Wednesday, August 05, 2026

अब UPI से भुगतान करना पड़ेगा महंगा....₹2000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर लग सकता है चार्ज

सरकार 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.25 प्रतिशत से 0.40 प्रतिशत तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने पर विचार कर रही है। हालांकि, आम लोगों के बीच होने वाले व्यक्तिगत लेन-देन को इस दायरे से बाहर रखा जा सकता है।

noida , Latest Updated On - Aug 05 2026 | 12:10:00 PM
विज्ञापन

देश में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुके यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ सकता है। सरकार 2,000 रुपये से अधिक के कारोबारी लेन-देन पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है। अगर ऐसा होता है तो बड़े भुगतान करने वाले व्यापारियों और कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

विज्ञापन

भारत में पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक, हर कोई यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार कर रहा है। लेकिन अब यूपीआई को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ सकता है, जिसने करोड़ों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

सरकार 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाने पर विचार कर रही है। अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है तो बड़े कारोबारियों को अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना पड़ सकता है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के खाते में होने वाले सामान्य यूपीआई लेन-देन पर किसी भी तरह का शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

संसद में पेश हुआ अहम विधेयक

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में "टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल" पेश किया। इस विधेयक में बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं पर लागू उस रोक को हटाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके तहत कुछ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों पर एमडीआर नहीं लगाया जा सकता था।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, फिलहाल इस प्रस्ताव को लागू करने की कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है। हालांकि, इससे जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

क्या होता है एमडीआर?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वह शुल्क होता है, जिसे बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता किसी डिजिटल भुगतान को संसाधित करने के लिए लेते हैं। अभी तक यूपीआई भुगतान पर इस तरह का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।

हालांकि, डेबिट और क्रेडिट कार्ड के जरिए होने वाले लेन-देन पर पहले से ही एमडीआर लागू है। ऐसे में सरकार अब यूपीआई के लिए भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।

किन लेन-देन पर नहीं पड़ेगा असर?

सरकार का कहना है कि छोटे और दैनिक उपयोग वाले भुगतान पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

दूध, सब्जी, किराने का सामान, दवा, चाय की दुकान, ऑटो और टैक्सी जैसे छोटे भुगतान पहले की तरह ही चलते रहेंगे। इसका कारण यह है कि ऐसे अधिकांश लेन-देन 2,000 रुपये से कम राशि के होते हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह सीमा कुल यूपीआई लेन-देन के केवल पांच प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करेगी। हालांकि, मूल्य के आधार पर इन लेन-देन की हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत है।

जुलाई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा यूपीआई

यूपीआई का बढ़ता दायरा इस बात से समझा जा सकता है कि जुलाई महीने में लगभग 23.7 अरब लेन-देन दर्ज किए गए। इनकी कुल राशि करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये रही।

डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत ने दुनिया के कई बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है। ऐसे में सरकार भी इस व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है।

क्या ग्राहकों पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एमडीआर लागू भी किया जाता है तो सभी व्यापारी यह अतिरिक्त शुल्क ग्राहकों से नहीं वसूलेंगे। इसके अलावा, सरकार कुल शुल्क पर एक अधिकतम सीमा भी तय कर सकती है, ताकि ग्राहकों और कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का कहना है कि यूपीआई भुगतान प्रणाली में क्रेडिट कार्ड की तरह किसी प्रकार की फंडिंग लागत शामिल नहीं होती है। इसलिए शुल्क की एक अधिकतम सीमा तय करना एक संतुलित कदम हो सकता है।

अभी कार्ड भुगतान पर कितना शुल्क लगता है?

फिलहाल क्रेडिट कार्ड के जरिए भुगतान करने पर तीन प्रतिशत तक एमडीआर लिया जाता है। वहीं, डेबिट कार्ड के मामले में 20 लाख रुपये तक के लेन-देन पर अधिकतम 0.40 प्रतिशत और उससे अधिक राशि पर लगभग 0.90 प्रतिशत तक शुल्क लिया जाता है।

यही वजह है कि अब सरकार यूपीआई भुगतान के लिए भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने पर विचार कर रही है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सरकार ने इस प्रस्ताव को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। लेकिन अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली में यह अब तक का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यूपीआई, जिसने करोड़ों लोगों के जीवन को आसान बनाया है, आने वाले दिनों में कुछ महंगा हो जाएगा या फिर सरकार आम लोगों को राहत देते हुए कोई बीच का रास्ता निकालेगी। आने वाले दिनों में इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

विज्ञापन

UPI, डिजिटल भुगतान, यूपीआई चार्ज, एमडीआर, निर्मला सीतारमण, भारतीय रिजर्व बैंक, डिजिटल इंडिया, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, मर्चेंट पेमेंट, वित्त मंत्रालय

Related News

विज्ञापन

Newsletter

For newsletter subscribe us

विज्ञापन
आपकी राय
भारत क्रिकेट टीम के सर्वश्रेष्ठ कप्तान का नाम कौन है?




COMMENTS
All Comments (11)
  • V
    vijaykumar
    vijaykumar@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    Lorem ipsum, dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Earum autem perferendis ad libero at cumque ipsa labore consequatur inventore eaque
    A
    arif
    arif@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    Lorem ipsum, dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Earum autem perferendis ad libero at cumque ipsa labore consequatur inventore eaque
    A
    ajaykumar
    ajaykumar@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    Lorem ipsum, dolor sit amet consectetur adipisicing elit. Earum autem perferendis ad libero at cumque ipsa labore consequatur inventore eaque
    H
    harshit
    harshit@pearlorganisation.com
    25/12/2023
    very intresting news
    A
    ankitankit
    ankitankit@pearlorganisation.com
    27/12/2023
    Good
    H
    harshit
    harshit@pearlorganisation.com
    29/12/2023
    good news
    R
    rahul+11
    rahul+11@pearlorganisation.com
    15/01/2024
    Nice
    R
    rahul+11
    rahul+11@pearlorganisation.com
    15/01/2024
    Bisarkh police station, during checking at Char Murti intersection, spotted an FZ MOSA carrying two persons towards Surajpur.
    R
    rahul
    rahul@pearlorganisation.com
    02/02/2024
    test
    H
    harshit
    harshit@pearlorganisation.com
    02/02/2024
    अच्छा
    R
    rahul
    rahul@pearlorganisation.com
    08/02/2024
    अच्छा