नोएडा सेक्टर-104 के गांव हाजीपुर में करीब 7,950 वर्गमीटर जमीन को लेकर तीन साल से चल रहा कानूनी विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। गौतमबुद्धनगर की अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने प्राधिकरण के खिलाफ जारी एकपक्षीय स्थगनादेश को खारिज कर दिया है। प्राधिकरण के अनुसार जमीन वर्ष 2002 में अधिग्रहित की गई थी, जबकि वर्ष 2023 में यहां कथित तौर पर पांच मंजिला कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण शुरू हुआ। अब कानूनी अड़चन हटने के बाद आगे की नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी है।
सेक्टर-104 के गांव हाजीपुर में करीब 7,950 वर्गमीटर जमीन को लेकर चल रही तीन साल पुरानी कानूनी लड़ाई ने अब नया मोड़ ले लिया है। जिस जमीन पर लंबे समय से अदालत के स्थगनादेश के कारण नोएडा प्राधिकरण की कार्रवाई रुकी हुई थी, वहां अब आगे की कार्रवाई का रास्ता खुलता दिखाई दे रहा है।
मामला गांव हाजीपुर के खसरा नंबर-412 से जुड़ा है। नोएडा प्राधिकरण के अनुसार यह जमीन वर्ष 2002 में नियमानुसार अधिग्रहित की गई थी और अधिग्रहण के बाद प्राधिकरण की संपत्ति का हिस्सा बन गई थी। इसके बावजूद वर्ष 2023 में इस जमीन पर कथित तौर पर एक बड़े कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण शुरू कर दिया गया।
अदालत के हालिया फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस पांच मंजिला निर्माण पर जल्द बुलडोजर चलेगा?
2023 में शुरू हुआ निर्माण और फिर अदालत पहुंचा मामला
प्राधिकरण के मुताबिक निश्याम बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड और हिमश्री हिमालय बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड की ओर से वर्ष 2023 में उक्त भूमि पर कॉमर्शियल निर्माण शुरू किया गया था। प्राधिकरण ने इसे अपनी अधिग्रहित भूमि पर किया गया कथित अनधिकृत निर्माण बताते हुए कार्रवाई की कोशिश की।
इसी दौरान संबंधित पक्ष अदालत पहुंच गए। प्राधिकरण के अनुसार 12 अप्रैल 2023 को गौतमबुद्धनगर सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत से प्राधिकरण के विरुद्ध एकपक्षीय स्थगनादेश प्राप्त किया गया। इस आदेश के चलते प्राधिकरण की कार्रवाई पर रोक लग गई और मामला करीब तीन वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया में चलता रहा।
इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने दावे, दस्तावेज और तर्क अदालत के सामने रखे गए।
जमीन खरीदने का भी किया गया दावा
मामले में संबंधित बिल्डरों की ओर से यह दावा किया गया था कि उन्होंने और करीब 15 अन्य लोगों या फर्मों ने वर्ष 2022-23 के दौरान इस जमीन को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट, महर्षि नगर से बैनामे के जरिए खरीदा था।
वहीं, नोएडा प्राधिकरण ने इस दावे का विरोध करते हुए जमीन के अधिग्रहण से जुड़े अपने रिकॉर्ड और दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। प्राधिकरण का कहना था कि भूमि वर्ष 2002 में ही नियमानुसार अधिग्रहित हो चुकी थी।
करीब तीन साल तक चले विवाद के बाद अदालत ने संबंधित पक्षों के दावों को विभिन्न उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के फैसलों के आलोक में निराधार मानते हुए स्थगनादेश को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद प्राधिकरण की ओर से भूमि पर अपना नियंत्रण स्थापित करने और कथित अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने की कानूनी स्थिति मजबूत हुई है।
पांच मंजिला कॉम्प्लेक्स पर अब कार्रवाई की तैयारी
प्राधिकरण के अनुसार अधिग्रहित भूमि पर पांच मंजिला कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया गया है। स्थगनादेश के कारण इतने लंबे समय तक प्राधिकरण इस निर्माण के खिलाफ आगे नहीं बढ़ सका।
अब अदालत से स्थगनादेश हटने के बाद प्राधिकरण के सामने नियमानुसार कार्रवाई करने का रास्ता खुल गया है। हालांकि, आगे की कार्रवाई संबंधित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही होगी।
यानी फिलहाल अदालत के फैसले ने कार्रवाई की कानूनी बाधा को दूर किया है, जबकि मौके पर ध्वस्तीकरण कब और किस प्रक्रिया के तहत होगा, यह प्राधिकरण की अगली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
सीलिंग के दौरान भी हुआ था विवाद
यह मामला पहले भी विवादों में रह चुका है। प्राधिकरण के अनुसार करीब दो वर्ष पहले जब उसकी टीम कथित अवैध कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स को सील करने के लिए मौके पर पहुंची थी, तब वहां मौजूद लोगों ने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर अभद्रता की थी।
प्राधिकरण का आरोप है कि उस दौरान एक व्यक्ति ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर प्राधिकरण कर्मचारियों से लिपटने की कोशिश तक की थी। इस घटना को लेकर पुलिस से शिकायत भी की गई थी।
हालांकि, उस समय न्यायालय से मिले स्थगनादेश के कारण प्राधिकरण की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।
करोड़ों-अरबों की जमीन, इसलिए मामला बेहद अहम
नोएडा के विकसित क्षेत्रों में जमीन की बढ़ती कीमतों के बीच सेक्टर-104 स्थित यह भूमि आर्थिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्राधिकरण का कहना है कि ऐसी अधिग्रहित और मूल्यवान जमीन पर अवैध कब्जे अथवा अनधिकृत निर्माण को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यही वजह है कि प्राधिकरण अब ऐसे पुराने मामलों की समीक्षा कर रहा है, जहां उसकी जमीन अवैध कब्जे, निर्माण या न्यायिक विवादों में लंबे समय से फंसी हुई है।
CEO कृष्णा करुणेश के सख्त निर्देश
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश ने प्राधिकरण की भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने को लेकर संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।
सीईओ के निर्देश के बाद उन मामलों की समीक्षा की जा रही है, जिनमें प्राधिकरण की जमीन लंबे समय से अवैध कब्जे, अनधिकृत निर्माण या न्यायिक विवादों में फंसी है। कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई तेज करने की तैयारी है।
हाजीपुर का मामला इसी अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तीन साल से अदालत में अटका मामला अब स्थगनादेश खारिज होने के बाद नए चरण में पहुंच गया है।
अब निगाह प्राधिकरण की अगली कार्रवाई पर
अदालत के फैसले के बाद अब प्राधिकरण के सामने आगे की प्रक्रिया स्पष्ट है। संबंधित रिकॉर्ड और आदेश के आधार पर प्रशासनिक कार्रवाई पूरी की जाएगी, मौके की स्थिति का सत्यापन होगा और नियमानुसार कथित अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सेक्टर-104 हाजीपुर की 7,950 वर्गमीटर जमीन को लेकर कानूनी अड़चन दूर होना नोएडा प्राधिकरण के लिए निश्चित रूप से बड़ी सफलता है। लेकिन असली परीक्षा अब जमीन पर होगी—क्या वर्षों से खड़ा पांच मंजिला कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स वास्तव में कार्रवाई की जद में आता है और प्राधिकरण कब तक अपनी जमीन पर नियंत्रण स्थापित करता है? आने वाले दिनों में इसी पर सबकी नजर रहेगी।
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