भारत में शहरी प्रशासन और नगर निकायों की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में IIPA और ICAI के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। यह साझेदारी नगर निकायों में पारदर्शी लेखांकन, वित्तीय प्रबंधन, प्रशिक्षण, शोध और तकनीकी सहयोग के जरिए शहरी शासन को नई दिशा देगी।
तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते भारत में नगर निकायों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (IIPA) के सेंटर फॉर अर्बन स्टडीज़ (CUS) और इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस साझेदारी का उद्देश्य देशभर के नगर निकायों (Urban Local Bodies) में लेखांकन प्रणाली, वित्तीय प्रबंधन, प्रशिक्षण, शोध, तकनीकी सहयोग और संस्थागत क्षमता निर्माण को मजबूत करना है ताकि स्थानीय प्रशासन अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बन सके।
'नगर निकायों का लेखांकन अब सिर्फ हिसाब-किताब नहीं'
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की अगली पीढ़ी के प्रशासनिक सुधार डेटा आधारित निर्णय, पेशेवर क्षमता निर्माण और मजबूत वित्तीय प्रबंधन पर आधारित होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि नगर निकायों का लेखांकन अब केवल आय-व्यय का रिकॉर्ड रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारदर्शी, तकनीक संचालित और नागरिक-केंद्रित शहरी प्रशासन की बुनियाद बन चुका है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मजबूत संस्थागत व्यवस्था और विशेषज्ञता से लैस स्थानीय निकाय ही तेजी से बढ़ते शहरी भारत की जरूरतों को पूरा कर पाएंगे।

IIPA और ICAI की विशेषज्ञता का होगा संगम
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस साझेदारी को स्थानीय शासन सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।
उन्होंने कहा कि IIPA वर्षों से सार्वजनिक प्रशासन, नीति अनुसंधान और प्रशासनिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान रहा है। वहीं ICAI विश्व के सबसे बड़े पेशेवर लेखांकन संस्थानों में शामिल है और वित्तीय प्रबंधन, ऑडिट तथा सार्वजनिक वित्त के क्षेत्र में उसकी विशेषज्ञता स्थापित है।
उन्होंने कहा कि दोनों संस्थानों की संयुक्त विशेषज्ञता नगर निकायों के लिए मजबूत संस्थागत प्लेटफॉर्म तैयार करेगी।
क्या-क्या होगा इस MoU के तहत?
तीन वर्षों के लिए लागू इस समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित की जाएंगी—
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नगर निकायों की वित्तीय व्यवस्था पर संयुक्त शोध।
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नीति विश्लेषण, सर्वेक्षण और अध्ययन।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार और वेबिनार।
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नगर निकाय अधिकारियों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करना।
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नगर निकायों की लेखांकन प्रणाली को मजबूत करने हेतु तकनीकी सहायता।
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राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय श्रेष्ठ प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान।
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सार्वजनिक वित्तीय जवाबदेही बढ़ाने के लिए ज्ञान संसाधनों का विकास।
देशभर में पहुंचेगा प्रशिक्षण अभियान
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि IIPA और ICAI दोनों का देशभर में व्यापक नेटवर्क है। इसका लाभ यह होगा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि छोटे और मध्यम नगर निकायों तक भी पहुंचेंगे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह साझेदारी केवल MoU तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में नए शोध, नई तकनीक और बेहतर प्रशासनिक मॉडल विकसित करने का माध्यम बनेगी।

स्थानीय निकायों की वित्तीय पारदर्शिता होगी मजबूत
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने कहा कि नगर निकायों में बेहतर वित्तीय प्रबंधन से विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव होगा।
इस पहल के माध्यम से—
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बजट प्रबंधन बेहतर होगा।
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खर्चों की निगरानी मजबूत होगी।
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नागरिकों के प्रति जवाबदेही बढ़ेगी।
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सार्वजनिक धन का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित होगा।
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डिजिटल वित्तीय प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा।
पहले भी हो चुका है बड़ा राष्ट्रीय सम्मेलन
यह साझेदारी इसी वर्ष आयोजित 16वें वित्त आयोग और स्थानीय सार्वजनिक वित्त पर राष्ट्रीय सम्मेलन की सफलता के बाद आगे बढ़ाई गई है।
उस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण संस्थानों ने भाग लिया था, जिनमें—
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नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
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नीति आयोग
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आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय
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पंचायती राज मंत्रालय
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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स
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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी
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विभिन्न नगर निकाय
सम्मेलन में स्थानीय वित्तीय सुधारों पर विस्तृत चर्चा हुई थी, जिसने इस नई साझेदारी की नींव रखी।

हरियाणा बनेगा मॉडल राज्य
1966 में स्थापित IIPA का सेंटर फॉर अर्बन स्टडीज़ वर्तमान में छह राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में कार्य कर रहा है।
केंद्र ने बताया कि हरियाणा सरकार के साथ राज्य के सभी 87 नगर निकायों में लेखांकन सुधार लागू करने पर चर्चा शुरू हो चुकी है। यदि यह मॉडल सफल होता है तो इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा।
Training of Trainers मॉडल पर होगा काम
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि केवल प्रशिक्षण देना पर्याप्त नहीं होगा।
इसलिए Training of Trainers (ToT) मॉडल अपनाया जाएगा, जिसके तहत प्रशिक्षित अधिकारी आगे अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे। इससे पूरे देश में क्षमता निर्माण का व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा।
राष्ट्रीय नगर लेखांकन मैनुअल में भी होगा सुधार
इस साझेदारी के माध्यम से National Municipal Accounting Manual (NMAM) के संशोधन कार्य में भी सहयोग दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक लेखांकन मानकों, डिजिटल तकनीक और जमीनी अनुभवों को शामिल कर नगर निकायों की वित्तीय व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बनाया जा सकेगा।
कौन-कौन रहा मौजूद?
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें—
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डॉ. सुरेंद्रकुमार बागड़े (महानिदेशक, IIPA)
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सीए प्रसन्न कुमार डी (अध्यक्ष, ICAI)
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सीए हंसराज चुघ (PGFMC, ICAI)
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प्रो. वी.एन. आलोक (समन्वयक, सेंटर फॉर अर्बन स्टडीज़)
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IIPA के वरिष्ठ संकाय सदस्य
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ICAI के पदाधिकारी
सरकार का बड़ा संदेश
अपने संबोधन के अंत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह साझेदारी केवल एक प्रशासनिक समझौता नहीं, बल्कि भारत के शहरी भविष्य को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक वित्तीय प्रणाली, बेहतर संस्थागत क्षमता और वैश्विक स्तर के लेखांकन मानकों के माध्यम से नगर निकायों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और अंततः इसका सबसे बड़ा लाभ देश के नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और जीवन की गुणवत्ता के रूप में मिलेगा।
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