दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 34.67 करोड़ रुपये मूल्य की 6.934 किलोग्राम हेरोइन बरामद की है। यह हेरोइन कुआलालंपुर से आए एक भारतीय यात्री के ट्रॉली बैग में बेहद शातिर तरीके से छिपाकर लाई जा रही थी। कस्टम अधिकारियों ने प्रोफाइलिंग और एक्स-रे जांच के आधार पर यात्री को पकड़कर गिरफ्तार कर लिया है। मामले को अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है।
देश की राजधानी दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के बड़े मामले का केंद्र बना है। कस्टम विभाग ने सतर्कता और प्रोफाइलिंग के जरिए करोड़ों रुपये की हेरोइन की खेप पकड़कर नशे के कारोबार से जुड़े नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है।
कस्टम अधिकारियों के मुताबिक 16 जून 2026 को मलेशिया के कुआलालंपुर से फ्लाइट संख्या OD-205 के जरिए दिल्ली पहुंचे एक भारतीय यात्री की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं। प्रोफाइलिंग के दौरान अधिकारियों को उस पर शक हुआ, जिसके बाद उसे टर्मिनल-3 के ग्रीन चैनल पर रोक लिया गया।
सामान्यतः ग्रीन चैनल से वही यात्री गुजरते हैं जिनके पास घोषित करने योग्य कोई सामान नहीं होता, लेकिन इस बार अधिकारियों का संदेह सही साबित हुआ।
एक्स-रे स्कैनिंग में सामने आया पूरा खेल
कस्टम अधिकारियों ने यात्री के पास मौजूद दो ट्रॉली बैगों की एक्स-रे स्कैनिंग कराई। जांच के दौरान बैगों के भीतर कुछ असामान्य संरचनाएं दिखाई दीं, जिसके बाद अधिकारियों ने बैगों की विस्तृत तलाशी शुरू की।
जैसे ही ट्रॉली बैगों के अंदरूनी हिस्से को खोला गया, वहां से चार पैकेट बरामद हुए। इन पैकेटों में सफेद रंग का पाउडर भरा हुआ था। मौके पर किए गए प्रारंभिक परीक्षण में यह पदार्थ हेरोइन पाया गया।
इसके बाद पूरी खेप को जब्त कर लिया गया और विस्तृत परीक्षण कराया गया।
6.934 किलोग्राम हेरोइन, कीमत 34.67 करोड़ रुपये
कस्टम विभाग के अनुसार बरामद हेरोइन का कुल शुद्ध वजन 6,934 ग्राम यानी 6.934 किलोग्राम है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब 34 करोड़ 67 लाख रुपये आंकी गई है। इतनी बड़ी मात्रा में हेरोइन की बरामदगी हाल के समय में एयरपोर्ट पर हुई महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स किसी व्यक्तिगत उपयोग के लिए नहीं लाई जाती, बल्कि यह संगठित तस्करी नेटवर्क और बड़े स्तर के वितरण तंत्र का हिस्सा हो सकती है।

क्या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट से जुड़े हैं तार?
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता। बरामद ड्रग्स की मात्रा और कीमत को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट सक्रिय हो सकता है।
अब जांच का फोकस इस बात पर है कि—
- ड्रग्स की खेप कुआलालंपुर से किसने भेजी?
- भारत में इसका अंतिम गंतव्य क्या था?
- खेप को कौन रिसीव करने वाला था?
- क्या इसके तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े हैं?
- भारत में कौन-कौन लोग इस नेटवर्क का हिस्सा हैं?
इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए कस्टम विभाग अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर जांच कर रहा है।
NDPS एक्ट के तहत हुई गिरफ्तारी
कस्टम विभाग ने आरोपी भारतीय यात्री को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बरामद हेरोइन और उसे छिपाने के लिए इस्तेमाल की गई पैकिंग सामग्री को भी जब्त कर लिया गया है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसके संपर्कों, यात्रा इतिहास तथा वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है।
युवाओं तक पहुंच सकती थी यह खेप
नशा विरोधी अभियानों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह खेप एयरपोर्ट सुरक्षा जांच से बचकर बाहर निकल जाती, तो यह देश के विभिन्न हिस्सों में नशीले पदार्थों की सप्लाई का हिस्सा बन सकती थी।
6.9 किलोग्राम हेरोइन से हजारों डोज तैयार किए जा सकते हैं, जो युवाओं और समाज के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकते थे। यही कारण है कि इस कार्रवाई को केवल एक जब्ती नहीं बल्कि समाज को नशे के जाल से बचाने की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है।
जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
फिलहाल कस्टम विभाग पूरे मामले की गहन जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
देश में नशे के खिलाफ जारी अभियान के बीच IGI एयरपोर्ट पर हुई यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि सुरक्षा एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ पूरी सतर्कता के साथ काम कर रही हैं।
34.67 करोड़ रुपये मूल्य की इस हेरोइन की बरामदगी ने न केवल ड्रग तस्करों को बड़ा झटका दिया है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भारत के एयरपोर्ट्स पर सुरक्षा और निगरानी तंत्र लगातार मजबूत हो रहा है।
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