बिसरख पुलिस ने फर्जी ECHS कार्ड के जरिए इलाज कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों से इलाज कराकर लाखों की ठगी की और मौत के बाद भी फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनाया।
Greater Noida के Bisrakh थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए इलाज के नाम पर चल रहे संगठित ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में Uttar Pradesh Police ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी ECHS कार्ड और आधार कार्ड के जरिए अस्पताल में इलाज कराकर लाखों रुपये का अवैध लाभ उठा रहे थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शिखा सिंह, यश सिंह, जितेन्द्र यादव और दानिश खान के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे गए फर्जी ECHS कार्ड और आधार कार्ड बरामद किए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने वादी की जीवित पुत्री के नाम पर जारी ECHS कार्ड और आधार कार्ड का फर्जी तरीके से इस्तेमाल करते हुए तनु नामक युवती का इलाज कराया। इस पूरी साजिश के जरिए करीब ₹6,50,000 की धनराशि का अवैध लाभ उठाया गया।
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब इलाज के दौरान 5 अगस्त 2025 को तनु की मृत्यु हो गई। इसके बावजूद आरोपियों ने धोखाधड़ी जारी रखते हुए उसी फर्जी पहचान के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र भी तैयार कर दिया और शव को भी उसी नाम से प्राप्त किया।

पूछताछ के दौरान आरोपी शिखा सिंह ने बताया कि उसकी बहन तनु लंबे समय से बीमार थी और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका इलाज संभव नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान बुलंदशहर के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एक परिचित के माध्यम से उसकी मुलाकात दानिश खान से हुई, जिसने कम खर्च में इलाज कराने का झांसा दिया।
दानिश खान ने व्हाट्सएप के जरिए फर्जी ECHS कार्ड और आधार कार्ड उपलब्ध कराए, जिनका इस्तेमाल कर 29 जुलाई 2025 को तनु को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद उसकी मौत हो गई, लेकिन आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए पूरे सिस्टम को गुमराह किया।
पुलिस पूछताछ में दानिश खान ने खुलासा किया कि वह अपने साथी प्रदीप के साथ पिछले दो वर्षों से इस तरह की धोखाधड़ी कर रहा था। वे ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे जो इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ होते थे और उन्हें फर्जी दस्तावेजों के जरिए अस्पताल में भर्ती कराकर पैसे ऐंठते थे।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि आरोपी पहले भी Noida के थाना फेस-2 से इसी तरह के मामले में जेल जा चुके हैं, लेकिन रिहा होने के बाद फिर से इसी अपराध में शामिल हो गए। फिलहाल फरार आरोपी प्रदीप की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित कर तलाश जारी है।
इस मामले में थाना बिसरख में मुकदमा संख्या 178/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
यह घटना न केवल एक आपराधिक साजिश को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि किस तरह कुछ लोग गरीब और जरूरतमंद लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर सिस्टम के साथ बड़ा धोखा कर रहे हैं।
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