गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट पुलिस की सेक्टर-126 थाना टीम ने दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय एक अंतर्राज्यीय वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर 9 चोरी की मोटरसाइकिल, 1 स्कूटी और एक अवैध तमंचा बरामद किया गया। पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट पुलिस ने वाहन चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय एक अंतर्राज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। थाना सेक्टर-126 पुलिस ने मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए तीन शातिर वाहन चोरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर 9 चोरी की मोटरसाइकिल, 1 स्कूटी और एक अवैध .315 बोर तमंचा मय जिंदा कारतूस बरामद किया है।
पुलिस के अनुसार यह गिरोह दिल्ली और नोएडा के व्यस्त इलाकों में खड़े दोपहिया वाहनों को निशाना बनाकर चोरी करता था और बाद में उनकी पहचान मिटाकर उन्हें सस्ते दामों में बेच देता था।
गढ़ी शाहपुर कट के पास दबोचे गए आरोपी
पुलिस के मुताबिक 23 जुलाई 2026 को थाना सेक्टर-126 पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर सेक्टर-131 स्थित गढ़ी शाहपुर कट के पास घेराबंदी की। कार्रवाई के दौरान तीन संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास कुमार, रोहित और कुलदीप के रूप में हुई है।
तलाशी के दौरान आरोपी विकास कुमार के कब्जे से एक अवैध .315 बोर तमंचा और एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ। पूछताछ के बाद उनकी निशानदेही पर सेक्टर-131 स्थित यमुना डूब क्षेत्र की घनी झाड़ियों से चोरी के दस दोपहिया वाहन बरामद किए गए।

दिल्ली-एनसीआर में ऐसे करते थे वाहन चोरी
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे एक संगठित अंतर्राज्यीय वाहन चोर गिरोह के सदस्य हैं।
गिरोह के सदस्य पहले मॉल, अस्पताल, मेट्रो स्टेशन, बाजार और रिहायशी इलाकों में घंटों रेकी करते थे। जहां भी बिना सुरक्षा के खड़े दोपहिया वाहन दिखाई देते, उन्हें मौका मिलते ही चोरी कर लेते थे।
चोरी के बाद वाहनों को सीधे बेचने के बजाय वे पहले उन्हें सुनसान स्थानों, विशेषकर यमुना डूब क्षेत्र की झाड़ियों में छिपाकर रखते थे।
इंजन और चेसिस नंबर तक मिटा देते थे
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी चोरी किए गए वाहनों की पहचान पूरी तरह खत्म करने के लिए उनके इंजन नंबर और चेसिस नंबर तक घिसकर मिटा देते थे।
इसके बाद इन वाहनों को बेहद कम कीमत पर बेच दिया जाता था, जिससे पुलिस के लिए उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता था।
पुलिस का कहना है कि यह तरीका गिरोह की सुनियोजित कार्यशैली को दर्शाता है और इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सरगना के पास रहता था अवैध हथियार
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का सरगना विकास कुमार अपने पास हमेशा अवैध तमंचा और कारतूस रखता था।
पुलिस का मानना है कि हथियार रखने का उद्देश्य गिरफ्तारी से बचना और विरोध की स्थिति में डर पैदा करना था।
इसी कारण आरोपी के खिलाफ वाहन चोरी के साथ-साथ आर्म्स एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
दिल्ली और नोएडा से वाहन चोरी की बात कबूली
पूछताछ के दौरान तीनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने दिल्ली और नोएडा के विभिन्न इलाकों से कई दोपहिया वाहन चोरी किए हैं।
बरामद वाहनों में कुछ वाहन पहले से दर्ज मामलों से जुड़े पाए गए हैं। इनमें नोएडा सेक्टर-58 थाना क्षेत्र से चोरी हुई हीरो स्प्लेंडर प्लस, दिल्ली के अमर कॉलोनी थाना क्षेत्र से चोरी हुई हीरो स्प्लेंडर प्रो, तथा गाजीपुर थाना क्षेत्र से चोरी हुई टीवीएस जूपिटर स्कूटी शामिल हैं।
इसके अलावा कई अन्य मोटरसाइकिलें भी बरामद हुई हैं, जिनमें कुछ पर नंबर प्लेट नहीं थी और उनके इंजन तथा चेसिस नंबर भी घिसे हुए मिले।
आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार आरोपी विकास कुमार मूल रूप से बुलंदशहर जिले के डिबाई थाना क्षेत्र के भरानपुर गांव का निवासी है और वर्तमान में गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी में रह रहा था।
रोहित बुलंदशहर के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के गंगावास गांव का निवासी है और वर्तमान में नोएडा के सेक्टर-101 स्थित सलारपुर में रह रहा था।

तीसरा आरोपी कुलदीप बुलंदशहर जिले के नरसैना थाना क्षेत्र के सबदलपुर गांव का निवासी है।
तीनों पर पहले से दर्ज हैं कई मुकदमे
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार तीनों आरोपी पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं।
मुख्य आरोपी विकास कुमार के खिलाफ गौतमबुद्धनगर के सेक्टर-113 और सेक्टर-58 थानों में आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हैं।
रोहित के खिलाफ वर्ष 2022, 2023 और 2024 में नोएडा सेक्टर-39 थाना क्षेत्र में लूट, चोरी और चोरी का सामान रखने के कई मुकदमे दर्ज हैं।
वहीं कुलदीप के खिलाफ बुलंदशहर के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में घर में चोरी, सेंधमारी और चोरी का सामान रखने से जुड़े मामले दर्ज हैं।
बड़े नेटवर्क की तलाश में पुलिस
थाना सेक्टर-126 पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों, चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त करने वाले लोगों और इससे जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अब तक यह गिरोह कितने वाहन चोरी कर बेच चुका है और किन-किन राज्यों तक इसका नेटवर्क फैला हुआ है।
अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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