी है।
इस कार्रवाई में मुख्य आरोपी Nikhil Yadav उर्फ Nada उर्फ Nala को 20 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया। जांच में उसके साथ एक महिला और Tarun की भूमिका भी सामने आई, जिन्हें पुलिस ने apprehend कर bound down किया है। पुलिस का कहना है कि आगे की जांच में और पीड़ितों तथा इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान हो सकती है।
Sadar Bazar की दुकान से खुला ठगी का राज
मामला 29 मार्च 2026 को सामने आया, जब Sadar Bazar, दिल्ली स्थित कपड़े की दुकान के मालिक Vishnu Kumar Goyal ने PS Cyber North में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के मुताबिक, एक व्यक्ति ग्राहक बनकर उनकी दुकान पर आया और कपड़े खरीदे। भुगतान के समय उसने Paytm का ऐसा स्क्रीनशॉट दिखाया, जिसमें पेमेंट सफल दिखाई दे रहा था।
लेकिन दुकानदार ने जब अपना बैंक अकाउंट चेक किया तो वहां कोई रकम जमा नहीं हुई थी।
इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर दुकानदार को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि वह पेमेंट की समस्या ठीक कर सकता है। इसी बहाने उसने मोबाइल फोन देखने या अपने हाथ में लेने की कोशिश की।
पुलिस के अनुसार, मोबाइल तक पहुंच मिलने के बाद आरोपी ने दुकानदार के बैंक खाते से ₹1 लाख की अनधिकृत ट्रांजैक्शन कर दी।
शिकायत के आधार पर e-FIR No. 81/2026, धारा 318(4)/319/61(2) BNS के तहत PS Cyber North में मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू हुई।
जांच के लिए बनाई गई विशेष टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए DCP/North Niharika Bhatt की समग्र निगरानी, Addl. DCP-II/North Ram Dulesh Meena के मार्गदर्शन और ACP/Operations/North Vishesh Dhatterwal के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई।
टीम का नेतृत्व Inspector Rohit Gahlot, SHO/PS Cyber North ने किया। टीम में ASI Sandeep, Constable Sumit, Constable Aman और Constable Vijay शामिल थे।
पुलिस टीम ने बैंकिंग और UPI ट्रांजैक्शन की तकनीकी जांच के साथ-साथ टेलीकॉम रिकॉर्ड और पैसों के लेन-देन का विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि ठगी की रकम पहले एक mule bank account में पहुंची और फिर कई ट्रांजैक्शन के जरिए आगे भेजी गई।
पुलिस के अनुसार, इस तरह रकम को अलग-अलग खातों में घुमाने का मकसद कथित तौर पर money trail को जटिल बनाना था।

जांच के दौरान पुलिस उस महिला तक पहुंची, जिसके बैंक खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई थी। महिला की उम्र 27 वर्ष है और वह Malka Ganj, Delhi की रहने वाली तथा गृहिणी बताई गई है। पुलिस ने उसे apprehend कर bound down किया।
पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि उसने रकम Tarun नाम के व्यक्ति को ट्रांसफर की थी।
इसके बाद 25 वर्षीय Tarun, निवासी Vashishtha Enclave, Baba Colony, Burari, Delhi, को भी apprehend कर bound down किया गया। Tarun 12वीं तक पढ़ा है और दिल्ली में एक निजी कंपनी में काम करता है।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान Tarun से मिली जानकारी के आधार पर ठगी की रकम के आगे के कनेक्शन का पता चला और उसने कथित तौर पर रकम Nikhil Yadav उर्फ Nada उर्फ Nala को नकद देने की बात बताई।
इसके बाद गुप्त सूचना और तकनीकी जांच की मदद से पुलिस ने Nikhil तक पहुंच बनाई और उसे 20 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर लिया।
ऐसे चलता था पूरा खेल
पूछताछ में सामने आए कथित modus operandi के अनुसार, आरोपी छोटी दुकानों और दुकानदारों को निशाना बनाता था। खासतौर पर ऐसी दुकानों को, जहां रोजमर्रा के सामान की खरीदारी होती है और कम रकम के भुगतान पर दुकानदार जल्दी भरोसा कर लेते हैं।
आरोपी सामान खरीदता और फिर फर्जी या digitally manipulated Paytm/UPI payment screenshot दिखाकर दुकानदार को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करता कि पेमेंट हो चुका है।
