प्राइड मंथ के अवसर पर शारदा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री ने ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए विशेष ओरल हेल्थ कैंप आयोजित किया। कैंप में दांतों और मसूड़ों की जांच, व्यक्तिगत स्वास्थ्य परामर्श और ओरल हाइजीन के प्रति जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया। डीन डॉ. हेमंत साहनी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में समानता और संवेदनशीलता ही समावेशी समाज की पहचान है।
स्वास्थ्य केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि सम्मान, समानता और बेहतर जीवन का आधार भी है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए शारदा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री ने प्राइड मंथ के अवसर पर ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों के लिए एक विशेष ओरल हेल्थ कैंप का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य समाज के उस वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण दंत स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना था, जो अक्सर नियमित स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता कार्यक्रमों से दूर रह जाता है।
कैंप के दौरान प्रतिभागियों की मुफ्त दंत जांच की गई, दांतों और मसूड़ों से जुड़ी समस्याओं की पहचान की गई तथा उन्हें उनकी व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार स्वास्थ्य परामर्श भी उपलब्ध कराया गया। इसके साथ ही ओरल हाइजीन, सही ब्रशिंग तकनीक और नियमित दंत परीक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
समावेशी स्वास्थ्य सेवा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
प्राइड मंथ के दौरान आयोजित यह विशेष कैंप केवल एक चिकित्सा शिविर नहीं था, बल्कि समाज में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति समानता और संवेदनशीलता का संदेश देने का भी प्रयास था।
डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री की इस पहल का उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय को यह भरोसा दिलाना था कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रत्येक नागरिक का अधिकार हैं और समाज के प्रत्येक वर्ग तक इन्हें समान रूप से पहुंचाना चिकित्सा संस्थानों की जिम्मेदारी है।

दांतों और मसूड़ों की गहन जांच
कैंप में पहुंचे सभी प्रतिभागियों की विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा विस्तृत मौखिक स्वास्थ्य जांच की गई। जांच के दौरान दांतों में सड़न, मसूड़ों की सूजन, संक्रमण, ओरल इंफेक्शन तथा अन्य दंत समस्याओं की पहचान की गई।
डॉक्टरों ने प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत परामर्श दिया और आवश्यकता पड़ने पर आगे के उपचार के लिए भी उचित मार्गदर्शन प्रदान किया।
विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर दंत जांच कराने से कई गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है और स्वस्थ दांत बेहतर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ आत्मविश्वास को भी मजबूत बनाते हैं।
ओरल हाइजीन पर दिया विशेष प्रशिक्षण
कैंप के दौरान प्रतिभागियों को केवल जांच तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें दांतों की सही देखभाल के व्यावहारिक तरीके भी बताए गए।
विशेषज्ञों ने सही ब्रशिंग तकनीक, दिन में दो बार ब्रश करने की आदत, नियमित फ्लॉसिंग, संतुलित आहार और हर छह महीने में दंत चिकित्सक से जांच कराने के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
डॉक्टरों ने यह भी बताया कि कई बार छोटी-सी लापरवाही आगे चलकर गंभीर दंत रोगों का कारण बन जाती है, इसलिए नियमित देखभाल बेहद आवश्यक है।

'मौखिक स्वास्थ्य आत्मविश्वास और गरिमा से भी जुड़ा है'
स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज के डीन डॉ. हेमंत साहनी ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय समाज का अभिन्न हिस्सा है और उन्हें सम्मानजनक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा—
"मौखिक स्वास्थ्य केवल दांतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के आत्मविश्वास, गरिमा और बेहतर जीवन से भी जुड़ा होता है। हमारा उद्देश्य केवल उपचार प्रदान करना नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना और यह संदेश देना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में समानता और संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण हैं। हमें विश्वास है कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ समावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत करेंगे।"
डॉ. स्वाति शर्मा की निगरानी में हुआ आयोजन
यह विशेष स्वास्थ्य शिविर डॉ. स्वाति शर्मा के मार्गदर्शन और निगरानी में आयोजित किया गया।
कैंप के सफल संचालन में डॉ. फैसल अहमद, डॉ. आइना, डॉ. अक्षत, डॉ. अमरेश, डॉ. रिया, डॉ. सादिक तथा डॉ. अनन्या गुप्ता सहित विभाग के अन्य चिकित्सकों और टीम के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
सभी विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को व्यक्तिगत रूप से समय देकर उनकी समस्याओं को समझा और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह उपलब्ध कराई।

स्वास्थ्य सेवाओं में समानता का संदेश
शारदा यूनिवर्सिटी की इस पहल को स्वास्थ्य क्षेत्र में सामाजिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रांसजेंडर समुदाय अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में कई सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करता है। ऐसे में इस प्रकार के विशेष स्वास्थ्य शिविर न केवल चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, बल्कि समाज में समानता, सम्मान और विश्वास का वातावरण भी तैयार करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक सम्मानजनक और सुलभ चिकित्सा सुविधा पहुंचाना भी है।
समाज में जागरूकता बढ़ाने की पहल
कैंप के समापन पर आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी विभिन्न समुदायों के लिए इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम और स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि प्रत्येक व्यक्ति बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सके।
शारदा यूनिवर्सिटी की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि जब शिक्षा संस्थान सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ते हैं, तो वे केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव भी रखते हैं।
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