प्रयागराज स्थित प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में 81,882 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। 236 मेधावी विद्यार्थियों को 242 पदकों से सम्मानित किया गया। समारोह में विकसित भारत, राष्ट्र निर्माण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया।
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए गुरुवार का दिन ऐतिहासिक रहा। प्रयागराज स्थित प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह में हजारों विद्यार्थियों के वर्षों के परिश्रम को सम्मान मिला। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में 81,882 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 236 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 242 पदकों से सम्मानित किया गया।
दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह युवाओं को राष्ट्र निर्माण, संस्कार, कौशल और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने का भी मंच बना। राज्यपाल, उच्च शिक्षा मंत्री और राज्य मंत्री ने विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संदेश दिया।

81 हजार से अधिक विद्यार्थियों को मिली उपाधि
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इस वर्ष कुल 81,882 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 42,960 छात्राएं और 38,922 छात्र शामिल रहे। यह आंकड़ा न केवल विश्वविद्यालय के विस्तार को दर्शाता है, बल्कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के प्रति बढ़ते रुझान की भी तस्वीर पेश करता है।
विशेष बात यह रही कि सभी उपाधियां डिजीलॉकर पर भी उपलब्ध कराई गईं, जिससे विद्यार्थियों को अपने प्रमाणपत्र सुरक्षित और डिजिटल रूप में प्राप्त हो सकें।
236 मेधावियों को 242 पदक
समारोह का सबसे भावुक और गौरवपूर्ण क्षण वह रहा, जब विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मंच पर सम्मानित किया गया।
इस वर्ष 236 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 242 पदक प्रदान किए गए। इनमें 158 छात्राएं और 78 छात्र शामिल हैं। छात्राओं की बड़ी संख्या यह दर्शाती है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेटियां लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का प्रेरक संदेश
समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को जीवन में निरंतर सीखते रहने और समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि डिग्री केवल रोजगार का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी अवसर है।
उन्होंने विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और कौशल विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
'राष्ट्र सर्वोपरि' के संकल्प के साथ आगे बढ़ें युवा
उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने अपने संबोधन में प्रयागराज की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही पावन भूमि है जहां गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम है तथा महाकुंभ जैसे विश्व प्रसिद्ध आयोजन होते हैं।
उन्होंने विश्वविद्यालय के नाम से जुड़े प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि था और उन्होंने राष्ट्र सेवा के लिए व्यक्तिगत सुखों का त्याग किया।
मंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी सफलता के पीछे माता-पिता, गुरुजनों और परिवार का महत्वपूर्ण योगदान है। अब समय है कि वे अपने ज्ञान और क्षमता का उपयोग राष्ट्र के विकास में करें।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने में देश के युवाओं की सबसे बड़ी भूमिका होगी।

प्रदेश के विश्वविद्यालयों की बढ़ी पहचान
योगेन्द्र उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन और सतत प्रयासों के कारण प्रदेश के विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
आज उत्तर प्रदेश के कई विश्वविद्यालय देश की प्रतिष्ठित रैंकिंग और ग्रेडिंग में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, जो राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।
ज्ञान के साथ संस्कार भी जरूरी : रजनी तिवारी
उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, लेकिन असली परीक्षा इसके बाद शुरू होती है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी केवल डिग्री लेकर विश्वविद्यालय से बाहर न जाएं, बल्कि संस्कार, ज्ञान, अध्यात्म और कौशल को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
उन्होंने कहा कि जीवन में चुनौतियां आएंगी, लेकिन जो विद्यार्थी धैर्य, मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते हैं, वे निश्चित रूप से सफलता प्राप्त करते हैं।
रजनी तिवारी ने यह भी कहा कि प्रयागराज केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कृति, साहित्य, आध्यात्मिक चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणादायी भूमि भी है। यहां से निकले अनेक शिक्षाविद, वैज्ञानिक, साहित्यकार और न्यायविद देश के गौरव बने हैं।

डिजिटल और आधुनिक शिक्षा की ओर कदम
इस बार सभी डिग्रियों को डिजीलॉकर पर उपलब्ध कराने की पहल को डिजिटल शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को अपने प्रमाणपत्र सुरक्षित रखने, ऑनलाइन सत्यापन कराने और रोजगार के अवसरों में आसानी होगी।
युवाओं पर टिका विकसित भारत का सपना
समारोह के अंत में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने का सपना तभी साकार होगा, जब देश का युवा शिक्षित होने के साथ-साथ जिम्मेदार, नैतिक और नवाचार की सोच रखने वाला नागरिक बने।
रज्जू भैया विश्वविद्यालय का यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का आयोजन नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी सौंपने का एक प्रेरणादायी अवसर भी साबित हुआ।
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