करीब एक दशक से बिहार और उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए चुनौती बना कुख्यात अपराधी ललन सिंह उर्फ लल्लन आखिरकार STF और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में ढेर हो गया। हत्या, डकैती, पुलिस अधिकारियों की हत्या, सरकारी हथियार लूट और करोड़ों की लूट जैसी वारदातों में वांछित ललन पर वाराणसी पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। सहारनपुर में हुई मुठभेड़ के दौरान घायल होने के बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
। लगभग दस वर्षों तक बिहार और उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए सिरदर्द बना रहा कुख्यात अपराधी ललन सिंह उर्फ लल्लन आखिरकार कानून के शिकंजे से बच नहीं सका। हत्या, डकैती, लूट, पुलिस अधिकारियों पर हमले और सरकारी हथियार लूटने जैसी कई सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देने वाला यह इनामी अपराधी रविवार तड़के उत्तर प्रदेश एसटीएफ और स्थानीय पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में घायल हो गया। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
ललन सिंह बिहार के समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीन नगर थाना क्षेत्र के आनंदगोला गांव का रहने वाला था। वह बिहार राज्य से न्यायिक अभिरक्षा से फरार चल रहा था और वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। इसके अलावा चंदौली पुलिस द्वारा भी उस पर इनाम घोषित था।
बड़ी वारदात की फिराक में था ललन
एसटीएफ को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि ललन सिंह अपने एक साथी विवेक कुमार के साथ सहारनपुर जिले में किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की योजना बना रहा है। सूचना के आधार पर अपर पुलिस अधीक्षक लाल प्रताप सिंह के नेतृत्व में टीम सक्रिय हुई और सरसावा-नकुड़ रोड क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई।
22 जून 2026 की सुबह लगभग साढ़े तीन बजे एसटीएफ टीम सरसावा फ्लाईओवर के नीचे समानांतर कच्चे मार्ग पर चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान नकुड़ की ओर से एक मोटरसाइकिल पर दो संदिग्ध युवक आते दिखाई दिए।
पुलिस को देखकर भागे, फिर शुरू हुई फायरिंग
पुलिस टीम ने दोनों को रुकने का संकेत दिया, लेकिन उन्होंने मोटरसाइकिल की रफ्तार बढ़ा दी और कच्चे रास्ते की ओर भागने लगे। उबड़-खाबड़ रास्ते के कारण बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई।
इसके बाद दोनों बदमाश पैदल भागने लगे और पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। मुठभेड़ के दौरान एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक लाल प्रताप सिंह और निरीक्षक अनोजी कुमार पांडेय की बुलेटप्रूफ जैकेट पर एक-एक गोली लगी। सुरक्षात्मक उपकरण होने के कारण दोनों अधिकारी बाल-बाल बच गए।
पुलिस के अनुसार, ललन ने बैग से एक स्वचालित हथियार निकालकर फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में एसटीएफ ने नियंत्रित और आत्मरक्षार्थ फायरिंग की, जिसमें ललन सिंह घायल हो गया। उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया।
अस्पताल में हुई मौत
घायल ललन को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसावा ले जाया गया, जहां से उसे बीडीजी अस्पताल, सहारनपुर रेफर किया गया। उपचार के दौरान चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक की पहचान ललन सिंह उर्फ लल्लन पुत्र शिवशंकर सिंह निवासी आनंदगोला, थाना मोहिउद्दीन नगर, जिला समस्तीपुर (बिहार) के रूप में हुई।
क्या-क्या बरामद हुआ?
मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार और सामान बरामद किया।
- एक स्टेनगन और मैगजीन
- 9 एमएम के 10 जिंदा कारतूस
- 9 एमएम के 3 खोखा कारतूस
- एक पिस्टल और मैगजीन
- .32 बोर के 4 जिंदा कारतूस
- .32 बोर के 4 खोखा कारतूस
- एक बैग
- एक हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल
अपराध की दुनिया का बड़ा नाम था ललन
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार ललन सिंह और उसका गिरोह बिहार तथा उत्तर प्रदेश में कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहा। उसने अपने भाइयों और साथियों के साथ मिलकर कई पुलिस अधिकारियों पर हमले किए।
साल 2016 में नालंदा में एसआई भुवनेश्वर सिंह को गोली मारकर उनकी सरकारी रिवॉल्वर लूट ली गई थी। उसी वर्ष पटना के बाढ़ क्षेत्र में एसएसआई सुरेश ठाकुर की हत्या कर उनकी सरकारी पिस्टल लूट ली गई।
इसके अलावा फतहा थाना क्षेत्र में एक अन्य पुलिस अधिकारी की हत्या कर हथियार लूटने का मामला भी उसके खिलाफ दर्ज था।
कैश वैन लूट और कई हत्याओं में शामिल
2017 में नालंदा के सोहसराय क्षेत्र में कैश वैन पर हमला कर गार्ड और कैशियर की हत्या के बाद लगभग 20 लाख रुपये लूटे गए थे। इसके कुछ दिनों बाद पटना में बैंक कर्मचारियों को निशाना बनाकर लगभग 60 लाख रुपये की लूट की गई। इस दौरान सुरक्षा कर्मियों और चालक की हत्या हुई।
इन घटनाओं ने ललन सिंह को बिहार के सबसे खतरनाक अपराधियों में शामिल कर दिया था।
वाराणसी में दरोगा को मारी थी गोली
8 नवंबर 2022 को वाराणसी कमिश्नरेट के रोहनिया क्षेत्र में ललन सिंह ने अपने भाइयों के साथ मिलकर सब-इंस्पेक्टर अजय यादव को गोली मार दी थी। घटना के बाद उनकी सरकारी पिस्टल और अन्य सामान लूटकर फरार हो गया था।
यह मामला काफी चर्चित रहा और इसके बाद पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
न्यायिक अभिरक्षा से भी हो चुका था फरार
ललन सिंह वर्ष 2022 में बिहार में न्यायिक अभिरक्षा के दौरान हवालात की दीवार तोड़कर अपने भाइयों के साथ फरार हो गया था। इसके बाद से वह लगातार फरारी काट रहा था और कई राज्यों की पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने मुठभेड़ के संबंध में थाना सरसावा में मुकदमा संख्या 209/2026 धारा 109(1) बीएनएस तथा 3/7/25/27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। फरार साथी की तलाश के लिए विशेष टीमें लगाई गई हैं।
एसटीएफ अधिकारियों का मानना है कि ललन सिंह की मौत से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सक्रिय उसके आपराधिक नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। हालांकि पुलिस अब उसके फरार साथियों और संभावित सहयोगियों की तलाश में जुटी हुई है।
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