पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्था के नाम पर कथित आर्थिक लेन-देन और चेयरमैन पद दिलाने के आरोपों को लेकर चल रहे विवाद में राहुल द्विवेदी ने अपना पक्ष सामने रखा है। उन्होंने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ किसी तरह का प्रत्यक्ष भुगतान रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज, नियुक्ति पत्र या सरकारी अनुमति का प्रमाण सामने नहीं आया है। वहीं, उपलब्ध समाचार कटिंग में शैलेश गर्ग के खिलाफ शिकायत, जांच और पुलिस कार्रवाई से जुड़े दावे भी सामने आते हैं। ₹40 लाख के कथित ऋण और दो चेक बाउंस का मामला भी इस विवाद का अहम हिस्सा बताया जा रहा है।
एक संस्था, चेयरमैन पद, करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन और लालबत्ती वाली गाड़ी के इस्तेमाल के आरोप… मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। लेकिन अब इस पूरे विवाद में राहुल द्विवेदी ने सामने आकर अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
राहुल द्विवेदी का कहना है कि उन्हें बिना किसी ठोस और प्रत्यक्ष प्रमाण के बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उनका साफ सवाल है—अगर उन्होंने वास्तव में किसी व्यक्ति से चेयरमैन पद दिलाने या किसी सरकारी प्रभाव के नाम पर करोड़ों रुपये लिए हैं, तो उसका प्रमाण कहां है?
उन्होंने कहा कि किसी समाचार में किसी व्यक्ति का नाम आ जाना अपने आप में आरोपों को सत्य साबित नहीं करता। किसी भी आरोप की पुष्टि दस्तावेज, भुगतान रिकॉर्ड और जांच के आधार पर होनी चाहिए।
चेयरमैन पद के नाम पर पैसे लेने के आरोपों से इनकार
हाल में सामने आई समाचार सामग्री में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्था के नाम पर चेयरमैन पद दिलाने के बदले कथित तौर पर करोड़ों रुपये लेने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है।
राहुल द्विवेदी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
उनका कहना है कि उन्होंने किसी व्यक्ति से चेयरमैन अथवा किसी अन्य पद के नाम पर कोई रकम नहीं ली। उनका यह भी दावा है कि यदि उनके खिलाफ आर्थिक लेन-देन के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो आरोप लगाने वालों को उसके समर्थन में ठोस दस्तावेज सामने रखने चाहिए।
राहुल द्विवेदी ने भुगतान की रसीद, बैंक ट्रांजेक्शन, नियुक्ति पत्र, सरकारी अनुमति अथवा किसी आधिकारिक दस्तावेज को प्रमाण के तौर पर सामने रखने की मांग की है।
लालबत्ती वाली गाड़ी के आरोप पर भी सफाई
विवाद में एक आरोप कथित तौर पर लालबत्ती वाली गाड़ी के इस्तेमाल से जुड़ा है।
राहुल द्विवेदी का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने कभी लालबत्ती वाली गाड़ी का इस्तेमाल नहीं किया।
उनका कहना है कि यदि ऐसा कोई दावा किया जा रहा है तो उसके समर्थन में वाहन का आधिकारिक रिकॉर्ड, अनुमति, रजिस्ट्रेशन अथवा अन्य प्रमाण सामने आना चाहिए।
उनके मुताबिक बिना किसी आधिकारिक रिकॉर्ड के इस तरह के आरोप लगाकर किसी व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।
समाचार कटिंग में शैलेश गर्ग से जुड़े मामले का भी जिक्र
इस पूरे विवाद में उपलब्ध विभिन्न समाचार-पत्रों की कटिंग में शैलेश गर्ग के खिलाफ शिकायत, जांच और पुलिस कार्रवाई/गिरफ्तारी से संबंधित खबरों का भी उल्लेख बताया गया है।
इन समाचारों में कथित तौर पर पद दिलाने, सरकारी कार्यालयों से जुड़ा होने का दावा करने और लोगों से रकम लेने जैसे आरोपों का जिक्र किया गया है।
हालांकि, इन आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
राहुल द्विवेदी की ओर से कहा गया है कि भरत शर्मा और शैलेश गर्ग के बीच कथित व्यावसायिक या संगठनात्मक संबंधों तथा उनके द्वारा संचालित बताए जा रहे संगठन से जुड़े मामलों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत, आरोप या समाचार रिपोर्ट अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करती। अंतिम जिम्मेदारी संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायालय की प्रक्रिया पर निर्भर करती है।
₹40 लाख का कथित ऋण बना विवाद का अहम हिस्सा
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है—₹40 लाख के कथित ऋण और चेक बाउंस का मामला।
राहुल द्विवेदी की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस के अनुसार, भरत शर्मा ने कथित तौर पर राहुल द्विवेदी से ₹40 लाख उधार लिए थे।
नोटिस के मुताबिक इस राशि की वापसी के लिए दो चेक दिए गए थे। दोनों चेक ₹20-₹20 लाख के बताए गए हैं।
राहुल द्विवेदी के अनुसार जब ये चेक बैंक में प्रस्तुत किए गए तो पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण दोनों चेक वापस हो गए।
यही दस्तावेज अब राहुल द्विवेदी की ओर से अपने बचाव में प्रमुख आधार के तौर पर बताए जा रहे हैं।
उनका तर्क है कि एक तरफ उन पर करोड़ों रुपये के लेन-देन का आरोप लगाया जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ उनके पास मौजूद कानूनी दस्तावेज कथित तौर पर यह बताते हैं कि उन्होंने स्वयं ₹40 लाख की राशि उधार दी थी।
‘मेरे खिलाफ प्रत्यक्ष प्रमाण कहां हैं?’
राहुल द्विवेदी ने पूरे विवाद को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठाया है कि आखिर उनके खिलाफ प्रत्यक्ष प्रमाण कहां हैं।
उनका कहना है कि न तो उनके द्वारा किसी व्यक्ति को पद बेचने का प्रमाण सामने आया है, न लालबत्ती वाली गाड़ी इस्तेमाल करने का और न ही कथित करोड़ों रुपये लेने का कोई प्रत्यक्ष भुगतान रिकॉर्ड।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने उनके नाम, पद या संस्था का गलत इस्तेमाल किया है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उनके मुताबिक जांच में यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
निष्पक्ष जांच के लिए तैयार होने का दावा
राहुल द्विवेदी ने कहा है कि वह किसी भी निष्पक्ष जांच से पीछे नहीं हट रहे हैं। उनका दावा है कि वह अपने पक्ष में उपलब्ध दस्तावेज जांच एजेंसी अथवा संबंधित प्राधिकरण के सामने रखने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्तिगत विवाद को उनके सामाजिक जीवन और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
फिलहाल उपलब्ध समाचार कटिंग, कानूनी नोटिस में बताए गए तथ्यों और राहुल द्विवेदी के पक्ष को देखते हुए मामला आरोप और प्रत्यारोप के बीच उलझा हुआ है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जांच में कौन से दस्तावेज सामने आते हैं और कथित आर्थिक लेन-देन, पद दिलाने तथा वाहन के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की वास्तविकता क्या निकलती है।
जब तक जांच या न्यायिक प्रक्रिया से कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आता, तब तक किसी भी पक्ष के आरोप को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
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