उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता दिवस पर राजधानी लखनऊ में ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आजादी का अर्थ केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि अराजकता, पिछड़ेपन, गरीबी, अशिक्षा और असमानता से भी पूर्ण मुक्ति है। मुख्यमंत्री ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज के भारत की विकास यात्रा का उल्लेख किया और उत्तर प्रदेश पुलिस के कीर्ति चक्र से सम्मानित इंस्पेक्टर सुनील कुमार के बलिदान को भी याद किया।
देश जब आजादी की 80वीं वर्षगांठ के जश्न में डूबा हुआ है, तब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आजादी के मायने को लेकर एक ऐसा संदेश दिया, जो सिर्फ तिरंगे और समारोह तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी का मतलब केवल राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल कर लेना नहीं है। असली आजादी तब होगी, जब देश अराजकता, पिछड़ेपन, गरीबी, अशिक्षा और असमानता से भी पूरी तरह मुक्त होगा।
शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास 5, कालिदास मार्ग, लखनऊ पर ध्वजारोहण किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रनायकों, स्वतंत्रता सेनानियों और देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए नागरिकों से देश की स्वतंत्रता और उसकी उपलब्धियों को बनाए रखने के लिए अपने-अपने क्षेत्र में योगदान देने का आह्वान किया।
‘आजादी को लंबे समय तक बनाए रखना है तो 140 करोड़ लोगों को योगदान देना होगा’
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत ने आजादी के लंबे संघर्ष, त्याग और बलिदान के बाद 1947 में स्वतंत्रता हासिल की थी। आज जिस खुले और उन्मुक्त वातावरण में हर भारतीय सांस ले रहा है, वह भारत माता के महान सपूतों की तपस्या और बलिदान का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि भारत अलग-अलग अंतरविरोधों और षड्यंत्रों के कारण गुलाम हुआ, लेकिन देश ने कभी अपने मन और मस्तिष्क से गुलामी को स्वीकार नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी को लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बनाए रखना है तो इसकी जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति, जाति या संप्रदाय की नहीं हो सकती। इसके लिए 140 करोड़ भारतवासियों को अपने-अपने क्षेत्र में समान रूप से योगदान देना होगा।
1857 से शुरू हुई सामूहिक चेतना का किया जिक्र
सीएम योगी ने स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को याद करते हुए 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर को महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने बैरकपुर के मंगल पांडेय, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और मेरठ के धनसिंह कोतवाल जैसे रणबांकुरों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि उस दौर में गांव-गांव, जनपद-जनपद और प्रांत-प्रांत में आजादी की लौ जल रही थी। अलग-अलग स्थानों पर संघर्ष जरूर अलग थे, लेकिन सभी के मन में एक ही भावना थी—देश को विदेशी दासता से मुक्त कराना।
मुख्यमंत्री ने राजस्थान के महाराणा प्रताप, पंजाब के गुरु गोविंद सिंह और महाराष्ट्र के छत्रपति शिवाजी महाराज के संघर्षों का भी उल्लेख किया। इसके बाद 1857 के सामूहिक संघर्ष से लेकर चौरीचौरा और लखनऊ के काकोरी ट्रेन एक्शन तक क्रांतिकारी गतिविधियों की निरंतरता को याद किया।
आठ दशकों में बदला भारत, 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 1947 में देश के सामने अराजकता, अशिक्षा, पिछड़ेपन और असमानता जैसी कई बड़ी चुनौतियां थीं। पिछले करीब आठ दशकों में इनमें से अनेक समस्याओं का समाधान हुआ है।
उन्होंने कहा कि देश में 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। शिक्षा का दायरा बढ़ा है और बिना भेदभाव शासन की योजनाओं का लाभ समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचना शुरू हुआ है।
उन्होंने विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास का भी उल्लेख किया और कहा कि आम आदमी का जीवन सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए किए जा रहे बदलावों के परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं।
देश को कमजोर करने वाली ताकतों से सतर्क रहने की अपील
मुख्यमंत्री योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान का भी जिक्र किया, जिसमें देश के विकास के लिए गरीब, युवा, महिला और किसान को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में इन्हीं चार वर्गों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई गईं। सरकार की इच्छाशक्ति के साथ इन योजनाओं को जमीन पर उतारने का प्रयास हुआ, जिसका परिणाम यह रहा कि बड़ी संख्या में आम लोग सरकारी योजनाओं से जुड़े।
मुख्यमंत्री ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचने, मिशन रोजगार और युवाओं को आधुनिक तकनीक के अनुरूप तैयार करने के लिए नए प्लेटफॉर्म और संस्थान विकसित किए जाने की बात कही।
स्वास्थ्य क्षेत्र में नए मेडिकल कॉलेज और एम्स, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे कनेक्टिविटी, मेट्रो और रैपिड रेल जैसी सुविधाओं का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने अमृत भारत, वंदे भारत और नमो भारत जैसी आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को देश की बदलती तस्वीर से जोड़ा।
गांधी से आंबेडकर और सुभाष तक, राष्ट्रनायकों को किया नमन
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित महान राष्ट्रनायकों को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने उन क्रांतिकारियों को भी नमन किया, जिन्होंने आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया। साथ ही स्वतंत्र भारत की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले जवानों को भी श्रद्धापूर्वक याद किया।
कीर्ति चक्र विजेता इंस्पेक्टर सुनील कुमार के बलिदान को किया याद
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस के जांबाज इंस्पेक्टर सुनील कुमार के बलिदान को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने बताया कि इंस्पेक्टर सुनील कुमार को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून-व्यवस्था स्थापित करने, अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के संकल्प को मजबूत करने में इंस्पेक्टर सुनील कुमार का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।
उन्होंने राष्ट्रपति के वीरता पुरस्कार से सम्मानित उत्तर प्रदेश के अन्य अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को भी बधाई दी।
सीएम योगी का संदेश—आजादी की असली परीक्षा जिम्मेदारी में
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर नागरिक को अपने क्षेत्र में योगदान देना होगा। जब देश की सामूहिक शक्ति एक स्वर में आगे बढ़ती है, तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।
यानी मुख्यमंत्री योगी का स्वतंत्रता दिवस संदेश साफ है—आजादी सिर्फ अतीत की उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्तमान की जिम्मेदारी और भविष्य का संकल्प है।
देश ने विदेशी दासता से मुक्ति हासिल कर ली, लेकिन अब लड़ाई गरीबी, अशिक्षा, असमानता, पिछड़ेपन और अराजकता के खिलाफ है। इस लड़ाई में सरकार अपनी भूमिका निभा सकती है, लेकिन जीत तभी संभव है जब 140 करोड़ भारतीय अपने-अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाएं।
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