RTI कानून को लेकर CIC का बड़ा और सख्त फैसला! Northern Railway से जुड़े मामले में अपीलकर्ता संदीप कुमार तिवारी की RTI पर केंद्रीय सूचना आयोग ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। रिकॉर्ड उपलब्ध कराने, Inspection का अवसर देने और आवश्यक दस्तावेजों की Certified Copies देने के निर्देश के साथ आयोग ने दूसरे RTI मामले में भी Nodal CPIO को सभी संबंधित विभागों से जानकारी जुटाकर Complete और Point-wise Reply देने को कहा है। संदीप कुमार तिवारी की RTI पर CIC ने क्या आदेश दिया? क्या देरी और सूचना रोकने पर अधिकारी पर ₹25 हजार तक का दंड लग सकता है? देखिए पूरी रिपोर्ट और जानिए CIC के कड़े आदेश की पूरी सच्चाई।

RTI के जरिए मांगी गई सूचना को टालना, अधूरा जवाब देना या जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद उसे रोकना अब भारी पड़ सकता है। Northern Railway से जुड़े दो RTI मामलों में केंद्रीय सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
31 अगस्त 2026 को सूचना आयुक्त स्वागत दास द्वारा पारित आदेशों में एक मामले में आवेदक को संबंधित रिकॉर्ड का निरीक्षण कराने का निर्देश दिया गया है, जबकि दूसरे मामले में Nodal CPIO को पूरी RTI की दोबारा जांच कर सभी संबंधित विभागों से जानकारी जुटाकर Complete और Point-wise Reply देने को कहा गया है।
सबसे अहम बात यह है कि दूसरे मामले में आदेश का पालन निर्धारित समय में नहीं होने पर संबंधित Nodal CPIO को यह बताने के लिए Show-Cause किया जाएगा कि RTI Act के तहत उसके खिलाफ Maximum Penalty क्यों न लगाई जाए।
क्या है पूरा मामला?
पहला मामला CIC/NRAIL/A/2025/112922 है। इसमें अपीलकर्ता संदीप कुमार तिवारी ने 1 अप्रैल 2023 से 27 नवंबर 2024 तक Northern Railway के Engineering और Electrical Works से संबंधित कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड मांगे थे।
RTI में Tender, Work Order, Contract, Project Timeline, Payment, Bank Guarantee, Penalty, Delayed और Terminated Projects, अधिकारियों की जिम्मेदारी, शिकायतें, Bidders, Inspection, Audit और Departmental Action सहित कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी।
अपीलकर्ता ने CIC के सामने कहा कि उन्हें दी गई जानकारी अधूरी और गलत है। रेलवे की ओर से मांगी गई जानकारी को काफी विस्तृत और Voluminous बताया गया।
इसके बाद आयोग ने एक महत्वपूर्ण रास्ता निकाला—रिकॉर्ड का Inspection।
आयोग ने निर्देश दिया कि संबंधित रिकॉर्ड व्यवस्थित करके एक स्थान पर उपलब्ध कराया जाए और अपीलकर्ता को निरीक्षण का अवसर दिया जाए। निरीक्षण की तारीख और समय दो सप्ताह के भीतर तय करने को कहा गया है। आवश्यक दस्तावेजों की Certified Copies भी निर्धारित शुल्क पर उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
हालांकि, RTI Act के तहत वैध रूप से exempt सूचना या आवश्यक Third Party Information को कानून के अनुसार Withhold अथवा Redact किया जा सकता है।
दूसरे मामले में CIC ने Nodal CPIO की जिम्मेदारी तय की
दूसरा मामला CIC/NRAIL/A/2025/112901 है। इसमें M/s Globalrays Technologies से संबंधित Northern Railway के Work Orders और Supply Orders की जानकारी मांगी गई थी।
मांगी गई जानकारी में Orders की वित्तीय राशि, Tendering Process, PAC/Nomination Orders, L1 Bidding, Payments, Approval Authorities, Quality Assurance, Inspection और Third-Party Audit जैसे विषय शामिल थे।
RTI को Stores Department भेजा गया, जहां से यह जवाब आया कि मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
लेकिन CIC ने इस तरीके को पर्याप्त नहीं माना।
आयोग ने स्पष्ट किया कि Nodal CPIO की भूमिका केवल RTI आवेदन को एक विभाग से दूसरे विभाग में Forward करने तक सीमित नहीं है।
