ग्रेटर नोएडा के पुराने हैबतपुर स्थित डूब क्षेत्र में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने करीब 40 हजार वर्ग मीटर जमीन पर किए गए अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। प्राधिकरण के मुताबिक, कुछ कॉलोनाइजर बाउंड्री बनाकर जमीन पर कब्जा करने और अवैध कॉलोनी बसाने की तैयारी में थे। एनजीटी के आदेश पर हुई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस की मदद ली गई। प्राधिकरण ने लोगों से जमीन खरीदने से पहले भूलेख विभाग से जानकारी लेने की अपील की है।
जमीन के कारोबार में मुनाफे की उम्मीद लेकर निवेश करने वाले लोगों के लिए ग्रेटर नोएडा के पुराने हैबतपुर से आई खबर अहम है। यहां डूब क्षेत्र में करीब 40 हजार वर्ग मीटर जमीन पर कथित तौर पर अवैध कब्जे और कॉलोनी बसाने की तैयारी के खिलाफ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बुलडोजर कार्रवाई की है। प्राधिकरण के अनुसार, शनिवार को की गई इस कार्रवाई में अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर की गई।
प्राधिकरण का कहना है कि अधिसूचित क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माण करना नियमों के खिलाफ है। इसी के तहत जमीन पर बाउंड्री बनाकर कब्जा करने की कोशिश को हटाया गया। कार्रवाई के बाद संबंधित लोगों को चेतावनी दी गई है कि दोबारा अतिक्रमण करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डूब क्षेत्र में कॉलोनी बसाने की तैयारी का आरोप
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के परियोजना विभाग के महाप्रबंधक एके सिंह के मुताबिक, ग्राम पुराना हैबतपुर के डूब क्षेत्र में लगभग 40,000 वर्ग मीटर जमीन पर कॉलोनाइजर कथित तौर पर कॉलोनी बसाने की फिराक में थे। इसके लिए जमीन के चारों ओर बाउंड्री बनाकर कब्जा करने की कोशिश की जा रही थी।
प्राधिकरण की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण को ध्वस्त किया। हालांकि, जमीन पर कथित कब्जे और कॉलोनी बसाने की तैयारी से संबंधित अन्य विवरण, जैसे कि इसमें कितने लोग शामिल थे और कितने प्लॉट प्रस्तावित थे, उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं किए गए हैं।

डूब क्षेत्र में निर्माण को लेकर यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे इलाकों में जमीन की स्थिति, बाढ़ के जोखिम और लागू नियमों की जानकारी के बिना खरीद-फरोख्त करना लोगों के लिए भविष्य में परेशानी खड़ी कर सकता है। किसी भी जमीन को खरीदने से पहले उसके स्वामित्व, भू-उपयोग और प्राधिकरण की अनुमति की पुष्टि करना जरूरी है।
एनजीटी के आदेश पर हुई कार्रवाई
प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि पुराने हैबतपुर में यह कार्रवाई एनजीटी के आदेश के तहत की गई। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने परियोजना विभाग को निर्देश दिए हैं कि जमीन पर अवैध निर्माण करने और कब्जा करने वालों के खिलाफ अभियान जारी रखा जाए।
अतिक्रमण हटाओ अभियान का नेतृत्व कर रहे प्राधिकरण के एसीईओ सुमित यादव ने कहा कि अधिसूचित क्षेत्र में कहीं भी बिना अनुमति निर्माण करना गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
प्राधिकरण का कहना है कि जमीन पर अवैध निर्माण और कब्जे की कोशिशों को रोकने के लिए संबंधित विभागों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई के जरिए ऐसे निर्माणों पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है, जो निर्धारित नियमों और अनुमति के बिना किए जा रहे हैं।
पुलिस के सहयोग से ध्वस्त किया गया निर्माण
कार्रवाई को अंजाम देने के लिए प्राधिकरण के परियोजना विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वर्क सर्किल-1 के वरिष्ठ प्रबंधक प्रभात शंकर के नेतृत्व में प्रबंधक प्रशांत समाधिया और अन्य कर्मचारियों की टीम ने पुलिस के सहयोग से अवैध निर्माण को ध्वस्त किया।

प्राधिकरण के अनुसार, कार्रवाई के दौरान जमीन पर किए गए निर्माण को हटाया गया और दोबारा अतिक्रमण करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस मामले में किसी व्यक्ति के खिलाफ अलग से प्राथमिकी दर्ज की गई है या नहीं।
जमीन खरीदने से पहले सावधानी बरतें, प्राधिकरण की अपील
इस कार्रवाई के साथ प्राधिकरण ने आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। एसीईओ सुमित यादव ने अपील की कि लोग कॉलोनाइजरों के झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई न फंसाएं। ग्रेटर नोएडा में किसी भी जगह जमीन खरीदने से पहले प्राधिकरण के भूलेख विभाग से संपर्क कर उसकी पूरी जानकारी प्राप्त करें।
जमीन खरीदते समय केवल बाउंड्री, सड़क या प्लॉट दिखाए जाने के आधार पर निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है। खरीदारों को यह जांचना चाहिए कि जमीन किस श्रेणी में आती है, उसका भू-उपयोग क्या है और वहां निर्माण की अनुमति है या नहीं। डूब क्षेत्र या अधिसूचित जमीन के मामले में संबंधित दस्तावेजों की जांच और भी जरूरी हो जाती है।
पुराने हैबतपुर में हुई कार्रवाई ने एक बार फिर अवैध निर्माण और जमीन के अनधिकृत कारोबार को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित क्षेत्र में दोबारा कब्जा रोकने के लिए निगरानी कितनी प्रभावी रहती है और प्राधिकरण का अभियान आगे किन इलाकों तक पहुंचता है। फिलहाल प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
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