भारत-अमेरिका ट्रेड डील की बदली हुई फैक्टशीट से साफ है कि भारत ने दालों को टैरिफ कटौती से बाहर रखकर, डिजिटल सर्विस टैक्स पर नियंत्रण बनाए रखकर और 500 अरब डॉलर की खरीद को बाध्यकारी वादा न मानकर अपने हितों की रक्षा की है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर जारी संशोधित फैक्टशीट ने कई अहम संकेत दिए हैं। जहां पहले अमेरिकी दस्तावेज़ों में भारत द्वारा दालों पर टैरिफ कटौती, 500 अरब डॉलर की खरीद का “पक्का वादा” और डिजिटल सर्विस टैक्स (DST) हटाने जैसे दावे थे, वहीं अब इन बिंदुओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
दालों को टैरिफ कटौती सूची से हटा दिया गया है, जिससे लाखों भारतीय किसानों को राहत मिली है। भारत ने स्पष्ट किया है कि दालें संवेदनशील क्षेत्र हैं और इन्हें पूर्ण संरक्षण दिया जाएगा।

500 अरब डॉलर की खरीद को अब “इरादा” बताया गया है, जिससे भारत पर कोई कानूनी बाध्यता नहीं बनती। डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने का दावा भी संशोधित दस्तावेज़ से हटा दिया गया है। अब केवल डिजिटल व्यापार नियमों पर बातचीत जारी रहने की बात कही गई है। गौरतलब है कि भारत 2016 से इक्वलाइजेशन लेवी के रूप में विदेशी डिजिटल कंपनियों पर टैक्स वसूलता है।
7 फरवरी के संयुक्त बयान में समझौते को “अंतरिम” बताया गया है, जिससे स्पष्ट है कि व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत अभी जारी है।

टैरिफ के मोर्चे पर अमेरिका ने 25% रेसिप्रोकल टैक्स घटाकर 18% किया है और रूस से तेल खरीद पर अतिरिक्त 25% शुल्क हटाया है। वहीं भारत ने नारियल तेल, अरंडी तेल, कपास बीज तेल और संशोधित स्टार्च जैसे उत्पादों पर शुल्क 10 साल में चरणबद्ध घटाने का निर्णय लिया है।
सरकार का कहना है कि यह समझौता ‘फार्मर-फर्स्ट’ दृष्टिकोण पर आधारित है, जिससे किसानों और श्रम-प्रधान उद्योगों को संरक्षण और नए अवसर दोनों मिलेंगे।
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