गौतमबुद्ध नगर में मतदेय स्थलों के पुनर्निर्धारण को लेकर जिलाधिकारी ने राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। सुझावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम सूची तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। 17 जुलाई तक लिखित आपत्तियां और संशोधन प्रस्ताव दिए जा सकेंगे।
आगामी निर्वाचन की तैयारियों के बीच गौतमबुद्ध नगर प्रशासन ने मतदाताओं की सुविधा को केंद्र में रखते हुए मतदेय स्थलों (पोलिंग बूथ) के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। इसी क्रम में शुक्रवार को जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ने कलेक्ट्रेट सभागार में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में उन सभी सुझावों और आपत्तियों पर चर्चा की गई, जो मतदेय स्थलों के संभाजन और पुनर्निर्धारण को लेकर प्राप्त हुई थीं।
प्रशासन का कहना है कि भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह पूरी प्रक्रिया मतदाताओं को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी मतदान व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की जा रही है। खास बात यह है कि इस बार 1200 मतदाताओं के मानक को आधार बनाकर मतदेय स्थलों का पुनर्गठन किया गया है।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट किया कि सुझावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद तैयार की गई मतदेय स्थलों की सूची सभी के समक्ष रखी गई है। साथ ही यह भी बताया गया कि किन प्रस्तावों को स्वीकार किया गया और किन्हें अस्वीकार किया गया।
हालांकि प्रशासन ने अंतिम सूची जारी करने से पहले एक और अवसर भी दिया है। यदि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल या जनप्रतिनिधि को किसी मतदेय स्थल को लेकर कोई तथ्यात्मक त्रुटि, विशेष परिस्थिति या जनहित से जुड़ा सुझाव देना है, तो वह 17 जुलाई 2026 की शाम तक संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) को लिखित रूप में अपना प्रस्ताव दे सकता है। प्राप्त सुझावों का परीक्षण करने के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने बैठक में मौजूद सभी उप जिलाधिकारियों (SDM) को स्पष्ट निर्देश दिए कि राजनीतिक दलों की ओर से प्राप्त हर सुझाव और आपत्ति का निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से परीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर जल्दबाजी या लापरवाही नहीं होनी चाहिए, क्योंकि मतदान केंद्रों का निर्धारण सीधे मतदाताओं की सुविधा और निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा विषय है।
प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया कि जिन मामलों में आपत्तियां दर्ज हुई हैं, वहां संबंधित लेखपाल और बूथ लेवल अधिकारी (BLO) संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण करें। निरीक्षण के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर समय पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि अंतिम सूची में किसी प्रकार की तथ्यात्मक त्रुटि न रह जाए।
हाईराइज सोसायटियों को लेकर बड़ा निर्देश
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू हाईराइज सोसायटियों में मतदान केंद्रों को लेकर रहा। पिछले कुछ वर्षों में गौतमबुद्ध नगर में तेजी से आबादी बढ़ी है और बड़ी संख्या में लोग नई हाईराइज सोसायटियों में रहने लगे हैं। ऐसे में कई मतदाताओं को मतदान के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ती है।

इसी समस्या को देखते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां आवश्यकता हो, वहां भारत निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार नई हाईराइज सोसायटियों में नए मतदेय स्थल स्थापित किए जाएं। उद्देश्य यह है कि प्रत्येक पात्र मतदाता को अपने निवास के निकट और सुविधाजनक मतदान केंद्र उपलब्ध हो सके।
मतदाताओं की सुविधा प्रशासन की प्राथमिकता
प्रशासन का मानना है कि मतदान केंद्रों का सही निर्धारण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि मतदान केंद्र मतदाताओं के लिए सुलभ होंगे तो मतदान प्रतिशत बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इसी कारण इस बार पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
निर्वाचन विभाग के अनुसार मतदेय स्थलों के पुनर्निर्धारण में स्थानीय परिस्थितियों, मतदाताओं की संख्या, पहुंच मार्ग, भवन की उपलब्धता और निर्वाचन आयोग के सभी मानकों का ध्यान रखा गया है।

बैठक में भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, सांसद प्रतिनिधि संजय बाली, विधायक दादरी प्रतिनिधि दीपक यादव, भाजपा जिला महामंत्री धर्मेंद्र कोरी, कांग्रेस के नीरज लोहिया, बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष लखमी सिंह, बसपा प्रतिनिधि राजकुमार गुर्जर और सूरजपाल, समाजवादी पार्टी के जिला प्रभारी अनूप तिवारी, आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष परशुराम चौधरी तथा पार्टी प्रतिनिधि दिलदार अंसारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अजीत कुमार सिंह, उप जिलाधिकारी सदर आशुतोष गुप्ता, उप जिलाधिकारी जेवर दुर्गेश सिंह, तहसीलदार दादरी कृष्ण कुमार चौरसिया सहित जिला निर्वाचन कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी भी बैठक में मौजूद रहे।
17 जुलाई तक प्राप्त होने वाले सभी सुझावों और आपत्तियों की जांच पूरी होने के बाद मतदेय स्थलों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। इसके आधार पर आगामी निर्वाचन के लिए मतदान केंद्रों का अंतिम निर्धारण होगा। प्रशासन का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य केवल मतदाताओं को अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और निष्पक्ष मतदान व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
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