दिल्ली साइबर पुलिस ने फर्जी हेलीकॉप्टर बुकिंग वेबसाइट्स के जरिए देशभर में लोगों से ठगी करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इस मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, जिनका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था।
दिल्ली पुलिस के साइबर थाना, साउथ डिस्ट्रिक्ट ने एक बड़े और संगठित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी हेलीकॉप्टर बुकिंग वेबसाइट्स के जरिए आम जनता को निशाना बना रहा था। इस गिरोह ने IRCTC जैसे भरोसेमंद नामों का इस्तेमाल कर नकली वेबसाइट्स “irctc-helicopter.com” और “irctc-heliyatra.com” बनाकर लोगों से ऑनलाइन भुगतान के जरिए ठगी को अंजाम दिया।
यह मामला तब सामने आया जब एक पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई कि उससे इन फर्जी वेबसाइट्स के माध्यम से ₹20,328 की ठगी की गई है। शिकायत के आधार पर साइबर थाना साउथ में FIR No. 30/2026 दिनांक 21.05.2026 को BNS की धाराओं 318(4)/61(2)/3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया।
तकनीकी जांच से खुला पूरा नेटवर्क
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई। बैंक खातों की ट्रांजैक्शन डिटेल्स, मनी ट्रेल, डोमेन रजिस्ट्रेशन, जीमेल लॉग्स, आईपी एड्रेस और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की गहन जांच शुरू की गई।
इसी तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिससे आरोपियों की पहचान संभव हो सकी। जांच में यह भी सामने आया कि यह सिर्फ एक वेबसाइट आधारित धोखाधड़ी नहीं थी, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के तहत पूरे देश में साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया जा रहा था।

बिहार और यूपी से हुई गिरफ्तारी
तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले दो आरोपियों को बिहार के नालंदा से गिरफ्तार किया—ओमप्रकाश कुमार और रोहित कुमार।
पूछताछ के दौरान इन दोनों आरोपियों ने इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी का खुलासा किया। इनके बयान के आधार पर पुलिस ने तीसरे आरोपी शreyansh Tiwari @ Shivam को ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया। बताया गया कि वही इन फर्जी वेबसाइट्स का डेवलपर और ऑपरेटर था।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से होता था प्रचार
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी केवल वेबसाइट बनाकर ही नहीं रुकते थे, बल्कि Meta (Facebook) जैसे प्लेटफॉर्म पर पेड विज्ञापनों के जरिए इन फर्जी हेलीकॉप्टर बुकिंग साइट्स को प्रमोट करते थे।
लोग जब इन विज्ञापनों पर क्लिक करते थे, तो उन्हें असली और भरोसेमंद सरकारी बुकिंग वेबसाइट जैसा इंटरफेस दिखाई देता था, जिसके कारण वे आसानी से धोखे का शिकार हो जाते थे।
देशभर में 30 से अधिक शिकायतों से जुड़ा नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लगभग 30 से अधिक NCRP (National Cyber Crime Reporting Portal) शिकायतों से जुड़ा हुआ है, जो देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दर्ज की गई थीं।

इन मामलों में कुल मिलाकर करीब ₹10 लाख की साइबर ठगी की जानकारी सामने आई है, हालांकि जांच अभी जारी है और यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है।
आरोपियों का प्रोफाइल
1. ओमप्रकाश कुमार
निवासी: नालंदा, बिहार
पहले भी शामिल: FIR No. 06/2022 U/s 420/34 IPC, PS Cyber North-West, दिल्ली
2. रोहित कुमार
निवासी: नालंदा, बिहार
पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड: नहीं
3. शreyansh Tiwari @ Shivam
निवासी: जौनपुर, उत्तर प्रदेश
शिक्षा: B.Tech छात्र
भूमिका: फर्जी वेबसाइट्स का डेवलपर और ऑपरेटर
पूर्व रिकॉर्ड: नहीं
बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण डिजिटल और वित्तीय सबूत बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं—

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08 मोबाइल फोन
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02 लैपटॉप
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01 iPad (10th Generation)
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कई ATM/डेबिट कार्ड
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₹20,328 बैंक खाते में lien
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साइबर फ्रॉड से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और डेटा
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
साइबर पुलिस स्टेशन, साउथ डिस्ट्रिक्ट की तेज़ और तकनीकी रूप से मजबूत जांच के चलते इस पूरे अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश संभव हो सका। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक शुरुआत है और इस नेटवर्क के अन्य लिंक की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि कैसे डिजिटल युग में साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। फर्जी वेबसाइट्स, सरकारी नामों का दुरुपयोग और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था। लेकिन साइबर पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच ने इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है।
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