अयोध्या-लखनऊ हाईवे पर 150 करोड़ रुपये की लागत से बना सहादतगंज बाईपास तिराहे का ओवरब्रिज उद्घाटन के महज़ 6 महीने बाद धंस गया। दरारें और कमजोर नींव निर्माण कंपनी व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
अयोध्या-लखनऊ हाईवे के सहादतगंज बाईपास तिराहे पर जनता की सुविधा के लिए 150 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया ओवरब्रिज अब खुद जनता के लिए परेशानी बन गया है। महज़ 6 महीने पहले बड़े उत्साह के साथ उद्घाटन किए गए इस पुल को विकास की मिसाल बताया गया था, लेकिन आज यह लापरवाही का प्रतीक बनकर खड़ा है।
स्थानीय लोगों और राहगीरों ने बताया कि पुल की बाउंड्री में गहरी दरारें आ चुकी हैं और नींव में कमजोरी साफ नज़र आ रही है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद इतनी जल्दी पुल की यह हालत निर्माण कंपनी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सबसे अहम सवाल यह भी है कि आखिर इसे क्वालिटी सर्टिफिकेट देकर पास करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही क्यों तय नहीं की जा रही?

ऐसे मामले नए नहीं हैं — कभी पुल गिर जाता है, कभी सड़क धंस जाती है, कभी स्कूल की छत टूट जाती है। लेकिन न ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई होती है और न ही लापरवाह अधिकारियों पर। भ्रष्टाचार और लापरवाही का यह सिलसिला जनता की जान और टैक्स के पैसों से खिलवाड़ है।
फिलहाल, प्रशासन ने पुल पर यातायात बंद कर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन लोगों में गुस्सा, डर और अविश्वास बना हुआ है। सवाल सिर्फ मरम्मत का नहीं, बल्कि सिस्टम की उस दीमक को खत्म करने का है जो विकास कार्यों को खोखला कर रही है।
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