गाजियाबाद के ग्राम पटला निवासी रजनीश कुमार ने 14 वर्षों की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ आधुनिक मत्स्यपालन को अपना करियर बनाया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के सहयोग से शुरू हुआ उनका सफर आज 50 एकड़ के आधुनिक मत्स्य फार्म, हैचरी, सीड बैंक और 400 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण देने तक पहुंच चुका है। उनकी सफलता आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बन गई है।
दृढ़ इच्छाशक्ति, दूरदृष्टि और निरंतर मेहनत किसी भी व्यक्ति की तकदीर बदल सकती है। गाजियाबाद के ग्राम पटला निवासी श्री रजनीश कुमार ने इस कहावत को अपने जीवन से सच साबित किया है। एक समय बहुराष्ट्रीय कंपनियों में सफल कॉर्पोरेट प्रोफेशनल रहे रजनीश कुमार ने सुरक्षित नौकरी छोड़कर आधुनिक मत्स्यपालन को अपनाया और आज वे प्रदेश के अग्रणी प्रगतिशील मत्स्य उद्यमियों में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उन युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है जो पारंपरिक रोजगार से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि एवं मत्स्य व्यवसाय में अपना भविष्य तलाशना चाहते हैं।
बी.टेक. के बाद 14 वर्षों तक कॉर्पोरेट क्षेत्र में किया कार्य
रजनीश कुमार ने वर्ष 2004 में बी.टेक. की पढ़ाई पूरी करने के बाद लगभग 14 वर्षों तक विभिन्न कॉर्पोरेट कंपनियों में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने तकनीकी और प्रबंधन का व्यापक अनुभव प्राप्त किया। हालांकि नौकरी के दौरान ही उनके मन में स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने और कुछ नया करने की इच्छा लगातार मजबूत होती गई।
उन्होंने महसूस किया कि भारत में मत्स्यपालन के क्षेत्र में मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर है तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से इस क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं। इसी सोच ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

देशभर में सीखी आधुनिक मत्स्यपालन तकनीक
मत्स्य व्यवसाय में उतरने से पहले रजनीश कुमार ने जल्दबाजी नहीं की। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों का भ्रमण कर आधुनिक मत्स्यपालन प्रणालियों का व्यावहारिक अध्ययन किया।
उन्होंने आर.ए.एस. (Recirculatory Aquaculture System), बायोफ्लॉक तकनीक, इन-पॉन्ड रेसवे सिस्टम (IPRS) और केज कल्चर जैसी आधुनिक तकनीकों को गहराई से समझा। इन तकनीकों के अध्ययन के बाद उन्होंने वर्ष 2017 में अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया और पूरी तरह मत्स्यपालन के क्षेत्र में उतर गए।
12 एकड़ से हुई शुरुआत, आज 50 एकड़ तक पहुंचा विस्तार
वर्ष 2018 में रजनीश कुमार ने अपने पैतृक गांव पटला में 12 एकड़ भूमि पर आधुनिक मत्स्यपालन परियोजना की शुरुआत की। शुरुआती दौर आसान नहीं था। तकनीकी चुनौतियां, निवेश और बाजार से जुड़ी समस्याएं सामने आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) का लाभ मिला। वित्तीय वर्ष 2018-19 में इस योजना के अंतर्गत 150 टन वार्षिक उत्पादन क्षमता वाले दो आधुनिक तालाबों का निर्माण कराया गया।
इसके बाद उन्होंने अपने मत्स्य फार्म का लगातार विस्तार किया और आज उनका व्यवसाय लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में फैल चुका है, जहां इंडियन मेजर कार्प (IMC) और पंगेशियस जैसी व्यावसायिक मछलियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है।

हैचरी और सीड बैंक ने बढ़ाई उत्पादन क्षमता
अपने व्यवसाय को आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाने के लिए रजनीश कुमार ने वर्ष 2019 में लगभग 20 लाख बीज उत्पादन क्षमता वाली आधुनिक हैचरी और सीड बैंक की स्थापना की।
इसके बाद वर्ष 2020 में उनकी फर्म का पंजीकरण राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) में हुआ। इससे उन्हें तकनीकी सहयोग और व्यवसाय विस्तार के नए अवसर मिले।
उन्होंने कैटफिश बीज उत्पादन, नर्सरी विकास और जीवित मछलियों के विपणन की आधुनिक व्यवस्था विकसित कर स्थानीय बाजार को भी मजबूत बनाया।
400 से अधिक किसानों और युवाओं को दिया प्रशिक्षण
रजनीश कुमार केवल सफल उद्यमी ही नहीं, बल्कि एक प्रशिक्षक और मार्गदर्शक भी बन चुके हैं।
उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक के बिना मत्स्यपालन में दीर्घकालिक सफलता संभव नहीं है। इसी सोच के साथ उन्होंने किसानों, युवाओं और नए उद्यमियों को प्रशिक्षित करने का अभियान शुरू किया।
अब तक वे 400 से अधिक किसानों, युवाओं और उद्यमियों को आधुनिक मत्स्यपालन तकनीकों का प्रशिक्षण दे चुके हैं। उनके प्रशिक्षण कार्यक्रमों से कई लोगों ने स्वयं का व्यवसाय शुरू किया है।

रजनीश कुमार डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी प्रभावी उपयोग कर रहे हैं।
वे अपने "PVR Aqua" नामक यूट्यूब चैनल के माध्यम से मत्स्यपालन से जुड़ी नई तकनीकों, नवाचार, उत्पादन प्रबंधन और अपने व्यावहारिक अनुभवों को साझा करते हैं।
इस प्लेटफॉर्म के जरिए वे हजारों किसानों और मत्स्यपालन से जुड़े लोगों तक तकनीकी जानकारी पहुंचा रहे हैं।
365 एकड़ तक विस्तार का है लक्ष्य
रजनीश कुमार का सपना अभी यहीं तक सीमित नहीं है।
वे अपने मत्स्य फार्म का विस्तार 365 एकड़ तक करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य प्रतिदिन एक एकड़ क्षेत्र की मछली की हार्वेस्टिंग करना है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में गुणवत्तापूर्ण और ताजी मछली की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
इसके अलावा वे भविष्य में मत्स्य आहार (फीड) उत्पादन इकाई स्थापित करने की भी योजना बना रहे हैं। उनका मानना है कि यदि फीड का स्थानीय उत्पादन होगा तो लागत कम होगी और मत्स्यपालकों को अधिक लाभ मिलेगा।
सरकारी योजनाओं का बेहतर उपयोग बनी सफलता की कुंजी
रजनीश कुमार की सफलता यह दर्शाती है कि यदि केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का सही उपयोग आधुनिक तकनीक, नवाचार और दृढ़ संकल्प के साथ किया जाए, तो कृषि और मत्स्य क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर उद्यम स्थापित किए जा सकते हैं।
उनकी यात्रा आत्मनिर्भर भारत अभियान की भावना को भी मजबूती देती है। वे आज न केवल स्वयं सफल उद्यमी हैं, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित कर अन्य युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बने हुए हैं।
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