Wednesday, June 24, 2026

पेपर लीक का दो साल पुराना राज खुला! 12 लाख में नौकरी का सौदा, भोपाल में रटवाए गए सवाल, STF ने दबोचा फरार आरोपी

उत्तर प्रदेश समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा 2023 के पेपर लीक मामले में दो साल से फरार चल रहे आरोपी को STF ने मऊ से गिरफ्तार किया। पूछताछ में 12 लाख रुपये की डील, भोपाल में पेपर रटवाने और नौकरी दिलाने के नेटवर्क का खुलासा हुआ।

Bahrampur , Latest Updated On - Jun 19 2026 | 12:53:00 PM
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UPPSC RO/ARO परीक्षा पेपर लीक मामले में STF को बड़ी सफलता मिली है। दो साल से फरार आरोपी आलोक मिश्रा को मऊ से गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि परीक्षा से पहले भोपाल के एक होटल में उसे और उसके बहनोई को प्रश्नपत्र और उत्तर रटवाए गए थे। पेपर लीक के बदले 12-12 लाख रुपये की डील हुई थी और एडवांस में लाखों रुपये दिए गए थे।

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 उत्तर प्रदेश की चर्चित समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) परीक्षा 2023 के पेपर लीक मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। लगभग दो वर्षों से फरार चल रहे आरोपी आलोक मिश्रा को STF ने गुरुवार को मऊ शहर कोतवाली क्षेत्र के नई बस्ती मुंशीपुरा स्थित उसके ठिकाने के पास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की गिरफ्तारी के साथ ही इस बहुचर्चित पेपर लीक कांड से जुड़े कई नए खुलासे सामने आए हैं, जिन्होंने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

STF अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी पेपर लीक गिरोह का सक्रिय सदस्य था और उसके खिलाफ प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज था। मामले में गिरोह के तीन अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है।

दो साल से फरार था आरोपी

गिरफ्तार आरोपी की पहचान आलोक मिश्रा पुत्र संजय मिश्रा के रूप में हुई है। उसका मूल निवास गाजीपुर जिले के जंगीपुर थाना क्षेत्र के बाबूरायपुर, मानपुर गांव में बताया गया है। हालांकि वह वर्तमान में मऊ शहर कोतवाली क्षेत्र में रह रहा था।

पेपर लीक मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही पुलिस और STF उसकी तलाश में जुटी हुई थी, लेकिन वह लगातार गिरफ्तारी से बचता रहा। दो वर्षों तक फरार रहने के बाद आखिरकार मुखबिर की सूचना के आधार पर STF ने उसे दबोच लिया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था पेपर

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा 11 फरवरी 2024 को समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी (RO/ARO) प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई थी।

परीक्षा शुरू होने से पहले ही सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र वायरल होने की शिकायतें सामने आने लगी थीं। मामला गंभीर होने पर राज्य सरकार ने परीक्षा को निरस्त कर दिया और जांच की जिम्मेदारी STF को सौंप दी।

जांच के दौरान STF ने एक संगठित पेपर लीक नेटवर्क का खुलासा किया था, जिसमें कई लोग शामिल पाए गए थे। कार्रवाई के दौरान कई आरोपी गिरफ्तार किए गए, जबकि कुछ आरोपी फरार हो गए थे। आलोक मिश्रा भी उन्हीं फरार आरोपियों में शामिल था।

पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा

गिरफ्तारी के बाद STF द्वारा की गई पूछताछ में आलोक मिश्रा ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

आलोक ने बताया कि उसने स्वयं RO/ARO परीक्षा 2023 का आवेदन किया था। उसके बहनोई कृष्णा पाण्डेय, जो गाजीपुर के निवासी हैं, उन्होंने भी परीक्षा का फॉर्म भरा था।

परीक्षा से लगभग दो सप्ताह पहले दोनों की मुलाकात वाराणसी रेलवे स्टेशन के पास अमरजीत शर्मा नामक व्यक्ति से हुई थी। बातचीत के दौरान अमरजीत ने दावा किया कि उसके पास प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध हो जाते हैं और वह नौकरी लगवाने की व्यवस्था भी कर सकता है।

