डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण में योगदान का उल्लेख करते हुए अनुच्छेद-370, पश्चिम बंगाल, भारतीय जनसंघ की स्थापना और राष्ट्रीय अखंडता से जुड़े कई विषयों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री, जनप्रतिनिधि और भाजपा पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
देश के प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, शिक्षाविद् और भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। लखनऊ स्थित सिविल अस्पताल परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके जीवन, राष्ट्र निर्माण में योगदान और राष्ट्रीय अखंडता के प्रति उनके संघर्ष को याद किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत माता के महान सपूत, प्रखर स्वतंत्रता सेनानी और दूरदर्शी शिक्षाविद् थे। उन्होंने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा और देश की एकता एवं अखंडता के लिए किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि तत्कालीन सरकार की नीतियों के विरोध में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रीय एकता के पक्ष में आवाज बुलंद की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद-370 के कारण जम्मू-कश्मीर में बनी विशेष व्यवस्था देश की एकता और अखंडता के लिए चुनौती बन रही थी और डॉ. मुखर्जी ने इसके विरोध में संघर्ष किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अनुच्छेद-370 को समाप्त कर डॉ. मुखर्जी के उस सपने को साकार किया, जिसमें पूरे देश में एक समान संवैधानिक व्यवस्था लागू करने की परिकल्पना थी। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के बाद जम्मू-कश्मीर में भी डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित भारतीय संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ।

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