ग्राम भनौता के खसरा नंबर 386 में कथित अवैध कॉलोनाइजेशन और विला निर्माण को लेकर GNIDA के वर्क सर्किल-2 पर सवाल उठ रहे हैं। नोटिस जारी होने और कार्रवाई में देरी के दावों के बीच जानिए क्या हैं पूरे मामले के पांच बड़े सवाल और प्राधिकरण से क्या है जवाबदेही की मांग। पढ़ें पूरी खबर Bharat News 360 TV पर।
ग्रेटर
नोएडा में अवैध कॉलोनाइजेशन
का खेल आखिर किसकी
नाक के नीचे चल
रहा है? क्या व्यवस्था
को भ्रष्टाचार की दीमक चाट
चुकी है, या फिर
कथित अवैध निर्माण के
पीछे किसी मिलीभगत की
आशंका की जांच होनी
चाहिए?
सवाल
तीखे हैं, लेकिन मामला
उससे भी गंभीर है!
ग्राम
भनौता के खसरा नंबर
386 में कथित तौर पर
लगातार बनते विला और
बढ़ते कॉलोनाइजेशन को लेकर GNIDA के
वर्क सर्किल-2 की कार्यशैली पर
सवाल खड़े हो रहे
हैं।
सूत्रों
के मुताबिक, दो महीने से
ज्यादा का समय बीत
चुका है। नोटिस की
बात भी सामने आ
रही है, फोर्स की
उपलब्धता और कार्रवाई के
आदेश होने का भी
दावा किया जा रहा
है। लेकिन अगर ये सभी
व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो फिर
मौके पर ठोस कार्रवाई
आखिर क्यों नहीं दिखाई दे
रही?
आदेश
भी हैं, फोर्स भी
है, विभाग भी है—फिर
कार्रवाई के रास्ते में
ऐसी कौन-सी दीवार
खड़ी है, जिसे GNIDA तोड़
नहीं पा रहा?
या फिर दीवार निर्माण
स्थल पर नहीं, व्यवस्था
के भीतर कहीं खड़ी
है?
आखिर
कब तक फाइलों में
कार्रवाई की तैयारी होती
रहेगी और जमीन पर
कथित निर्माण आगे बढ़ता रहेगा?
क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारी
सिर्फ मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते
रहेंगे और कॉलोनाइजर एक
के बाद एक विला
खड़े करते रहेंगे?
सवाल
तो इस व्यवस्था पर
बनता है!
क्योंकि
आम आदमी अपनी जिंदगी
भर की कमाई जोड़कर
एक छोटा-सा प्लॉट
खरीदने का सपना देखता
है। कोई अपनी बेटी
की शादी के लिए
बचत करता है, तो
कोई अपने बच्चों के
भविष्य के लिए मकान
बनाना चाहता है। लेकिन यदि
जमीन की वैधता संदिग्ध
हो और खरीददार को
पूरी जानकारी न मिले, तो
उसकी मेहनत की कमाई पर
संकट खड़ा हो सकता
है।
ऐसे
में सवाल है—क्या
आम आदमी की मेहनत
की कमाई की सुरक्षा
की जिम्मेदारी सिर्फ उसी की है?
क्या प्राधिकरण की जिम्मेदारी केवल
नोटिस जारी करने तक
सीमित है?
और अब सबसे बड़ा
सवाल—क्या भनौता के
खसरा नंबर 386 के कॉलोनाइजर इतने
प्रभावशाली हैं कि कार्रवाई
उन तक पहुंच ही
नहीं पा रही, या
फिर संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली में
ऐसी कोई कमी है
जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है?
जब कार्रवाई में देरी के
आरोप हों, कथित निर्माण
लगातार जारी रहने की
जानकारी सामने आए और विभागीय
आदेशों के बावजूद परिणाम
स्पष्ट न हों, तो
इन सवालों का जवाब देना
अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती
है।
GNIDA के
वर्क सर्किल-2 के जिम्मेदार अधिकारियों
से सवाल है—
पहला,
खसरा नंबर 386 पर अब तक
कितने निरीक्षण किए गए?
दूसरा,
यदि नोटिस जारी हुए हैं,
तो उनके बाद क्या
कार्रवाई हुई और उसकी
तारीख क्या है?
तीसरा,
यदि पुलिस फोर्स उपलब्ध है और ध्वस्तीकरण
का आदेश भी है,
तो कार्रवाई कब होगी?
चौथा,
क्या निर्माण की गति रोकने
के लिए कोई प्रभावी
कदम उठाया गया है?
और पांचवां, यदि लापरवाही या
मिलीभगत की पुष्टि होती
है, तो क्या संबंधित
जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी
कार्रवाई होगी?
आखिर
GNIDA में , बहानों की बांसुरी आखिर
कब तक बजती रहेगी?
जनता को तारीखों का
खेल नहीं, जमीन पर परिणाम
चाहिए। फाइलों में दर्ज कार्रवाई
नहीं, मौके पर कानून
का पालन दिखाई देना
चाहिए।
अब निगाहें GNIDA के उच्चाधिकारियों पर
हैं। क्या इस मामले
की जांच होगी? क्या
खसरा नंबर 386 की वास्तविक स्थिति
सार्वजनिक की जाएगी? और
क्या कथित अवैध कॉलोनाइजेशन
पर समयबद्ध कार्रवाई होगी?
Bharat News 360 TV इस
मामले में तथ्यों, दस्तावेजों
और विभागीय जवाब के आधार
पर पड़ताल जारी रखेगा। GNIDA का
पक्ष सामने आने पर उसे
भी प्रमुखता से दिखाया जाएगा।
क्योंकि
सवाल सिर्फ एक खसरे का
नहीं, सवाल है—कानून
का राज चलेगा या
फिर कार्रवाई का इंतजार करते-करते अवैध निर्माण
ही अपनी कहानी पूरी
कर देगा?
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