जब दुकानदार बैंक अकाउंट चेक करके बताता कि पैसा नहीं आया, तो आरोपी कथित तौर पर मदद करने का नाटक करता।
यहीं से असली खेल शुरू होता था।
वह पेमेंट की समस्या ठीक करने के बहाने दुकानदार का मोबाइल देखने की कोशिश करता। अगर दुकानदार मोबाइल देने से मना करता, तो पुलिस के अनुसार आरोपी मोबाइल या UPI से जुड़े credentials को देखने या याद करने की कोशिश करता था।
इसके बाद मौका मिलने पर मोबाइल चोरी या स्नैच करने का आरोप है।
मोबाइल और जरूरी credentials हासिल करने के बाद कथित तौर पर बैंकिंग या UPI एप्लिकेशन के जरिए अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए जाते थे।
इसके बाद रकम mule bank accounts में भेजी जाती और कुछ मामलों में ATM से निकाल ली जाती थी। पुलिस के अनुसार इससे रकम की असली कड़ी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।
एक ही तरीका, कई शहरों में कई मामले
पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपी के कथित खुलासों को तकनीकी, दस्तावेजी और पुलिस रिकॉर्ड से cross-verify किया। इसके बाद दिल्ली और मुंबई के कई मामलों में उसकी संलिप्तता सामने आई।
पुलिस के अनुसार आरोपी का संबंध इन मामलों से पाया गया है—
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FIR No. 371/2026, धारा 318(4) BNS, PS Cyber North West, दिनांक 11 अगस्त 2026।
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FIR No. 475/2026, धारा 305 BNS, PS Model Town, दिल्ली, दिनांक 11 अगस्त 2026।
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e-FIR No. 80066401/2026, धारा 305/331(4) BNS, PS Sarai Rohilla, दिनांक 11 अगस्त 2026।
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e-FIR No. 80066988/2026, धारा 305 BNS, PS Sabzi Mandi, दिनांक 13 अगस्त 2026।
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e-FIR No. 80068549/2026, धारा 303(2) BNS, PS Roop Nagar, दिनांक 18 अगस्त 2026।
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FIR No. 572/25, धारा 309(4) BNS, PS Shivdi, Mumbai।
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FIR No. 435/25, धारा 303(2) BNS, PS Tardeo, Mumbai।
इनके अलावा Sadar Bazar की मूल शिकायत से जुड़ा e-FIR No. 81/2026 भी पुलिस ने इस कार्रवाई में वर्क आउट किया है।
आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया
पुलिस के मुताबिक, Nikhil Yadav उर्फ Nada उर्फ Nala, उम्र 22 वर्ष, Malka Ganj, Subzi Mandi, Delhi का निवासी है और उसने 12वीं तक पढ़ाई की है। पुलिस ने उसे habitual criminal बताया है और उसके खिलाफ दिल्ली और मुंबई के अलग-अलग थानों में चोरी और धोखाधड़ी से जुड़े 8 पुराने मामले दर्ज होने की जानकारी दी है।
वहीं 27 वर्षीय महिला गृहिणी है, जबकि Tarun निजी कंपनी में काम करता है।
जांच अभी खत्म नहीं हुई
पुलिस के सामने अब अगली चुनौती इस पूरे नेटवर्क की बाकी कड़ियों तक पहुंचना है। जांच टीम अतिरिक्त पीड़ितों की पहचान, पूरी money trail को trace करने और mule bank accounts से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।
यह मामला दुकानदारों के लिए भी एक बड़ा सबक सामने लाता है। सिर्फ मोबाइल स्क्रीन पर दिख रहे Paytm या UPI payment screenshot को देखकर भुगतान की पुष्टि नहीं करनी चाहिए। पैसा वास्तव में बैंक खाते में credited हुआ है या नहीं, इसकी स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है।
क्योंकि इस मामले में ठगों का पहला हथियार कोई sophisticated hacking software नहीं, बल्कि एक फर्जी payment screenshot और भरोसे का फायदा उठाने की कोशिश थी।
और यही इस पूरे साइबर फ्रॉड की सबसे चौंकाने वाली कड़ी है—दुकान पर कुछ हजार रुपये का सामान खरीदने से शुरू होने वाला खेल कथित तौर पर दुकानदार के बैंक खाते से लाखों रुपये उड़ाने तक पहुंच रहा था।
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