अमेरिका-ईरान सीजफायर पर भारत का पहला बयान सामने आया। विदेश मंत्रालय ने शांति की उम्मीद जताई, वहीं केंद्र सरकार ने LPG संकट से निपटने के लिए नया फॉर्मूला लागू किया।
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय तक चले तनाव और युद्ध के बाद घोषित सीजफायर पर भारत सरकार की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आ गई है।
विदेश मंत्रालय ने बुधवार, 8 अप्रैल 2026 को बयान जारी करते हुए इस सीजफायर का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी।
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान किया था।
भारत का स्पष्ट रुख—बातचीत ही समाधान
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत शुरू से ही इस पूरे संघर्ष को समाप्त करने के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करता रहा है।
मंत्रालय ने कहा, “हम पहले भी लगातार कहते रहे हैं कि मौजूदा संघर्ष को जल्द समाप्त करने के लिए जरूरी है कि तनाव कम किया जाए और शांति स्थापित करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयास किए जाएं।”
भारत ने इस बयान के जरिए एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि वह वैश्विक विवादों में युद्ध के बजाय शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता देता है।

युद्ध के वैश्विक प्रभाव पर चिंता
विदेश मंत्रालय ने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच एक महीने से अधिक समय तक चली इस जंग के गंभीर परिणामों पर भी चिंता जताई।
मंत्रालय के अनुसार, इस संघर्ष के चलते वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक नेटवर्क बाधित हुए, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
भारत ने खास तौर पर उम्मीद जताई कि अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार का प्रवाह सामान्य हो सकेगा।
LPG संकट पर केंद्र का बड़ा फैसला
सीजफायर के तुरंत बाद भारत सरकार ने घरेलू स्तर पर एक बड़ा कदम उठाते हुए LPG संकट से निपटने के लिए नया फॉर्मूला तैयार किया है।
जंग के दौरान तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से देश में LPG की किल्लत बढ़ गई थी। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने इंडस्ट्रियल सेक्टर को राहत देने के लिए नई नीति लागू की है।
इंडस्ट्री को राहत—बल्क LPG सप्लाई
सरकार ने फार्मा, स्टील, फूड, पॉलीमर, एग्रीकल्चर, पैकेजिंग, पेंट, मेटल, केरेमिक, फाउंड्री, फोर्जिंग और ग्लास जैसे सेक्टर्स को बल्क में LPG देने का निर्णय लिया है।
हालांकि, इन इंडस्ट्रीज को मार्च 2026 से पहले की उनकी कुल खपत का केवल 70% LPG ही उपलब्ध कराया जाएगा।

सप्लाई लिमिट और प्राथमिकता
सरकार ने पूरे इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए LPG सप्लाई की अधिकतम सीमा 0.2 TMT प्रति दिन तय की है।
इस नीति के तहत उन उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां LPG का उपयोग अनिवार्य है और उसकी जगह नैचुरल गैस का इस्तेमाल संभव नहीं है।
रजिस्ट्रेशन और PNG की शर्त
नई व्यवस्था के अनुसार, इंडस्ट्रीज को LPG सप्लाई पाने के लिए तेल कंपनियों (OMCs) के साथ रजिस्ट्रेशन करना होगा।
साथ ही, उन्हें PNG (पाइप्ड नैचुरल गैस) कनेक्शन के लिए CGD कंपनियों में आवेदन देना होगा।
हालांकि, जहां LPG मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है और उसे गैस से बदला नहीं जा सकता, वहां इस शर्त से छूट दी गई है।
राज्यों को 10% अतिरिक्त कोटा
सरकार ने राज्यों के लिए भी एक प्रोत्साहन योजना लागू की है।
जो राज्य PNG इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देंगे, उन्हें LPG आवंटन में 10% अतिरिक्त कोटा दिया जाएगा।
इससे राज्यों को गैस नेटवर्क मजबूत करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और दीर्घकाल में ऊर्जा संकट कम होगा।

राज्यों को तीन अहम निर्देश
केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को तीन महत्वपूर्ण कदम उठाने के निर्देश दिए हैं—
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Natural Gas and Petroleum Products Distribution Order 2026 को सभी संबंधित विभागों तक पहुंचाना
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10% रिफॉर्म-लिंक्ड LPG आवंटन का जल्द लाभ उठाना
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CBG (Compressed Biogas) से संबंधित राज्य नीति को जल्द लागू करना
संतुलित रणनीति—वैश्विक और घरेलू दोनों मोर्चों पर
भारत सरकार का यह कदम एक संतुलित रणनीति को दर्शाता है, जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और स्थिरता का समर्थन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू स्तर पर ऊर्जा संकट से निपटने के लिए ठोस उपाय किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति न केवल मौजूदा संकट को कम करने में मदद करेगी, बल्कि भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति को अधिक स्थिर और सुरक्षित बनाएगी।
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