संसद के बजट सत्र के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण, आगामी बजट और भारत की दीर्घकालिक विकास रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के मौजूदा बजट सत्र को देश के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि यह सत्र 21वीं सदी के शेष तीन-चौथाई हिस्से की दिशा तय करने वाला है। गुरुवार को संसद भवन परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण में 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाएं, विशेष रूप से युवाओं की उम्मीदें और देश की क्षमताओं का स्पष्ट प्रतिबिंब था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति के भाषण में सांसदों के लिए कई मार्गदर्शक संदेश छिपे थे और उन्हें पूरा विश्वास है कि सभी सांसदों ने इन अपेक्षाओं को गंभीरता से लिया होगा। उन्होंने कहा कि यह बजट सत्र इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार अल्पकालिक फैसलों के बजाय लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की सभी नीतियां ह्यूमन सेंट्रिक हैं, जहां टेक्नोलॉजी को अपनाया जाएगा और उसे बढ़ावा दिया जाएगा, लेकिन मानव श्रम की गरिमा और भूमिका को कम नहीं होने दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अब भारतीय निर्यातकों को गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए यूरोपीय संघ के सभी 27 देशों में भारतीय उत्पादों की पहचान मजबूत करनी होगी।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का पहला एक चौथाई हिस्सा पूरा हो चुका है और देश 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के मंत्र पर लगातार काम कर रही है और आज भारत पूरी दुनिया के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है।
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