यूपी सिडको की 187वीं बोर्ड बैठक में निगम को और अधिक सशक्त, आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए। इंजीनियरों के प्रशिक्षण, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करने, संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा और 1650 करोड़ रुपये के नए लक्ष्य को लेकर व्यापक चर्चा हुई।
उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं अवसंरचना विकास निगम यानी यूपी सिडको अब खुद को नए दौर की जरूरतों के मुताबिक पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। निगम की 187वीं बोर्ड बैठक में ऐसे कई अहम फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर आने वाले समय में प्रदेश की निर्माण परियोजनाओं, प्रशासनिक व्यवस्था और तकनीकी कार्यप्रणाली पर देखने को मिल सकता है।
मंगलवार को आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता यूपी सिडको के चेयरमैन श्री वाई. पी. सिंह ने की। बैठक में निगम के प्रशासनिक, तकनीकी और विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। साथ ही निगम को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए कई नई रणनीतियों पर सहमति बनी।
बैठक में सबसे अधिक जोर परियोजनाओं की निगरानी, समयबद्ध क्रियान्वयन और गुणवत्ता सुधार पर दिया गया। अधिकारियों ने माना कि तेजी से बदलते दौर में पारंपरिक कार्यप्रणाली के बजाय तकनीक आधारित और जवाबदेह सिस्टम की आवश्यकता है।
प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम को हाईटेक बनाने की तैयारी
बैठक में एसओपी यानी मानक संचालन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष चर्चा हुई। इसके साथ ही प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
अधिकारियों ने कहा कि निर्माण परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, समय पर कार्य पूरा करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत प्रबंधन प्रणाली बेहद जरूरी है। इसके लिए डिजिटल ट्रैकिंग और नियमित समीक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाएगा।
यूपी सिडको का मानना है कि यदि परियोजनाओं की निगरानी मजबूत होगी तो निर्माण कार्यों में देरी कम होगी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
जेई और एई को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
बैठक में एक बड़ा फैसला यह भी लिया गया कि यूपी सिडको के सभी कनिष्ठ अभियंताओं (JE) और सहायक अभियंताओं (AE) को मुख्यालय स्तर पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह प्रशिक्षण वरिष्ठ अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों की देखरेख में आयोजित होगा। इसका उद्देश्य अभियंताओं की तकनीकी दक्षता को बढ़ाना और उन्हें नई तकनीकों तथा आधुनिक निर्माण प्रक्रियाओं से अपडेट करना है।
अधिकारियों का मानना है कि यदि फील्ड में काम करने वाले इंजीनियर आधुनिक तकनीकी ज्ञान से लैस होंगे तो परियोजनाओं की गुणवत्ता और कार्यक्षमता दोनों बेहतर होंगी।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि केवल फील्ड स्टाफ ही नहीं, बल्कि निगम के शीर्ष प्रबंधन को भी समय-समय पर नई व्यवस्थाओं और तकनीकी बदलावों के अनुरूप खुद को अपडेट रखना होगा।

संगठनात्मक ढांचे में हो सकता है बड़ा बदलाव
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देशों के अनुरूप निगम के संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के मुताबिक, यूपी सिडको की कार्यप्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित और तेज बनाने के लिए कुछ इकाइयों के विलय यानी मर्जर का प्रस्ताव सामने आया है। इस प्रस्ताव पर बोर्ड स्तर पर गंभीरता से विचार किया गया।
अधिकारियों ने कहा कि बदलते समय के अनुसार यदि संगठनात्मक ढांचे में सुधार किए जाते हैं तो निगम की कार्यक्षमता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी।
इसके लिए एक निश्चित टाइमलाइन तय कर आगे की कार्यवाही करने पर भी सहमति बनी।
पुराने फैसलों की भी हुई समीक्षा
बैठक में पूर्व में लिए गए निर्णयों की समीक्षा भी की गई। विभिन्न एजेंडों और विभागीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए प्रशासनिक सुधार, परियोजनाओं की प्रगति और कार्यकुशलता बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श हुआ।
चेयरमैन वाई. पी. सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निगम के हर कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में चल रही विकास परियोजनाएं सरकार की प्राथमिकताओं से जुड़ी हैं, इसलिए उनमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
1544 करोड़ का टर्नओवर, अब 1650 करोड़ का लक्ष्य
बैठक में यूपी सिडको की वित्तीय उपलब्धियों का भी ब्यौरा प्रस्तुत किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में निगम ने 1544 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल किया है। इस उपलब्धि पर बोर्ड ने संतोष व्यक्त किया और इसे निगम की कार्यक्षमता का सकारात्मक संकेत बताया।
अब अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निगम को 1650 करोड़ रुपये का नया लक्ष्य दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन और तकनीकी सुधार इसी गति से जारी रहे तो यूपी सिडको इस लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सकता है।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी सख्ती
बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि यूपी सिडको के मुख्य अभियंता द्वारा प्रदेशभर में निर्माणाधीन भवनों और परियोजनाओं का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है।
निरीक्षण से संबंधित रिपोर्ट बोर्ड बैठक में प्रस्तुत की गई, जिस पर सदस्यों ने विस्तार से चर्चा की।
अधिकारियों ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण बेहद जरूरी है। इससे न केवल काम की गति बनी रहती है, बल्कि समय रहते खामियों को भी दूर किया जा सकता है।
कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रबंध निदेशक श्री संजीव सिंह, कंपनी सचिव श्रीमती प्रज्ञा सिंह, निदेशक सामान्य प्रबंधन सार्वजनिक उद्यम विभाग श्री राजीव श्रीवास्तव, विशेष सचिव समाज कल्याण विभाग श्री प्रवीण मिश्रा, संयुक्त सचिव वित्त विभाग श्री अजय कुमार तिवारी, अपर सचिव समाज कल्याण विभाग श्रीमती जया सिंह सहित निगम के कई वरिष्ठ अधिकारी और निदेशक मंडल के सदस्य मौजूद रहे।
इसके अलावा श्री के.जी. दुबे, श्री रत्नेश कुमार सिंह और अन्य संबंधित अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।
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