नोएडा पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook और Instagram के जरिए फर्जी लॉटरी और इनाम का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये ठगने वाले 10 सदस्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपी ₹50 की फर्जी लॉटरी टिकट बेचकर लोगों को 12 लाख रुपये का इनाम जीतने का लालच देते थे और फिर GST, TDS, RBI क्लीयरेंस व अन्य शुल्क के नाम पर रकम ऐंठते थे।
गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook और Instagram के माध्यम से लोगों को लॉटरी जीतने का झांसा देकर ठगी कर रहा था। थाना फेस-3 पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने सेक्टर-121 क्षेत्र में छापेमारी कर 10 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार यह गिरोह पिछले कई महीनों से देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय था और विशेष रूप से दक्षिण भारत के लोगों को निशाना बना रहा था।
NCRP पोर्टल पर लगातार मिल रही थीं शिकायतें
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पिछले लगभग दो महीनों से NCRP और समन्वय पोर्टल के माध्यम से संदिग्ध मोबाइल नंबरों, IMEI नंबरों और बैंक खातों के संबंध में लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। जांच के दौरान पता चला कि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इस गिरोह से जुड़ी करीब 18 शिकायतें दर्ज की गई थीं।
इसके बाद साइबर सेल और स्थानीय पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन और बैंक खातों की जांच शुरू की। जांच के दौरान कई फर्जी बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का उपयोग सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की योजना बनाई।

ऐसे रचते थे ठगी का पूरा खेल
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने खुलासा किया कि वे Facebook और Instagram पर आकर्षक विज्ञापन पोस्ट करते थे। इन विज्ञापनों में लोगों को लाखों रुपये की लॉटरी जीतने का दावा किया जाता था।
जब कोई व्यक्ति विज्ञापन देखकर संपर्क करता था तो उसे मात्र ₹50 में एक तथाकथित लॉटरी टिकट भेजा जाता था। कुछ समय बाद उसे फोन करके बताया जाता था कि उसकी 12 लाख रुपये की लॉटरी निकल आई है।
इसके बाद आरोपी विभिन्न बहानों से पैसे मांगना शुरू कर देते थे।
पीड़ितों से कहा जाता था कि लॉटरी की राशि जारी करने से पहले GST, TDS, RBI क्लियरेंस, NOC, इनकम टैक्स क्लीयरेंस और फाइनल ट्रांसफर चार्ज जमा करना आवश्यक है।
विश्वास दिलाने के लिए आरोपी फर्जी RBI और इनकम टैक्स विभाग के प्रमाणपत्र व्हाट्सएप के माध्यम से भेजते थे।
भाषा के जरिए जीतते थे लोगों का भरोसा
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह मुख्य रूप से दक्षिण भारत के लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी स्थानीय भाषाओं में बातचीत करते थे ताकि पीड़ितों को उन पर आसानी से विश्वास हो जाए।
यही वजह रही कि कई लोग इस ठगी के जाल में फंस गए और बार-बार अलग-अलग शुल्क के नाम पर रकम ट्रांसफर करते रहे।

पहचान छिपाने के लिए अपनाते थे ये तरीका
पुलिस के अनुसार गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। आरोपी लगातार मोबाइल नंबर, सिम कार्ड और बैंक खाते बदलते रहते थे।
जैसे ही किसी खाते या नंबर पर पुलिस की नजर पड़ने की आशंका होती थी, उसे बंद कर नया खाता या नया मोबाइल नंबर इस्तेमाल करना शुरू कर देते थे।
साक्ष्य मिटाने के लिए पुराने सिम कार्ड नष्ट कर दिए जाते थे।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार आरोपियों में एलन एंटनी, अंकित कुमार, राहुल, शकील, राजशेखर, गुरु प्रसाद, विनय डीपी, विनोद कुमार, संतोष और चेतन शामिल हैं। इनमें अधिकांश आरोपी कर्नाटक और बिहार के रहने वाले हैं।
पुलिस के अनुसार सभी आरोपी साइबर ठगी नेटवर्क में अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे थे। कोई सोशल मीडिया प्रचार संभालता था, कोई पीड़ितों से बातचीत करता था और कोई बैंक खातों के माध्यम से धनराशि निकालने का काम करता था।
बरामदगी में क्या मिला?
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से—
• 20 मोबाइल फोन
• 04 डेबिट कार्ड
• ₹10,200 नकद
बरामद किए हैं।
जांच एजेंसियां इन मोबाइल फोन और बैंक खातों का डिजिटल विश्लेषण कर रही हैं ताकि ठगी की वास्तविक रकम और पीड़ितों की संख्या का पता लगाया जा सके।

इस मामले में थाना फेस-3 में मुकदमा संख्या 338/2026 दर्ज किया गया है।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत कार्रवाई की जा रही है।
आगे की जांच जारी
पुलिस का मानना है कि यह गिरोह केवल नोएडा या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं। डिजिटल डेटा की जांच के आधार पर पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया और कुल कितनी राशि हड़पी गई।
नागरिकों के लिए चेतावनी
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली किसी भी लॉटरी, इनाम, गिफ्ट या पुरस्कार संबंधी स्कीम पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। यदि कोई व्यक्ति इनाम दिलाने के नाम पर GST, TDS या अन्य शुल्क मांगता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं और साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम साइबर थाने से संपर्क करें।
नोएडा पुलिस की यह कार्रवाई न केवल एक बड़े साइबर नेटवर्क का पर्दाफाश है, बल्कि उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक लालच में आकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठते हैं।
COMMENTS