उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की ऑनलाइन परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोह के एक और सदस्य को गिरफ्तार किया है। आरोपी लोकेश लंबे समय से फरार चल रहा था। जांच में सामने आया है कि वह मॉडिफाइड TFT स्क्रीन तैयार करके देश के कई राज्यों में सप्लाई करता था। इन स्क्रीन की मदद से परीक्षा केंद्रों के बाहर बैठे सॉल्वर प्रश्नों के उत्तर भेजते थे।
कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की ऑनलाइन परीक्षाओं में धांधली करने वाले हाईटेक गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की कार्रवाई लगातार जारी है। इस कड़ी में एसटीएफ को एक और बड़ी सफलता मिली है। टीम ने गिरोह के वांछित सदस्य लोकेश को राजस्थान के अलवर जिले से गिरफ्तार कर लिया है।
लोकेश पर आरोप है कि वह विशेष तकनीक से तैयार की गई मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन (TFT Screen) बनाकर विभिन्न राज्यों में सप्लाई करता था। इन्हीं उपकरणों का इस्तेमाल करके अभ्यर्थियों को परीक्षा में नकल कराई जाती थी।
एसटीएफ के अनुसार, यह पूरा मामला कर्मचारी चयन आयोग की ओर से आयोजित सीएपीएफ, एसएसएफ कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) और असम राइफल्स राइफलमैन भर्ती परीक्षा-2026 से जुड़ा हुआ है।

एसटीएफ को पिछले कई महीनों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सक्रिय एक संगठित गिरोह की जानकारी मिल रही थी। इसी आधार पर अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा और पुलिस उपाधीक्षक नवेन्दु कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया।
जांच के दौरान 22 मई 2026 को ग्रेटर नोएडा के थाना नॉलेज पार्क क्षेत्र में स्थित बालाजी डिजिटल जोन पर छापा मारा गया। वहां से गिरोह के मुख्य आरोपी और सेंटर संचालक प्रदीप चौहान, हैकर अमित राणा समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
उस समय पुलिस ने लगभग 50 लाख रुपये नकद, प्रॉक्सी सर्वर और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए थे।
इसके बाद 6 जुलाई 2026 को गिरोह के एक अन्य सदस्य इंद्रजीत उर्फ योगी को गिरफ्तार किया गया। वहीं, 16 जुलाई को पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं, जिनके आधार पर लोकेश तक पहुंचना संभव हो सका।

गिरफ्तार आरोपी लोकेश अलवर जिले के देसूला क्षेत्र की कृष्णा कॉलोनी का रहने वाला है। उसकी उम्र करीब 34 वर्ष बताई जा रही है। उसने वर्ष 2013 में कंप्यूटर हार्डवेयर और नेटवर्किंग का प्रशिक्षण लिया था और उसके बाद से वह "मानसी इन्फोटेक" के नाम से अपना कारोबार चला रहा था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2017 में नेटवर्किंग का काम करते समय उसे पहली बार मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद उसने खुद ऐसे उपकरण तैयार करने शुरू कर दिए और उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में उनकी आपूर्ति शुरू कर दी।
घर से बरामद हुए हाईटेक उपकरण
एसटीएफ ने लोकेश के घर से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। इनमें कुल 92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन, 45 वीजीए कार्ड, 20 वीजीए-टू-एचडीएमआई कार्ड, 14 रास्पबेरी पाई डिवाइस, 12 मेमोरी कार्ड, 10 यूएसबी केबल, पांच वीजीए स्विच, वाई-फाई डोंगल, हीट सिंक, लैपटॉप, सोल्डरिंग उपकरण और अन्य तकनीकी सामान शामिल हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क का दायरा केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं।

पूछताछ में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोपी ऐसी मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन तैयार करते थे, जो सामान्य स्क्रीन की तरह दिखाई देती थीं। इन स्क्रीन के भीतर विशेष उपकरण लगाए जाते थे।
परीक्षा शुरू होने के बाद स्क्रीन पर दिखाई देने वाले सवालों को वाई-फाई डोंगल की सहायता से परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद किसी दूसरे सिस्टम तक पहुंचाया जाता था। वहां बैठा सॉल्वर सवालों के जवाब तैयार करता था और फिर उसी माध्यम से परीक्षार्थी तक पहुंचा देता था।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे नेटवर्क में ऐसे उन्नत उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता था, जो परीक्षा केंद्रों में लगे जैमर की पकड़ से बाहर रहते थे।
एक स्क्रीन बनाने में आता था 40 हजार रुपये का खर्च
लोकेश ने पूछताछ में बताया कि एक मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन तैयार करने में लगभग 40 हजार रुपये का खर्च आता था। इसके अलावा वह हर स्क्रीन के लिए अलग से पांच हजार रुपये की राशि भी वसूल करता था।

एसटीएफ को आशंका है कि इस पूरे नेटवर्क से अब तक करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार किया जा चुका है।
कई गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मामला
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) और भर्ती परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से संबंधित अध्यादेश के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जांच एजेंसियां अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।
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