शारदा विश्वविद्यालय में आयोजित एक सप्ताह के आधुनिक बायोलॉजी प्रशिक्षण कार्यक्रम में छात्रों और शोधार्थियों को नई वैज्ञानिक तकनीकों की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी गई। कार्यक्रम में वायरल प्रोटिओमिक्स, RT-PCR, DNA एक्सट्रैक्शन और HPLC जैसी एडवांस लैब तकनीकों को समझाया गया।
ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय एक बार फिर वैज्ञानिक शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान को लेकर चर्चा में है। विश्वविद्यालय के सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन फैसिलिटी (CIF), सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन वायरोलॉजी एंड इम्यूनोलॉजी (CEVI) और प्लांट टिशू कल्चर एवं हाइड्रोपोनिक्स लैब द्वारा “आधुनिक बायोलॉजी तकनीकों पर एक सप्ताह का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम” आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों को आधुनिक बायोलॉजी और रिसर्च तकनीकों की प्रैक्टिकल जानकारी देना था।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को न केवल वैज्ञानिक सिद्धांत समझाए गए, बल्कि उन्हें खुद लैब में जाकर प्रयोग करने का भी मौका मिला। यही वजह रही कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों और रिसर्च स्कॉलर्स के लिए बेहद खास साबित हुआ।
रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने की पहल
कार्यक्रम की शुरुआत डीन रिसर्च प्रोफेसर भुवनेश कुमार के संबोधन के साथ हुई। उन्होंने अपने उद्घाटन भाषण में विज्ञान और रिसर्च के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए कहा कि आज के समय में वैज्ञानिक अनुसंधान केवल किताबों तक सीमित नहीं रह गया है। नई तकनीकों को समझना और प्रयोगशाला में उनका उपयोग करना बेहद जरूरी हो गया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं देते, बल्कि उन्हें वास्तविक प्रयोगशाला अनुभव भी प्रदान करते हैं। इससे उनके अंदर रिसर्च को लेकर आत्मविश्वास बढ़ता है और भविष्य में बेहतर वैज्ञानिक बनने की दिशा मिलती है।

आधुनिक लैब तकनीकों का मिला प्रशिक्षण
इस एक सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को आधुनिक बायोलॉजी की कई महत्वपूर्ण तकनीकों की जानकारी दी गई। इनमें वायरल प्रोटिओमिक्स, वायरल जीनोमिक्स, प्लांट जीनोमिक्स और HPLC तकनीक प्रमुख रहीं।
छात्रों और शोधार्थियों को लैब में SDS-PAGE तकनीक के माध्यम से प्रोटीन जांच करना सिखाया गया। इसके अलावा रियल टाइम RT-PCR के जरिए जीन एक्सप्रेशन स्टडी की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने पौधों से DNA निकालने, जीन एम्प्लीफिकेशन और नैनोड्रॉप स्पेक्ट्रोफोटोमीटर की मदद से DNA जांच करने जैसी तकनीकों को खुद प्रयोग करके सीखा।
वहीं HPLC यानी हाई परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी तकनीक के जरिए एस्कॉर्बिक एसिड की जांच करने की प्रक्रिया को भी विस्तार से बताया गया। विशेषज्ञों ने छात्रों को समझाया कि मेडिकल, बायोटेक्नोलॉजी और फार्मा रिसर्च में इन तकनीकों की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रयोगात्मक ज्ञान को बताया सबसे जरूरी
कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर विनोद जोशी ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक बायोलॉजी में प्रयोगात्मक ज्ञान की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा,
“जब छात्र और शोधार्थी खुद लैब में तकनीकों को सीखते और समझते हैं, तब उनकी वैज्ञानिक सोच और अधिक मजबूत होती है। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य के वैज्ञानिकों को तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में बायोटेक्नोलॉजी, मेडिकल रिसर्च और वायरोलॉजी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले युवाओं की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में छात्रों के लिए प्रैक्टिकल अनुभव बेहद जरूरी हो गया है।

छात्रों में दिखा उत्साह
कार्यक्रम में शामिल छात्रों और शोधार्थियों ने भी इस प्रशिक्षण को बेहद उपयोगी बताया। कई प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें पहली बार इतनी आधुनिक मशीनों और रिसर्च तकनीकों के साथ काम करने का अवसर मिला।
एक शोधार्थी ने कहा कि किताबों में पढ़ी गई तकनीकों को लैब में खुद इस्तेमाल करना एक अलग अनुभव था। इससे रिसर्च को समझने में काफी मदद मिली।
छात्रों का कहना था कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम उनके करियर के लिए बेहद फायदेमंद साबित होंगे और उन्हें उच्च स्तरीय रिसर्च के लिए तैयार करेंगे।
विज्ञान शिक्षा में शारदा विश्वविद्यालय की मजबूत पहल
शारदा विश्वविद्यालय लगातार रिसर्च, इनोवेशन और आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नई पहल करता रहा है। विश्वविद्यालय में मौजूद आधुनिक लैब्स और रिसर्च सेंटर छात्रों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम न केवल छात्रों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाते हैं, बल्कि उन्हें इंडस्ट्री और रिसर्च सेक्टर की वास्तविक जरूरतों के अनुसार तैयार भी करते हैं।
कार्यक्रम में कई शिक्षाविद और छात्र रहे मौजूद
इस अवसर पर रमेश जोशी, अतुल कुमार गुप्ता, बेनेट एंजेल, एनेट एंजेल, अफसर अली सहित विभिन्न विभागों के डीन, फैकल्टी मेंबर्स, स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।
पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों में सीखने को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों को नई तकनीकों के साथ रिसर्च में आगे बढ़ने के संदेश के साथ किया गया।
COMMENTS