Wednesday, July 08, 2026

अयोध्या राम मंदिर दान विवाद के खुलासों के बाद अब बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में बड़ा खुलासा, जांच में मचा हड़कंप

दान पात्र से कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से निकाला गया पैसा, बीकेटीसी के अधिकारी पर एफआईआर दर्ज। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद नई जांच समिति गठित, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज।

New Delhi , Latest Updated On - Jul 08 2026 | 13:43:00 PM
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उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। बीकेटीसी के अधिकारी प्रमोद नौटियाल को निलंबित करने के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। FIR में दावा किया गया है कि दान पात्र से कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से धन निकाला गया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर नई जांच समिति गठित की गई है, जबकि विपक्ष ने पूरे मामले में पारदर्शी जांच की मांग उठाई है।

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 देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में शामिल बद्रीनाथ धाम इन दिनों श्रद्धा नहीं, बल्कि चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के प्रबंधन पर उठे सवालों ने पूरे उत्तराखंड में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने अपने अध्यक्ष के पर्सनल असिस्टेंट एवं थाली गणना/प्रोटोकॉल अधिकारी प्रमोद नौटियाल को पहले निलंबित किया और उसके बाद उनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करा दी।

एफआईआर में दावा किया गया है कि मंदिर की दान-पात्र (थाली भेंट) से प्राप्त धनराशि को कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से बाहर निकाला गया, जिससे पूरे मामले ने आपराधिक जांच का रूप ले लिया है।

FIR में क्या सामने आया?

मंदिर समिति द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार 2 जुलाई को दान-पात्र में आए चढ़ावे की नियमित गणना की जा रही थी। शुरुआती जांच में यह तथ्य सामने आया कि सुबह लगभग 9:00 बजे से 9:30 बजे के बीच दान गणना केंद्र से मंदिर का पैसा कथित रूप से नियमों के विपरीत बाहर निकाला गया।

समिति का आरोप है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य निजी लाभ प्राप्त करना था। इन्हीं प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर प्रमोद नौटियाल को पहले निलंबित किया गया और बाद में उनके खिलाफ बद्रीनाथ थाने में मामला दर्ज कराया गया।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 306 और धारा 316(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद जांच तेज

मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री स्तर पर भी इसे गंभीरता से लिया गया। मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद जांच प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए।

पहले इस मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई थी, लेकिन बाद में उसे भंग कर गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में नई तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी गई।

इस समिति में जीएमवीएन के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और वित्त विभाग के अधिकारी जगत सिंह चौहान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।

समिति को 15 दिनों के भीतर पूरी जांच कर शासन को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि यदि देवस्थानम बोर्ड आज भी अस्तित्व में होता तो इस प्रकार की स्थिति शायद पैदा नहीं होती। उनके अनुसार एक केंद्रीकृत व्यवस्था से पारदर्शिता और जवाबदेही अधिक मजबूत होती।

वहीं कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि भाजपा धार्मिक संस्थानों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। उनका कहना है कि केवल किसी बोर्ड के गठन या समाप्त होने से चोरी नहीं रुकती, बल्कि मजबूत निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था जरूरी है।

कांग्रेस विधायक ने लगाए गंभीर आरोप

बद्रीनाथ से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने प्रेस वार्ता कर इस पूरे मामले को केवल चोरी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का संगठित नेटवर्क बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई है।

बुटोला ने केवल इस मामले तक ही सवाल सीमित नहीं रखे, बल्कि उन्होंने—

  • केदारनाथ में सोना प्रकरण,
  • क्यूआर स्कैनर व्यवस्था,
  • वीआईपी दर्शन प्रणाली,
  • ऑडिट प्रक्रिया,
  • तथा वित्तीय पारदर्शिता

पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रखी जा रही है, जबकि बड़े अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

इतना ही नहीं, उन्होंने बीकेटीसी के उपाध्यक्ष पर अपनी पत्नी को पीए नियुक्त कर वेतन दिलाने का भी आरोप लगाया और समिति अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की।

मंदिर परिसर में लिया गया एक और बड़ा फैसला

इसी विवाद के बीच बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने मंदिर परिसर की धार्मिक गरिमा बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

अब मंदिर परिसर में किसी भी समाचार पत्र या अन्य संस्थान के साइन बोर्ड लगाने की अनुमति नहीं होगी।

समिति ने मंगलवार देर रात परिसर में लगे दो दैनिक समाचार पत्रों के बोर्ड भी हटवा दिए।

समिति का कहना है कि यह निर्णय मंदिर की पवित्रता और मर्यादा को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी चिंता—क्या दान व्यवस्था सुरक्षित है?

बद्रीनाथ धाम हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है। श्रद्धालु भगवान बद्रीविशाल के चरणों में श्रद्धा से दान अर्पित करते हैं। ऐसे में दान व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की खबरों ने लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है।

धार्मिक और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि यदि कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और मंदिर की व्यवस्था पर जनता का भरोसा बना रहे।

जांच पर टिकी सबकी निगाहें

फिलहाल प्रमोद नौटियाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस और उच्च स्तरीय जांच समिति दोनों स्तरों पर जांच जारी है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 15 दिनों में गठित समिति अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष प्रस्तुत करती है, कथित गड़बड़ी की वास्तविक जिम्मेदारी किस पर तय होती है और क्या इस पूरे मामले में केवल एक कर्मचारी जिम्मेदार था या जांच में कोई बड़ा नेटवर्क भी सामने आता है।

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