ग्रेटर नोएडा में स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर प्राधिकरण ने फीडबैक फाउंडेशन के साथ मिलकर राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान के पास जागरूकता अभियान चलाया। कबाड़ी और कचरा बीनने वाले श्रमिकों को कचरा न जलाने, व्यक्तिगत स्वच्छता रखने और उचित कचरा प्रबंधन के लिए जागरूक किया गया।
शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी सिर्फ सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई तक सीमित नहीं है। कचरे का सही तरीके से प्रबंधन और उसे खुले में जलाने से रोकना भी स्वच्छ और स्वस्थ शहर के लिए उतना ही जरूरी है। इसी दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने मंगलवार को एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया। अभियान के दौरान कबाड़ी और कचरा बीनने वाले श्रमिकों को स्वच्छता के साथ-साथ कचरा जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
यह जागरूकता अभियान ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अपनी सहयोगी संस्था फीडबैक फाउंडेशन के साथ मिलकर राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ग्रेटर नोएडा के पास आयोजित किया। अभियान का उद्देश्य उन लोगों तक सीधे पहुंचना रहा, जो रोजाना कचरे के संपर्क में रहते हैं और शहर के कचरा प्रबंधन की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
कचरा जलाने से सिर्फ धुआं नहीं, बढ़ता है प्रदूषण
जागरूकता सत्र के दौरान श्रमिकों को समझाया गया कि प्लास्टिक और अन्य प्रकार के कचरे को खुले में जलाने से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रभावित करता है। कचरे के जलने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ सकता है।
अभियान में विशेष तौर पर प्लास्टिक न जलाने की अपील की गई। श्रमिकों को बताया गया कि कचरे को आग के हवाले करने के बजाय उसका उचित तरीके से प्रबंधन और निस्तारण किया जाना चाहिए। प्राधिकरण की ओर से यह भी समझाया गया कि कचरा जलाने की आदत पर रोक लगाने से आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिल सकती है।

व्यक्तिगत स्वच्छता पर भी दिया गया जोर
अभियान केवल कचरा न जलाने तक सीमित नहीं रहा। जागरूकता सत्र में व्यक्तिगत स्वच्छता को भी प्रमुखता दी गई। कबाड़ी और कचरा बीनने वाले श्रमिकों को नियमित साफ-सफाई रखने तथा अपने आसपास कचरा एकत्र नहीं होने देने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि स्वच्छता की शुरुआत व्यक्तिगत स्तर से होती है। यदि श्रमिक अपने कार्यस्थल और उसके आसपास सफाई बनाए रखते हैं तो इसका सकारात्मक असर पूरे क्षेत्र पर दिखाई दे सकता है।
कार्यस्थल के आसपास सफाई रखने की अपील
कबाड़ी और कचरा बीनने वाले श्रमिक शहर में अलग-अलग स्थानों पर कचरे के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में उनके कार्यस्थल की स्वच्छता भी महत्वपूर्ण है। जागरूकता अभियान के दौरान उन्हें अपने कार्यस्थल और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया।
उन्हें बताया गया कि कचरे को इधर-उधर फैलाने के बजाय उसे निर्धारित और उचित तरीके से अलग-अलग कर प्रबंधन प्रक्रिया में शामिल किया जाए। इससे न केवल आसपास का क्षेत्र साफ रहेगा, बल्कि अनावश्यक रूप से कचरा जलाने की जरूरत भी कम होगी।
स्वच्छ ग्रेटर नोएडा के लिए जनसहभागिता पर जोर
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से लगातार इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि शहर को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए सिर्फ सरकारी स्तर पर किए जाने वाले प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसमें आम नागरिकों और विभिन्न वर्गों की भागीदारी भी जरूरी है।
इसी सोच के तहत इस अभियान में ऐसे श्रमिकों को सीधे जागरूक किया गया, जो रोजाना कचरे के बीच काम करते हैं। प्राधिकरण की ओर से प्रतिभागियों से स्वच्छता बनाए रखने और कचरा जलाने से बचने की अपील की गई।

अभियान के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि कचरे का उचित प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। खासकर प्लास्टिक और अन्य कचरे को खुले में जलाने से बचना जरूरी है, ताकि वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सके।
अभियान में ये अधिकारी और प्रतिनिधि रहे मौजूद
कार्यक्रम में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक राम कुमार, प्रबंधक कनुप्रिया, सुपरवाइजर राजेश तथा फीडबैक फाउंडेशन के परियोजना प्रबंधक संजय शुक्ला सहित अन्य संबंधित प्रतिनिधि मौजूद रहे।
अधिकारियों और संस्था के प्रतिनिधियों ने जागरूकता सत्र के दौरान प्रतिभागियों से संवाद किया और स्वच्छता से जुड़े जरूरी पहलुओं की जानकारी दी। साथ ही कचरा जलाने से बचने और उचित कचरा प्रबंधन अपनाने का संदेश दिया गया।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का यह प्रयास इस बात की ओर भी संकेत करता है कि शहर में स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण के लिए जागरूकता को जमीनी स्तर तक ले जाने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए उन लोगों को भी अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिनकी रोजमर्रा की गतिविधियां सीधे कचरे के प्रबंधन से जुड़ी हैं।
आने वाले समय में इस तरह की जागरूकता गतिविधियां कितनी प्रभावी साबित होती हैं, यह स्थानीय स्तर पर इनके निरंतर संचालन और लोगों की भागीदारी पर निर्भर करेगा। फिलहाल अभियान के जरिए साफ संदेश दिया गया है—कचरा जलाने से बचें, स्वच्छता अपनाएं और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपनी भूमिका निभाएं।
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