लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अनंत नगर योजना में सड़क निर्माण की जद में आ रहे करीब 90 वर्ष पुराने पीपल और रबर के पेड़ों को काटने के बजाय उर्मिला वन में प्रत्यारोपित किया। भारी-भरकम पेड़ों को 50 टन और 25 टन क्षमता वाली क्रेनों, जेसीबी और ट्रेलर की मदद से करीब 28 किलोमीटर दूर ले जाया गया। बारिश के बीच करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद पेड़ों को उर्मिला वन में शिफ्ट किया गया।
लखनऊ में अनंत नगर योजना के तहत नई सड़कों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। योजना में 45 मीटर, 24 मीटर और 12 मीटर चौड़ी सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है। इन सड़कों के एलाइनमेंट में कई पेड़ आ रहे थे।
ऐसे में इन पेड़ों को काटने के बजाय लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी एलडीए ने उन्हें दूसरी जगह प्रत्यारोपित करने का फैसला लिया। इसी अभियान के तहत अनंत नगर योजना में मौजूद करीब 90 वर्ष पुराने पीपल और रबर के विशाल पेड़ों को उर्मिला वन में शिफ्ट किया गया।
यह काम शुक्रवार को भारी बारिश के बीच किया गया।

विशाल पेड़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना आसान नहीं था, लेकिन एलडीए के उद्यान विभाग की टीम ने कई दिनों की तैयारी के बाद इस चुनौतीपूर्ण काम को अंजाम दिया।
28 किलोमीटर का सफर, रास्ते में भी थी बड़ी चुनौती
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि अनंत नगर योजना में सड़क निर्माण के एलाइनमेंट में आने वाले पेड़ों को काटने के बजाय पार्कों और ग्रीन बेल्ट में प्रत्यारोपित किया जा रहा है।
इसी क्रम में करीब 90 वर्ष पुराने पीपल और रबर के पेड़ों को अनंत नगर से उर्मिला वन लाया गया। दोनों स्थानों के बीच की दूरी लगभग 28 किलोमीटर है।
इतने पुराने और भारी-भरकम पेड़ों को उनकी जड़ों सहित निकालना, सुरक्षित तरीके से उठाना और फिर दूसरी जगह पहुंचाना अपने आप में चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद एलडीए के उद्यान विभाग की टीम ने पूरी मेहनत और सावधानी के साथ इस काम को पूरा किया।

पेड़ों को अचानक उठाकर दूसरी जगह नहीं ले जाया गया। इसके लिए करीब एक महीने पहले से तैयारी शुरू कर दी गई थी।
सहायक उद्यान अधिकारी कर्ण सिंह के मुताबिक, विशेषज्ञों की देखरेख में पेड़ों का रूट ट्रीटमेंट किया गया। इस प्रक्रिया के जरिए पेड़ों की जड़ों को प्रत्यारोपण के लिए तैयार किया गया, ताकि उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के बाद दोबारा जमीन में स्थापित किया जा सके।
एक महीने तक चली तैयारी के बाद शुक्रवार को पेड़ों को शिफ्ट करने का वास्तविक ऑपरेशन शुरू किया गया।
50 और 25 टन की क्रेनों से उठाए गए पेड़
पेड़ों के आकार और वजन को देखते हुए सामान्य मशीनों से उन्हें उठाना संभव नहीं था। इसके लिए भारी क्षमता वाली क्रेनों का इस्तेमाल किया गया।
एलडीए के मुताबिक, इस पूरे ऑपरेशन में 50 टन क्षमता वाली एक क्रेन और 25-25 टन क्षमता वाली दो क्रेनों, यानी कुल तीन क्रेनों की मदद ली गई। इसके अलावा दो जेसीबी और ट्रेलर भी लगाए गए।
मशीनों और विशेषज्ञों की टीम की मदद से पेड़ों को सावधानीपूर्वक उठाया गया और फिर ग्रीन कॉरिडोर के रास्ते अनंत नगर से उर्मिला वन तक पहुंचाया गया।

शुक्रवार को जब पेड़ों को प्रत्यारोपित करने का काम किया जा रहा था, उस समय लखनऊ में भारी बारिश हो रही थी। खराब मौसम के बावजूद टीम ने काम जारी रखा।
विशाल पेड़ों को उठाने, उन्हें सुरक्षित तरीके से ट्रेलर तक पहुंचाने, निर्धारित स्थान पर ले जाने और फिर उर्मिला वन में दोबारा स्थापित करने की पूरी प्रक्रिया में करीब चार घंटे का समय लगा।
कड़ी मशक्कत के बाद दोनों पेड़ों को उर्मिला वन में प्रत्यारोपित कर दिया गया।
पेड़ों को बचाने की कोशिश, विकास के साथ हरियाली पर जोर
एलडीए का कहना है कि अनंत नगर योजना में सड़क निर्माण के कारण एलाइनमेंट में आने वाले पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें पार्कों और ग्रीन बेल्ट में प्रत्यारोपित करने का प्रयास किया जा रहा है।
करीब 90 वर्ष पुराने पीपल और रबर के पेड़ों को बचाकर दूसरी जगह स्थापित करना इसी प्रयास का हिस्सा है। हालांकि इन पेड़ों के प्रत्यारोपण के बाद उनके नए स्थान पर पूरी तरह विकसित होकर सुरक्षित रहने की सफलता आने वाले समय में स्पष्ट होगी।
फिलहाल एलडीए की टीम ने एक कठिन ऑपरेशन को पूरा करते हुए इन पुराने पेड़ों को नया ठिकाना दे दिया है। अनंत नगर में सड़क निर्माण का रास्ता भी साफ हुआ और इन विशाल पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें उर्मिला वन में संरक्षित करने की कोशिश की गई।
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