उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के मंसूरपुर थाना क्षेत्र स्थित जड़ौदा गांव में कथित सामूहिक धर्मांतरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। बजरंग दल ने आरोप लगाया कि करीब 200 लोगों को कथित रूप से प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के मंसूरपुर थाना क्षेत्र के जड़ौदा गांव में कथित सामूहिक धर्मांतरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। गांव के एक गोदाम में बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने की सूचना के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और आरोप लगाया कि वहां गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को कथित रूप से प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। विरोध के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।
जानकारी के अनुसार, जड़ौदा गांव में स्थित एक गोदाम में बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने की सूचना मिलने पर बजरंग दल के कार्यकर्ता वहां पहुंचे। संगठन के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वहां कथित रूप से लगभग 200 लोगों को इकट्ठा कर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था और उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में लोगों की भीड़ जमा हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
हंगामे के दौरान वीडियो बना रहे युवक से भी हुई कथित हाथापाई
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटनास्थल पर मौजूद एक युवक मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था। इसी दौरान वहां मौजूद महिलाओं में से एक ने कथित रूप से उस पर हमला किया और उसका मोबाइल फोन छीनने या तोड़ने का प्रयास किया। इस घटना के बाद मौके पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत कराया।
पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मौके से सात पुरुषों और पांच महिलाओं को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। इसके अलावा पुलिस ने घटनास्थल से तीन ईसाई धर्मग्रंथ तथा कुछ पहचान पत्र भी बरामद किए हैं।
पुलिस इन बरामद वस्तुओं और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने लाई जा सके।

14 नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
बजरंग दल के जिला संयोजक रवि चौधरी द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने राशिद, मनीष, संजीव, संगीता, पूजा, मोनू, आशु, चांदनी, सरिता, अमरीश, कार्तिक, कनक, शीशपाल और प्रवीण सहित 14 नामजद व्यक्तियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
चर्च निर्माण और प्रलोभन देने के भी लगाए गए आरोप
शिकायतकर्ता रवि चौधरी ने आरोप लगाया है कि लोगों को 50 से 60 हजार रुपये, गंभीर बीमारियों के इलाज तथा अन्य सुविधाओं का लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि मुख्य आरोपी राशिद गांव के जंगल क्षेत्र में चर्च निर्माण की तैयारी कर रहा था।
हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा।
एसएसपी ने क्या कहा?
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि जड़ौदा गांव में टेंट लगाकर कुछ संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ लोगों को कथित रूप से प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किए जाने के आरोप लगे हैं। इसी आधार पर थाना मंसूरपुर में मुकदमा दर्ज किया गया है।

एसएसपी ने यह भी बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। जांच की निगरानी स्वयं सीओ खतौली और थाना प्रभारी विपिन त्यागी कर रहे हैं।
अब तक 16 लोगों के नाम सामने आए
पुलिस के अनुसार अब तक जांच के दौरान 16 लोगों के नाम सामने आए हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। साथ ही घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी तथ्यों की भी जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
संवेदनशील मामलों में संयम बरतने की अपील
धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील मामलों में पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और पुलिस सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल कर रही है।
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