यदि मांगी गई सूचना अलग-अलग विभागों में उपलब्ध है, तो Nodal CPIO को संबंधित Record-Holding Departments की पहचान करनी होगी, उनसे जानकारी प्राप्त करनी होगी और आवेदक को Complete तथा Point-wise Reply दिलाना होगा।
यानी आवेदक को यह कहकर अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगवाए जा सकते कि सूचना दूसरे विभाग के पास है।
“Information Not Available” कहकर नहीं चलेगा काम
CIC के निर्देशों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि किसी बिंदु पर सूचना उपलब्ध नहीं है या कानून के तहत सूचना नहीं दी जा सकती, तो केवल “Information Not Available” या “Cannot Be Provided” लिखना पर्याप्त नहीं होगा।
संबंधित बिंदु के सामने स्पष्ट करना होगा कि सूचना उपलब्ध क्यों नहीं है अथवा यदि सूचना रोकी जा रही है तो RTI Act की कौन-सी धारा लागू होती है और सूचना रोकने का विशिष्ट कारण क्या है।
दो सप्ताह में पूरी करनी होगी कार्रवाई
CIC ने Vipul Goel, DGM/Nodal CPIO, Northern Railway को 12 दिसंबर 2024 की RTI को दोबारा Examine करने का निर्देश दिया है।
उन्हें सभी संबंधित Departments और Record-Holding Authorities की पहचान करनी होगी, वहां से आवश्यक जानकारी जुटानी होगी और पूरी RTI का Complete, Proper और Point-wise Reply तैयार करना होगा।
इसके लिए आदेश प्राप्त होने के दो सप्ताह की समय-सीमा तय की गई है।
आदेश नहीं माना तो लग सकता है बड़ा दंड
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या CIC सीधेजुर्माना लगा देगा?
यहां RTI कानून की स्थिति समझना जरूरी है।
RTI Act की धारा 20(1) के तहत यदि CIC यह पाता है कि CPIO ने बिना उचित कारण आवेदन लेने से इनकार किया, निर्धारित समय में सूचना नहीं दी, दुर्भावनापूर्वक सूचना रोकी, जानबूझकर गलत/अधूरी/भ्रामक सूचना दी, रिकॉर्ड नष्ट किया या सूचना देने में किसी तरह बाधा डाली, तो ₹250 प्रतिदिन की दर से अधिकतम ₹25,000 तक का दंड लगाया जा सकता है।
लेकिन ध्यान रहे—Show-Cause Notice का अर्थ यह नहीं है कि ₹25,000 का जुर्माना पहले ही लगा दिया गया है। संबंधित CPIO को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाता है। CIC की आधिकारिक FAQ भी बताती है कि दंड लगाने से पहले CPIO को उचित सुनवाई का अवसर मिलता है।
इसके अलावा धारा 20(2) के तहत लगातार और बिना उचित कारण RTI दायित्वों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी की जा सकती है।
CIC का बड़ा संदेश
इन दोनों मामलों में आयोग का संदेश साफ है—RTI का जवाब सिर्फ कागज पर देना पर्याप्त नहीं है।
अगर सूचना उपलब्ध है तो उसे कानून के मुताबिक उपलब्ध कराना होगा। अगर सूचना किसी दूसरे विभाग के पास है तो Nodal CPIO को समन्वय करना होगा। अगर सूचना रोकी जा रही है तो कानूनी आधार बताना होगा। और अगर आदेश का पालन नहीं किया गया तो अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी के बारे में जवाब देना पड़ सकता है।
यानी RTI आवेदक के लिए सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि “जवाब मिला या नहीं?”
सवाल यह भी है—
जवाब समय पर मिला या नहीं?
क्या हर बिंदु का जवाब दिया गया?
क्या सूचना पूरी थी?
अगर सूचना रोकी गई तो किस धारा के तहत?
और क्या अधिकारी के पास सूचना रोकने का वैध कारण था?
Northern Railway से जुड़े इन CIC आदेशों ने RTI व्यवस्था में जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश जरूर दिया है।
RTI में देरी, अधूरी जानकारी और सूचना रोकने के मामलों में अब मामला केवल जवाब तक सीमित नहीं रह सकता—कानून के तहत जिम्मेदारी तय होने पर आर्थिक दंड और विभागीय कार्रवाई तक की नौबत आ सकती है।

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