ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) में बेसिक कार्डियक लाइफ सपोर्ट (BCLS) सर्टिफिकेशन कोर्स का सफल आयोजन किया गया। भारतीय पुनर्जीवन परिषद महासंघ (Indian Resuscitation Council Federation) के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में 30 से अधिक डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को कार्डियक और श्वसन आपातकालीन स्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी जीवन रक्षक उपचार देने के लिए प्रशिक्षित करना था।
आपातकालीन चिकित्सा में अक्सर कुछ मिनटों का सही निर्णय किसी व्यक्ति की जान बचा सकता है। इसी सोच को मजबूत करते हुए गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS), ग्रेटर नोएडा ने बेसिक कार्डियक लाइफ सपोर्ट (Basic Cardiac Life Support - BCLS) सर्टिफिकेशन कोर्स का सफल आयोजन और समापन किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मियों को कार्डियक अरेस्ट, श्वसन संबंधी आपातकालीन स्थितियों और अन्य जीवन-रक्षक परिस्थितियों में वैज्ञानिक एवं मानक प्रक्रियाओं के अनुरूप त्वरित उपचार देने के लिए प्रशिक्षित करना था।
इस कार्यक्रम के सफल समापन के साथ जीआईएमएस ने एक बार फिर चिकित्सा शिक्षा, रोगी सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश गुप्ता ने किया कार्यक्रम का शुभारंभ
BCLS सर्टिफिकेशन कोर्स का उद्घाटन जीआईएमएस के निदेशक डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश गुप्ता ने किया।
उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए व्यावहारिक कौशल भी उतने ही आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्डियक इमरजेंसी में समय पर और प्रशिक्षित हस्तक्षेप मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
डॉ. राकेश गुप्ता ने अस्पतालों में नियमित कौशल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से स्वास्थ्य संस्थानों की आपातकालीन तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
30 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण
इस BCLS सर्टिफिकेशन कार्यक्रम में 30 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें डॉक्टर, नर्सें और पैरामेडिकल स्टाफ शामिल थे।
कार्यक्रम का संचालन जीआईएमएस के एनेस्थीसिया विभाग द्वारा डॉ. नाजिया नज़ीर के मार्गदर्शन में किया गया।

प्रशिक्षण टीम में डॉ. विनय कुमार, डॉ. देबायन बिस्वास, डॉ. रुचि सिंह, डॉ. गरिमा सिन्हा तथा विभाग के पीजी रेजिडेंट्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक तथ्यों और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रियाओं का विस्तृत प्रशिक्षण दिया।
क्या है BCLS और क्यों है जरूरी?
बेसिक कार्डियक लाइफ सपोर्ट (BCLS) ऐसी जीवन रक्षक तकनीकों का समूह है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति को अचानक कार्डियक अरेस्ट, सांस रुकने या गंभीर श्वसन समस्या का सामना करना पड़ता है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को यह सिखाया गया कि ऐसी स्थिति में मरीज तक सबसे पहले कैसे पहुंचना है, उसकी स्थिति का आकलन कैसे करना है और सही क्रम में जीवन रक्षक प्रक्रियाओं को कैसे लागू करना है।
विशेषज्ञों ने यह भी समझाया कि शुरुआती कुछ मिनटों में सही तकनीक अपनाने से मरीज के जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ सकती है।
BCLS और COLS के बीच अंतर भी समझाया गया
कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि प्रतिभागियों को BCLS (Basic Cardiac Life Support) और COLS (Compression Only Life Support) के बीच का अंतर भी विस्तार से समझाया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि किन परिस्थितियों में केवल छाती पर दबाव (Compression) देना पर्याप्त होता है और किन स्थितियों में पूर्ण कार्डियक लाइफ सपोर्ट की आवश्यकता होती है।
इसके साथ ही पुनर्जीवन (Resuscitation) की सही क्रमबद्ध प्रक्रिया पर भी विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
AED और चोकिंग मैनेजमेंट का व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यक्रम में केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रहकर प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
इस दौरान ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) के उपयोग का लाइव डेमो कराया गया।
प्रतिभागियों ने यह सीखा कि कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में AED का सही और सुरक्षित उपयोग कैसे किया जाता है।
इसके अलावा दम घुटने (Choking) की स्थिति में मरीज को तत्काल राहत देने की तकनीकों का भी अभ्यास कराया गया।
व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया।

इंडियन रिससिटेशन काउंसिल फेडरेशन के सहयोग से हुआ आयोजन
यह सर्टिफिकेशन कार्यक्रम इंडियन रिससिटेशन काउंसिल फेडरेशन (Indian Resuscitation Council Federation) के सहयोग से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को प्रमाणित प्रशिक्षण प्रदान करना था, ताकि वे अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के दौरान आत्मविश्वास और दक्षता के साथ कार्य कर सकें।
रोगी सुरक्षा और चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया बल
जीआईएमएस प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के कौशल-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम अस्पतालों में रोगी सुरक्षा (Patient Safety) को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी न केवल अस्पताल परिसर में बल्कि समुदाय स्तर पर भी आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी सहायता प्रदान कर सकते हैं।
VIDYA SETU टीम के माध्यम से उत्कृष्ट चिकित्सा शिक्षा की दिशा में पहल
जीआईएमएस ने बताया कि यह कार्यक्रम GIMS VIDYA SETU Team के अंतर्गत चिकित्सा शिक्षा, क्लीनिकल उत्कृष्टता, रोगी सुरक्षा और सामुदायिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
संस्थान का उद्देश्य भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का नियमित आयोजन कर स्वास्थ्यकर्मियों की व्यावहारिक दक्षता को और मजबूत बनाना है।
जीआईएमएस के अनुसार, चिकित्सा विज्ञान लगातार विकसित हो रहा है और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर कौशल उन्नयन (Skill Upgradation) आवश्यक है। इसी दिशा में BCLS सर्टिफिकेशन कोर्स स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ है।
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