लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश के युवाओं, औद्योगिक निवेश और पर्यटन को लेकर तीन अहम फैसले लिए गए। स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट खरीदने का प्रस्ताव मंजूर किया गया। वहीं बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में ₹2,606.04 करोड़ के औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए तीन कंपनियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट देने की मंजूरी मिली। इसके अलावा मैनपुरी में समान बर्ड सेंचुरी के पास 6 हेक्टेयर ग्राम सभा भूमि पर्यटन विभाग को निशुल्क हस्तांतरित कर ‘मयंक ऋषि बर्ड सेंचुरी’ विकसित करने का फैसला हुआ।
उत्तर प्रदेश में मंगलवार को हुई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली कैबिनेट बैठक कई मायनों में अहम रही। बैठक में ऐसे फैसले लिए गए जिनका असर प्रदेश के युवाओं, औद्योगिक क्षेत्र और पर्यटन पर पड़ने की उम्मीद है। सरकार ने एक तरफ युवाओं को डिजिटल संसाधनों से जोड़ने के लिए 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी, तो दूसरी ओर तीन बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के जरिए ₹2,606.04 करोड़ के निवेश का रास्ता साफ किया।
इसी बैठक में मैनपुरी स्थित समान बर्ड सेंचुरी के आसपास पर्यटन सुविधाओं को विस्तार देने के लिए 6 हेक्टेयर ग्राम सभा भूमि पर्यटन विभाग को निशुल्क हस्तांतरित करने का भी निर्णय लिया गया। यानी कैबिनेट के फैसलों में शिक्षा और रोजगार से लेकर उद्योग और ईको-टूरिज्म तक की तस्वीर दिखाई दी।
कैबिनेट ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। टेंडर प्रक्रिया के जरिए चयनित संस्थानों को खरीद आदेश जारी करने की अनुमति भी दी गई है। योजना के पात्र युवाओं को ये टैबलेट मुफ्त में उपलब्ध कराए जाएंगे।
यह योजना पांच वर्ष की अवधि के लिए लागू की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए ₹2,374.60 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि इस योजना से केंद्र सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

इस योजना का दायरा केवल सामान्य उच्च शिक्षा तक सीमित नहीं है। स्नातक, परास्नातक, डिप्लोमा, स्किल डेवलपमेंट और विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़े पात्र युवाओं को इसका लाभ मिलेगा। आईटीआई और कौशल प्रशिक्षण से जुड़े पंजीकृत युवाओं को भी डिजिटल संसाधनों से जोड़ा जाएगा।
टैबलेट मिलने से छात्र ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल प्रशिक्षण और शैक्षणिक सामग्री तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इसके साथ ही सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं, ऑनलाइन ट्रेनिंग, रोजगार तथा स्वरोजगार से जुड़ी सेवाओं की जानकारी हासिल करने में भी उन्हें मदद मिलेगी।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि इस फैसले से उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण और आईटीआई से जुड़े युवाओं का तकनीकी सशक्तिकरण होगा। उनके मुताबिक डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच से प्रशिक्षण की गुणवत्ता और युवाओं की रोजगार क्षमता दोनों में सुधार हो सकता है।
कैबिनेट ने औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी बड़ा फैसला लिया। एग्रीस्टो मासा प्राइवेट लिमिटेड, कैनपैक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और सुप्रीम इंडस्ट्रीज लिमिटेड को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
इन तीनों परियोजनाओं में कुल ₹2,606.04 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव है। परियोजनाएं क्रमशः बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में स्थापित होंगी। इन कंपनियों को एफडीआई/एफसीआई और अन्य पात्र श्रेणियों के तहत नीतिगत प्रोत्साहन के रूप में लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया जाएगा।

सबसे बड़ा निवेश कैनपैक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की परियोजना में प्रस्तावित है। कंपनी उन्नाव में एल्युमिनियम बेवरेज कैन बनाने की इकाई स्थापित करेगी। इस परियोजना में ₹1,573.62 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। लगभग 26 हेक्टेयर भूमि पर यह इकाई UPEIDA के आईएमएलसी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर क्षेत्र में स्थापित की जाएगी। इसकी अनुमानित वार्षिक उत्पादन क्षमता 130 करोड़ यूनिट होगी।
एग्रीस्टो मासा प्राइवेट लिमिटेड बिजनौर में अपनी मौजूदा पोटैटो फ्लेक्स उत्पादन गतिविधियों का विस्तार करते हुए फ्रेंच फ्राइज का उत्पादन करेगी। कंपनी की वर्तमान उत्पादन क्षमता करीब 7,332 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है, जबकि प्रस्तावित फ्रेंच फ्राइज इकाई की अधिकतम स्थापित क्षमता 75,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष होगी। इस परियोजना में ₹794.27 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।
वहीं सुप्रीम इंडस्ट्रीज लिमिटेड कानपुर देहात में वैल्यू-एडेड प्लास्टिक बिल्डिंग सॉल्यूशन उत्पादों का निर्माण करेगी। इसके लिए ₹238.15 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।
1942 में स्थापित सुप्रीम इंडस्ट्रीज देश के प्रमुख प्लास्टिक प्रोसेसिंग समूहों में शामिल है। कंपनी देशभर में 28 प्लांट संचालित करती है, जहां आधुनिक तकनीक और उन्नत विनिर्माण सुविधाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
तीनों परियोजनाओं से विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की संभावना है।
कैबिनेट ने पर्यटन क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया। समान बर्ड सेंचुरी के पास 6 हेक्टेयर ग्राम सभा भूमि पर्यटन विभाग के पक्ष में निशुल्क हस्तांतरित करने को मंजूरी दी गई है। इस क्षेत्र को ‘मयंक ऋषि बर्ड सेंचुरी’ के नाम से विकसित किया जाएगा।

मैनपुरी की समान बर्ड सेंचुरी उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण वेटलैंड और रामसर साइट है। यह प्रवासी पक्षियों के लिए प्रमुख आवास स्थल है। गंगा के मैदानी क्षेत्र में स्थित यह मौसमी झील पक्षी प्रेमियों, प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों को आकर्षित करती है।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के मुताबिक प्रवासी मौसम में देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में पक्षी यहां पहुंचते हैं।
सरकार प्रदेश के प्रमुख बर्ड सेंचुरी क्षेत्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बर्डवॉचिंग सर्किट से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत वॉचटावर, साइन बोर्ड, सोलर लाइटिंग और जैव विविधता अध्ययन केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने पर जोर है। पर्यटकों की सुविधा के साथ प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए भी कार्ययोजनाएं तैयार की जा रही हैं। यहां पर्यटकों को नाव और वॉचटावर के माध्यम से पक्षियों को करीब से देखने का अवसर भी मिल सकता है।
योगी कैबिनेट के इन फैसलों को एक साथ देखें तो सरकार की प्राथमिकताओं की तस्वीर साफ नजर आती है। युवाओं को डिजिटल तकनीक से जोड़ना, उद्योगों के लिए निवेश का माहौल तैयार करना और प्राकृतिक स्थलों को पर्यटन से जोड़ना—तीनों क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की गई है।
अब असली परीक्षा इन फैसलों के जमीन पर उतरने की होगी। 25 लाख टैबलेट कितनी तेजी से पात्र युवाओं तक पहुंचते हैं, ₹2,606 करोड़ की औद्योगिक परियोजनाएं कब धरातल पर आती हैं और मैनपुरी में मयंक ऋषि बर्ड सेंचुरी पर्यटकों के लिए कितनी आकर्षक बनती है—इन सवालों के जवाब आने वाले समय में सामने आएंगे।
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