Friday, April 03, 2026

AAP में बड़ा झटका! राघव चड्ढा से छीना राज्यसभा उपनेता पद, बोलने पर भी लगी पाबंदी?

पार्टी लाइन से अलग रुख पड़ा भारी? अशोक मित्तल को मिली कमान, चड्ढा की भूमिका पर उठे सवाल

New Delhi , Latest Updated On - Apr 02 2026 | 15:43:00 PM
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आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को जिम्मेदारी दी है, साथ ही उनके सदन में बोलने पर भी नियंत्रण की बात सामने आई है।

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आम आदमी पार्टी (AAP) में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां पार्टी ने अपने प्रमुख नेताओं में से एक राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता (डिप्टी लीडर) के पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस फैसले के साथ ही एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है—पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को नोटिस देकर यह भी कहा है कि राघव चड्ढा को सदन में पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर बोलने का अवसर न दिया जाए। इससे यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी ने न केवल उनका पद छीना है, बल्कि उनकी संसदीय भूमिका को भी सीमित करने की दिशा में कदम उठाया है।

बोलने के समय पर भी असर?

सूत्रों के अनुसार, अब राघव चड्ढा को राज्यसभा में मिलने वाले समय में भी कटौती की जा सकती है। यानी सदन में उनकी सक्रियता और प्रभाव को सीमित करने की कोशिश की जा रही है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब राघव चड्ढा संसद में लगातार आम जनता से जुड़े मुद्दों को जोर-शोर से उठा रहे थे।

जनता से जुड़े मुद्दे उठाते रहे चड्ढा

पिछले कुछ समय में राघव चड्ढा ने कई ऐसे मुद्दे संसद में उठाए, जो सीधे आम लोगों की जिंदगी से जुड़े हैं।


  • एयरपोर्ट पर महंगी चाय (10 रुपये का मुद्दा)
  • डिलीवरी बॉयज के कामकाजी हालात
  • बैंक खातों पर न्यूनतम बैलेंस न रखने पर जुर्माना
  • पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाने की मांग

इन मुद्दों के जरिए उन्होंने खुद को एक सक्रिय और जनहित के नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश की।

क्या अनुशासनहीनता बनी वजह?

सूत्रों की मानें तो पार्टी नेतृत्व राघव चड्ढा के कामकाज के तरीके से पूरी तरह संतुष्ट नहीं था। आरोप है कि वे कई बार पार्टी से चर्चा किए बिना ही संसद में मुद्दे उठाते थे।

इतना ही नहीं, वे किन विषयों पर बोलने वाले हैं, इसकी जानकारी भी पार्टी को पहले से नहीं देते थे। इसको लेकर पार्टी की ओर से उन्हें पहले चेतावनी भी दी गई थी।

हालांकि, आम आदमी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर अभी तक इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की है, लेकिन अंदरखाने में इसे “अनुशासन” और “पार्टी लाइन” से जोड़कर देखा जा रहा है।

पहले से चल रही थीं अटकलें

राजनीतिक गलियारों में काफी समय से यह चर्चा थी कि राघव चड्ढा पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग रुख अपनाते हैं।

हाल ही में जब अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को कथित शराब मामले में राहत मिली, तब भी राघव चड्ढा की चुप्पी ने कई सवाल खड़े किए।

उन्होंने न तो सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया दी और न ही किसी तरह का समर्थन जताया, जिससे पार्टी के भीतर असहजता बढ़ने की बात सामने आई।


अशोक मित्तल को मिली नई जिम्मेदारी

अब पार्टी ने राज्यसभा में अपनी रणनीति को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अशोक मित्तल को सौंपी है। उन्हें एक संतुलित और संगठन के साथ तालमेल रखने वाले नेता के तौर पर देखा जा रहा है।

उनकी नियुक्ति से यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी अब सदन के भीतर अधिक नियंत्रित और संगठित रणनीति अपनाना चाहती है।

क्या है राजनीतिक संदेश?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ एक पद परिवर्तन नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर अनुशासन और नियंत्रण को मजबूत करने का संकेत है।

यह कदम अन्य नेताओं के लिए भी एक संदेश हो सकता है कि पार्टी लाइन से हटकर काम करना स्वीकार्य नहीं होगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि—

  • क्या राघव चड्ढा की भूमिका भविष्य में और सीमित होगी?
  • क्या यह कदम पार्टी के अंदर बड़े बदलाव की शुरुआत है?
  • और क्या राघव चड्ढा इस स्थिति से उबरकर फिर से अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत कर पाएंगे?

आम आदमी पार्टी का यह फैसला न केवल राघव चड्ढा के राजनीतिक करियर के लिए अहम मोड़ साबित हो सकता है, बल्कि यह पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों की भी झलक देता है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले समय में पार्टी और राघव चड्ढा के रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

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