डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 73वें बलिदान दिवस पर दिल्ली भाजपा ने दिल्ली गेट स्थित स्मृति स्थल पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया। भाजपा के राष्ट्रीय संगठक वी. सतीश, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए भारतीय एकता, राष्ट्रवाद, आत्मनिर्भरता और जनसंघ से भाजपा तक की वैचारिक यात्रा पर प्रकाश डाला।
भारतीय राजनीति और राष्ट्रवाद की विचारधारा में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम आज भी उतनी ही मजबूती से लिया जाता है, जितना उनके जीवनकाल में लिया जाता था। उनके 73वें बलिदान दिवस पर दिल्ली भाजपा द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम केवल एक स्मरण समारोह नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रवाद, भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक विचारधारा पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण वैचारिक आयोजन के रूप में सामने आया।
दिल्ली गेट के निकट स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मृति स्थल पर मंगलवार सुबह आयोजित कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय संगठक एवं वरिष्ठ नेता वी. सतीश, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा तथा प्रदेश संगठन महामंत्री पवन राणा सहित अनेक वरिष्ठ नेताओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर स्मृति स्थल पर वृक्षारोपण भी किया गया।
कार्यक्रम का संचालन प्रदेश महामंत्री विष्णु मित्तल ने किया। श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, सांसद मनोज तिवारी, योगेन्द्र चांदोलिया, बांसुरी स्वराज, स्वाति मालीवाल और गजेन्द्र पटेल, दिल्ली सरकार के मंत्री डॉ. पंकज सिंह एवं रविन्द्र इंद्राज सिंह, दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष सतीश उपाध्याय, दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल सहित कई वरिष्ठ नेता, विधायक, पार्षद और संगठन पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

भाजपा के राष्ट्रीय संगठक वी. सतीश ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि मुखर्जी ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और जम्मू-कश्मीर में "एक देश, एक विधान, एक निशान और एक प्रधान" के संकल्प को लेकर संघर्ष किया।
वी. सतीश ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक एक विशेष राजनीतिक विचारधारा के प्रभाव में डॉ. मुखर्जी जैसे राष्ट्रनायकों को वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे वास्तविक अधिकारी थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी विचारधारा से प्रभावित इतिहास लेखन और तत्कालीन कांग्रेस राजनीति ने राष्ट्रवादी नेताओं के योगदान को सीमित करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और डॉ. भीमराव अंबेडकर दोनों ने अलग-अलग कारणों से पंडित जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। उनके अनुसार उस समय की राजनीतिक मानसिकता भारतीय संस्कृति और सभ्यता के मूल तत्वों को समझने में विफल रही, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय इतिहास के कई महत्वपूर्ण पक्षों को विकृत रूप में प्रस्तुत किया गया।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन उस पुण्य आत्मा को याद करने का दिन है, जिसने भारतीय जनसंघ के रूप में एक बीज बोया था और आज वही बीज भारतीय जनता पार्टी के रूप में पूरे देश को छाया प्रदान कर रहा है।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्र प्रथम की भावना का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने सत्ता और पद से अधिक राष्ट्रहित को महत्व दिया। मंत्री पद छोड़ने का उनका निर्णय इस बात का प्रमाण है कि वे अपने सिद्धांतों और विचारों से कभी समझौता नहीं करते थे।
रेखा गुप्ता ने कहा कि आज पूरे देश में राष्ट्र प्रथम की जो भावना दिखाई देती है, उसकी वैचारिक नींव रखने वालों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि देशहित में उनके संदेशों और विचारों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने "एक राष्ट्र, एक विधान और एक संविधान" का विचार देश के सामने रखा था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर उनके उस सपने को साकार किया। उन्होंने इसे डॉ. मुखर्जी को दी गई सच्ची श्रद्धांजलि बताया।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी हमेशा राष्ट्र प्रथम की सोच के साथ कार्य करते रहे। उन्होंने भारत को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर उस समय जोर दिया था, जब यह विचार मुख्यधारा की राजनीति में प्रमुख नहीं था।
उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को लेकर निरंतर कार्य कर रहे हैं और यह डॉ. मुखर्जी के विचारों की ही निरंतरता है।
हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का व्यक्तित्व केवल प्रशासनिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं था। उन्होंने सिद्धांतों के लिए सत्ता तक का त्याग किया। नेहरू-लियाकत समझौते के विरोध में मंत्री पद से इस्तीफा देना इसका प्रमुख उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना कर राष्ट्रवाद की नई धारा को जन्म दिया।
जम्मू-कश्मीर में अलग व्यवस्था और परमिट प्रणाली के विरोध में उन्होंने बड़ा आंदोलन खड़ा किया। बिना परमिट जम्मू-कश्मीर जाने के प्रयास के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और बाद में रहस्यमयी परिस्थितियों में उनका निधन हो गया।

अपने संबोधन में हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि शिक्षाविद, उद्योग समर्थक और दूरदर्शी राष्ट्रनिर्माता भी थे।
उन्होंने शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का माध्यम बनाया, उद्योगों को आत्मनिर्भरता का आधार माना और राजनीति को राष्ट्रसेवा का साधन समझा। उन्होंने संविधान की गरिमा को सर्वोच्च स्थान दिया तथा राष्ट्रीय एकता को भारत की सबसे बड़ी शक्ति माना।
कार्यक्रम के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्मृति स्थल पर वृक्षारोपण भी किया। भाजपा नेताओं ने इसे डॉ. मुखर्जी के प्रति श्रद्धांजलि के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए सकारात्मक संदेश देने वाला कदम बताया।
73वें बलिदान दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों, उनके संघर्षों और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी बना। कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय एकता और आत्मनिर्भर भारत का जो विचार आज देश की राजनीति में प्रमुख स्थान रखता है, उसकी जड़ें डॉ. मुखर्जी की वैचारिक विरासत में गहराई से समाहित हैं।
COMMENTS