ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए परिवहन विभाग ने विशेष प्रवर्तन अभियान चलाते हुए मॉडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न का उपयोग करने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। 21 से 27 जुलाई 2026 तक चले अभियान में 44 वाहनों पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। साथ ही मॉडिफाइड साइलेंसर बेचने वाले गैराज और दुकानों का भी औचक निरीक्षण किया गया।
सड़कों पर तेज आवाज करने वाले मॉडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न लगाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण और आम नागरिकों को अनावश्यक शोर से राहत दिलाने के उद्देश्य से सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) के नेतृत्व में विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया गया।
परिवहन विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 21 जुलाई 2026 से 27 जुलाई 2026 तक जिले के विभिन्न स्थानों पर सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
44 वाहनों पर हुई कार्रवाई
एक सप्ताह तक चले इस विशेष अभियान में कुल 44 वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।
इनमें—
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26 वाहन ऐसे पाए गए जिनमें अनधिकृत मॉडिफाइड साइलेंसर लगे हुए थे।
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18 वाहन ऐसे मिले जिनमें प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल किया जा रहा था।
सभी मामलों में मोटर वाहन अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्रवाई की गई।

क्यों खतरनाक हैं मॉडिफाइड साइलेंसर?
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कुछ वाहन स्वामी अपने वाहनों में अनधिकृत रूप से मॉडिफाइड साइलेंसर लगाकर अत्यधिक तेज आवाज उत्पन्न करते हैं। इससे न केवल ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि सार्वजनिक जीवन भी प्रभावित होता है।
अधिकारियों के अनुसार इस तरह की तेज आवाज से—
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आम नागरिकों को असुविधा होती है।
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स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
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अस्पतालों के आसपास मरीजों को परेशानी होती है।
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वृद्धजन और छोटे बच्चों को मानसिक एवं शारीरिक असुविधा का सामना करना पड़ता है।
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सड़क सुरक्षा भी प्रभावित होती है क्योंकि तेज आवाज कई बार वाहन चालकों का ध्यान भटका सकती है।
दुकानों और गैराजों पर भी प्रशासन की नजर
अभियान केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहा। परिवहन विभाग की टीम ने मॉडिफाइड साइलेंसर बेचने और लगाने वाले दुकानों तथा गैराजों का भी औचक निरीक्षण किया।
इस निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान अनधिकृत रूप से ऐसे साइलेंसर की बिक्री या फिटिंग न करे, जो ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करते हों।

परिवहन विभाग ने दी कड़ी चेतावनी
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वाहनों में किसी भी प्रकार का अनधिकृत संशोधन और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले उपकरणों का उपयोग किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विभाग का कहना है कि आने वाले समय में भी ऐसे विशेष अभियान नियमित रूप से जारी रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
वाहन चालकों से की गई अपील
परिवहन विभाग ने सभी वाहन स्वामियों और चालकों से अपील की है कि—
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अपने वाहनों में केवल मानक (स्टैंडर्ड) और अनुमोदित साइलेंसर का ही उपयोग करें।
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प्रेशर हॉर्न या अत्यधिक ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरणों का प्रयोग न करें।
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मोटर वाहन अधिनियम और पर्यावरणीय मानकों का पालन करें।
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सुरक्षित, शांत और प्रदूषण मुक्त यातायात व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
ध्वनि प्रदूषण क्यों है गंभीर समस्या?
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार तेज ध्वनि के संपर्क में रहने से मानसिक तनाव, नींद में बाधा, सुनने की क्षमता पर प्रभाव और उच्च रक्तचाप जैसी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

यही कारण है कि न्यायालयों और सरकार द्वारा समय-समय पर ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सख्त निर्देश जारी किए जाते रहे हैं।
परिवहन विभाग का यह अभियान न केवल यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
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21 से 27 जुलाई 2026 तक चला विशेष प्रवर्तन अभियान।
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ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए परिवहन विभाग की कार्रवाई।
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26 मॉडिफाइड साइलेंसर लगे वाहनों पर कार्रवाई।
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18 प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल करने वाले वाहनों पर कार्रवाई।
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कुल 44 वाहनों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई।
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मॉडिफाइड साइलेंसर बेचने वाले दुकानों और गैराजों का औचक निरीक्षण।
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भविष्य में भी नियमित अभियान चलाने की घोषणा।
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वाहन चालकों से केवल मानक साइलेंसर के उपयोग की अपील।
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