ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय में आयोजित IEEE इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ICCISD 2026 का सफल समापन हुआ। 10 देशों से 1,828 शोध-पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से केवल 150 का चयन हुआ। सम्मेलन में AI, IoT, रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी और सतत तकनीकों पर वैश्विक स्तर की चर्चा हुई।
तकनीकी शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज करते हुए शारदा विश्वविद्यालय ने IEEE उत्तर प्रदेश सेक्शन के तकनीकी सहयोग से आयोजित दो दिवसीय IEEE इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस सिस्टम्स एंड डिवाइसेज़ (ICCISD 2026) का सफलतापूर्वक समापन कर दिया। 23 और 24 जुलाई 2026 को आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के कई देशों के शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान किया, जहां भविष्य की बुद्धिमान तकनीकों और सतत डिजिटल प्रणालियों पर गंभीर मंथन हुआ।
सम्मेलन का आयोजन शारदा स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग साइंस एंड इंजीनियरिंग (SSCSE) के अंतर्गत कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशंस विभाग द्वारा किया गया। दो दिनों तक चले इस आयोजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी और हरित तकनीकों जैसे अत्याधुनिक विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
10 देशों से मिले 1,828 शोध-पत्र, सिर्फ 150 का हुआ चयन
ICCISD 2026 की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक इसकी वैश्विक भागीदारी रही। सम्मेलन के लिए भारत सहित 10 देशों से कुल 1,828 शोध-पत्र प्राप्त हुए। सभी शोध-पत्रों की विशेषज्ञों द्वारा बहु-स्तरीय और कठोर समीक्षा की गई।
इस प्रक्रिया के बाद केवल 150 उत्कृष्ट शोध-पत्रों का चयन प्रस्तुतीकरण और प्रकाशन के लिए किया गया। यानी सम्मेलन की स्वीकृति दर मात्र 8.2 प्रतिशत रही, जो इसकी उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता और वैश्विक मानकों को दर्शाती है।

इन चयनित शोध-पत्रों को प्रतिष्ठित IEEE Xplore Digital Library में प्रकाशित किया जाएगा, जिससे विश्वभर के शोधकर्ताओं को इन शोधों का लाभ मिलेगा।
इन आधुनिक तकनीकों पर हुई गहन चर्चा
सम्मेलन के दौरान सात अलग-अलग तकनीकी ट्रैकों में भविष्य की उभरती तकनीकों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। इनमें प्रमुख रूप से—
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न्यूरल नेटवर्क्स
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डीप लर्निंग
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रीइन्फोर्समेंट लर्निंग
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फज़ी सिस्टम्स
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इवोल्यूशनरी कम्प्यूटेशन
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इंटेलिजेंट डिवाइसेज़
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एम्बेडेड सिस्टम्स
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इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)
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रोबोटिक्स
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ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन
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सिग्नल एवं इमेज प्रोसेसिंग
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साइबर सिक्योरिटी
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डेटा प्राइवेसी
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ट्रस्टवर्दी डिजिटल सिस्टम्स
जैसे अत्याधुनिक विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने शोध और अनुभव साझा किए।
ग्रीन टेक्नोलॉजी बना सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण
इस बार सम्मेलन की विशेषता "Computational Intelligence for Sustainable Systems and Devices" नामक विशेष तकनीकी ट्रैक रहा।
इस ट्रैक में ऐसी तकनीकों पर चर्चा हुई जो केवल स्मार्ट ही नहीं बल्कि ऊर्जा की बचत करने वाली, पर्यावरण के अनुकूल और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ हों।
विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य की तकनीक केवल तेज और आधुनिक होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाने वाली भी होना चाहिए।

ABV-IIITM ग्वालियर के निदेशक ने की सराहना
मुख्य वक्ताओं में शामिल प्रो. (डॉ.) एस. एन. सिंह, निदेशक, एबीवी-आईआईआईटीएम ग्वालियर ने कहा कि ICCISD 2026 भारत के शोध समुदाय में मौजूद प्रतिभा और नवाचार की क्षमता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि 1,800 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त होना और उनमें से बहुत सीमित शोधों का चयन करना इस सम्मेलन की गुणवत्ता को साबित करता है। ऐसे सम्मेलन देश में नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को वैश्विक मंच प्रदान करते हैं।
शारदा विश्वविद्यालय ने वैश्विक शोध केंद्र के रूप में बनाई पहचान
शारदा विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर श्री वाई. के. गुप्ता ने कहा कि ICCISD 2026 विश्वविद्यालय की वैश्विक शोध क्षमता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन है।
उन्होंने कहा कि दस देशों के शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाकर विश्वविद्यालय ने यह साबित किया है कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं बल्कि नवाचार का नेतृत्व करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने आयोजन समिति और सभी प्रतिभागियों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

सम्मेलन अध्यक्ष एवं एसएससीएसई की डीन प्रो. (डॉ.) गीता गणेशन ने कहा कि ICCISD 2026 ने उनकी अपेक्षाओं से कहीं अधिक सफलता हासिल की।
उन्होंने बताया कि 1,828 शोध-पत्रों और 10 देशों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि दुनिया भर के शोधकर्ता अब भारत के शोध मंचों पर भरोसा जता रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से सभी लेखकों, समीक्षकों, स्वयंसेवकों और आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
इन विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का नेतृत्व डॉ. रजनीश कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन ने किया।
सम्मेलन संयोजक के रूप में प्रो. (डॉ.) सुधीर कुमार शर्मा ने आयोजन की जिम्मेदारी निभाई।
इसके अलावा कुलपति प्रो. सिबाराम खारा, शारदा यूनिवर्सिटी आगरा के कुलपति प्रो. परमानंद, डॉ. अजय श्रीराम कुशवाहा, डॉ. श्रीजीत एस., डॉ. रवि प्रकाश चतुर्वेदी, डॉ. दीप्थी पी.एस., एसोसिएट डीन प्रो. (डॉ.) सुदीप वर्मा, प्रो. (डॉ.) कृष्णन बत्री, विभागाध्यक्ष डॉ. जयंत शेखर, डॉ. खुशवंत सहित विभिन्न विभागों के डीन, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
स्वास्थ्य, उद्योग और समाज के लिए नई तकनीकों का रास्ता
सम्मेलन के समापन अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, साइबर सुरक्षा और स्मार्ट शहरों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत को वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने में अहम योगदान देंगे और युवाओं को विश्वस्तरीय शोध एवं तकनीकी नेतृत्व के लिए प्रेरित करेंगे।
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