गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS), ग्रेटर नोएडा ने राष्ट्रीय CPR दिवस के अवसर पर IAP CPR संजीवनी मास अवेयरनेस अभियान का आयोजन किया। अभियान के तहत स्कूल शिक्षकों, मेडिकल छात्रों और पैरामेडिकल स्टाफ को कार्डियक अरेस्ट की पहचान, आपातकालीन प्रतिक्रिया और CPR तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। GIMS के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने कहा कि समय पर दिया गया CPR किसी व्यक्ति की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।
अचानक किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद हो जाए तो हर सेकंड बेहद कीमती होता है। ऐसे समय में यदि आसपास मौजूद लोगों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) की सही जानकारी हो, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। इसी उद्देश्य को लेकर गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS), ग्रेटर नोएडा ने राष्ट्रीय CPR दिवस के अवसर पर IAP CPR संजीवनी मास अवेयरनेस अभियान का सफल आयोजन किया।
यह अभियान 21 जुलाई 2026 को GIMS के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों, शिक्षकों, मेडिकल छात्रों और स्वास्थ्यकर्मियों को CPR जैसी जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण देकर समाज को मेडिकल आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार करना था।
बाल रोग एवं एनेस्थीसिया विभाग ने मिलकर चलाया अभियान
इस विशेष अभियान का आयोजन GIMS के बाल रोग (Pediatrics) विभाग और एनेस्थीसिया विभाग के संयुक्त सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम देशभर में मनाए जा रहे "राष्ट्रीय CPR दिवस" के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक CPR की जानकारी पहुंचाना और अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट जैसी आपात स्थितियों में लोगों को प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षित करना है।
100 स्कूल शिक्षकों को दिया गया व्यावहारिक CPR प्रशिक्षण
अभियान के तहत गौतमबुद्ध नगर जनपद के तलिप्ता, दनकौर और साकीपुर स्थित माध्यमिक विद्यालयों के 100 स्कूल शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बताया गया कि—
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कार्डियक अरेस्ट की पहचान कैसे करें।
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आपातकालीन चिकित्सा सहायता (Emergency Response System) को तुरंत कैसे सक्रिय करें।
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एम्बुलेंस पहुंचने तक सही तरीके से CPR कैसे दें।
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सही गति और गहराई के साथ प्रभावी चेस्ट कंप्रेशन कैसे किया जाए।
कार्यक्रम में केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि प्रतिभागियों को व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया ताकि किसी वास्तविक आपात स्थिति में वे बिना घबराए सही निर्णय ले सकें।
MBBS छात्रों और पैरामेडिकल स्टाफ को भी मिला प्रशिक्षण
IAP CPR संजीवनी अभियान केवल स्कूल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहा।
GIMS परिसर में आयोजित विशेष प्रशिक्षण सत्रों में—
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100 MBBS छात्रों
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50 पैरामेडिकल कर्मचारियों
को भी Basic Life Support (BLS) और आधुनिक CPR तकनीकों का विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य भविष्य के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए और अधिक सक्षम बनाना था।
मैनिक्विन पर कराया गया लाइव प्रैक्टिकल प्रशिक्षण
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग मॉडल रहा।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मैनिक्विन (Dummy Models) पर CPR का अभ्यास कराया गया।
इस दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों ने हर प्रतिभागी की तकनीक पर व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन दिया ताकि वे सही तरीके से चेस्ट कंप्रेशन, सांस देने की प्रक्रिया तथा बेसिक लाइफ सपोर्ट की पूरी तकनीक सीख सकें।
विशेषज्ञ डॉक्टरों ने किया प्रशिक्षण का नेतृत्व
इस प्रशिक्षण अभियान का संचालन GIMS के अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों ने किया।
बाल रोग विभाग से—
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डॉ. रुचिका भटनागर
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डॉ. संजू यादव
जबकि एनेस्थीसिया विभाग से—
ने प्रतिभागियों को CPR और BLS की व्यावहारिक जानकारी दी।
इन विशेषज्ञों ने आधुनिक प्रशिक्षण उपकरणों की सहायता से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों जैसी ट्रेनिंग प्रदान की।
रेजिडेंट डॉक्टर, इंटर्न और नर्सिंग छात्रों ने निभाई अहम भूमिका
इस पूरे अभियान को सफल बनाने में केवल वरिष्ठ चिकित्सकों की ही नहीं, बल्कि—
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पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट्स
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मेडिकल इंटर्न्स
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नर्सिंग छात्रों
की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इन सभी ने प्रशिक्षण सत्रों के संचालन, डेमोंस्ट्रेशन और प्रतिभागियों के कौशल मूल्यांकन में सक्रिय योगदान दिया।

डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने बताया CPR क्यों है जरूरी
कार्यक्रम के दौरान GIMS के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने आयोजन टीम की सराहना करते हुए कहा कि—
अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट के मामलों में यदि आसपास मौजूद व्यक्ति समय रहते CPR देना शुरू कर दे, तो मरीज के जीवित बचने की संभावना दोगुनी से लेकर तीन गुना तक बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि समाज में अधिक से अधिक लोगों को CPR की जानकारी देना समय की आवश्यकता है।
उनके अनुसार केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि—
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शिक्षक,
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विद्यार्थी,
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स्वास्थ्यकर्मी,
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और आम नागरिक
भी यदि यह कौशल सीख लें तो अनेक लोगों की जान बचाई जा सकती है।
समाज को CPR के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में बड़ा कदम
GIMS का यह अभियान केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज में CPR जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
अस्पताल प्रशासन का मानना है कि यदि स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक संस्थानों और कार्यस्थलों पर अधिक से अधिक लोगों को CPR का प्रशिक्षण दिया जाए तो अचानक होने वाली हृदय संबंधी आपात स्थितियों में मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आपात स्थिति में हर नागरिक बन सकता है जीवनरक्षक
विशेषज्ञों का कहना है कि कार्डियक अरेस्ट के शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। कई बार एम्बुलेंस के पहुंचने में समय लग जाता है। ऐसे में यदि मौके पर मौजूद व्यक्ति CPR देना जानता हो तो वह मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
इसी सोच के साथ GIMS द्वारा चलाया गया IAP CPR संजीवनी मास अवेयरनेस अभियान चिकित्सा शिक्षा, सामुदायिक स्वास्थ्य और जनजागरूकता का एक सराहनीय उदाहरण बनकर सामने आया है।
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