12-12 लाख रुपये में हुई थी डील

आरोपी ने STF को बताया कि अमरजीत शर्मा ने दोनों से 12-12 लाख रुपये की मांग की थी। बदले में RO/ARO परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया गया था।

अमरजीत ने कहा था कि यदि प्रारंभिक परीक्षा के बाद मुख्य परीक्षा का पेपर भी उपलब्ध नहीं करा पाया या नौकरी नहीं लगी तो पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।

सरकारी नौकरी पाने के लालच में आलोक मिश्रा और उसके बहनोई कृष्णा पाण्डेय इस प्रस्ताव के लिए तैयार हो गए। दोनों ने तीन-तीन लाख रुपये नकद एडवांस के रूप में दिए।

ब्लैंक चेक और शैक्षिक दस्तावेज भी लिए गए

पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि गिरोह ने दोनों अभ्यर्थियों की हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और स्नातक की अंकतालिकाओं की प्रतियां अपने पास रख ली थीं।

इतना ही नहीं, भविष्य में शेष भुगतान सुनिश्चित करने के लिए SBI बैंक के दो ब्लैंक चेक भी अपने कब्जे में ले लिए गए थे।

STF अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क काफी व्यवस्थित तरीके से काम कर रहा था और उम्मीदवारों से भारी रकम लेकर उन्हें परीक्षा में सफलता का झांसा देता था।

भोपाल के होटल में रटवाए गए प्रश्न और उत्तर

पूछताछ में सामने आया कि परीक्षा से दो दिन पहले अमरजीत शर्मा ने आलोक मिश्रा और कृष्णा पाण्डेय को भोपाल बुलाया था।

9 फरवरी 2024 को दोनों भोपाल पहुंचे और आनंद नगर क्षेत्र स्थित एक होटल में ठहरे। वहां पहले से मौजूद गिरोह के सदस्य सुभाष प्रकाश, विवेक उपाध्याय और अन्य लोगों ने उन्हें सामान्य अध्ययन और हिंदी विषय के संभावित प्रश्न एवं उनके उत्तर उपलब्ध कराए।

आलोक के अनुसार लगभग तीन से चार घंटे तक उन्हें प्रश्नपत्र और उत्तर रटवाए गए। इसके बाद सभी दस्तावेज वापस लेकर उन्हें परीक्षा में शामिल होने के लिए भेज दिया गया।

परीक्षा में आए वही सवाल

आलोक मिश्रा ने STF को बताया कि 10 फरवरी को वह वापस लौट आया और 11 फरवरी को परीक्षा में शामिल हुआ।

परीक्षा के दौरान उसे वही प्रश्न दिखाई दिए, जिन्हें भोपाल में पढ़ाया और रटवाया गया था। इससे उसे विश्वास हो गया कि प्रश्नपत्र वास्तव में पहले ही लीक हो चुका था।

हालांकि कुछ समय बाद मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से उसे जानकारी मिली कि पेपर लीक की शिकायतों के बाद परीक्षा निरस्त कर दी गई है और कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

पहले भी हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां

STF के अनुसार इस मामले में गिरोह के प्रमुख सदस्यों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है।

गैंग से जुड़े प्रमुख आरोपी सुभाष प्रकाश, विवेक उपाध्याय समेत अन्य आरोपियों को 23 जून 2024 को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

वहीं आरोपी आलोक मिश्रा के बहनोई कृष्णा पाण्डेय को भी 10 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया था। अब आलोक मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद STF को उम्मीद है कि गिरोह से जुड़े अन्य पहलुओं और नेटवर्क के शेष सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

भर्ती परीक्षाओं की साख पर बड़ा सवाल

RO/ARO पेपर लीक मामला उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित भर्ती परीक्षा घोटालों में शामिल रहा है। इस घटना ने लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत और भरोसे को झटका दिया था।

अब आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रश्नपत्र लीक करने का नेटवर्क कितना बड़ा था, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और पेपर लीक की पूरी साजिश किस स्तर पर रची गई थी।

फिलहाल STF आरोपी से विस्तृत पूछताछ कर रही है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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