मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा चयनित 930 कंप्यूटर ऑपरेटरों (ग्रेड-ए) को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने ड्यूटी के दौरान रील बनाने को अनुशासनहीनता बताया और नवचयनित कर्मियों को डिजिटल वॉरियर्स की भूमिका निभाने का आह्वान किया। सीएम ने यूपी में कानून व्यवस्था, पुलिस सुधार, भर्ती प्रक्रिया, साइबर सुरक्षा और आर्थिक विकास को लेकर भी विस्तृत चर्चा की।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिशन रोजगार के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा चयनित 930 कंप्यूटर ऑपरेटर (ग्रेड-ए) अभ्यर्थियों को लोकभवन में नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नवचयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें अनुशासन, तकनीकी दक्षता और जनसेवा के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस की वर्दी केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आत्म-अनुशासन किसी भी पुलिस कर्मी का सबसे बड़ा गुण होता है और ड्यूटी के दौरान रील बनाना या ऐसा कोई कार्य करना जिससे पुलिस विभाग की गरिमा प्रभावित हो, अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

उन्होंने कहा, "ड्यूटी के समय सजगता और गंभीरता आवश्यक है। ऐसा कोई कार्य नहीं होना चाहिए जिससे व्यक्ति स्वयं या विभाग उपहास का पात्र बने।"
‘विकसित भारत’ के मिशन में निभानी होगी अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी नवचयनित अभ्यर्थी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत’ विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि चयनित युवा आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा और डिजिटल पुलिसिंग के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश पुलिस को और मजबूत बनाएंगे।
उन्होंने कहा कि आने वाला समय स्मार्ट पुलिसिंग और डिजिटल प्रशासन का है, जिसमें कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है।
2017 से पहले और आज का उत्तर प्रदेश: सीएम ने किया तुलना
मुख्यमंत्री ने नवचयनित युवाओं से कहा कि वे अपने अभिभावकों और गुरुजनों से पूछें कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति कैसी थी।
उन्होंने कहा कि उस समय प्रदेश में औसतन हर दूसरे या तीसरे दिन दंगे होते थे। त्योहारों से पहले तनाव और उपद्रव की घटनाएं सामान्य बात थीं और कई स्थानों पर महीनों तक कर्फ्यू लगा रहता था।
सीएम ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में कहीं भी कर्फ्यू लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। आज प्रदेश का हर नागरिक, व्यापारी, महिला और युवा स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस करता है।

‘जब आईपीएस अधिकारी सुरक्षित नहीं थे तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित होता?’
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने एक पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तक सुरक्षित नहीं थे।
उन्होंने कहा कि मुरादाबाद में एक डीआईजी स्तर के अधिकारी को उपद्रवियों ने घेरकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। ऐसी परिस्थितियों में आम नागरिकों की सुरक्षा की कल्पना भी मुश्किल थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज कानून का राज स्थापित हुआ है और अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।
अपराधियों को मिली ऐसी सजा, पीढ़ियां याद रखेंगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार बनने के बाद अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की गई। कई बार राजनीतिक दबाव भी बनाए गए, लेकिन सरकार ने कानून के शासन से कोई समझौता नहीं किया।
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में कई बड़े अपराधियों को न्यायालयों से कठोर सजा मिली है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संदेश का काम करेगी।
सवा दो लाख पुलिस कर्मियों की पारदर्शी भर्ती
सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की है।
उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में बिना किसी सिफारिश और बिना किसी भेदभाव के लगभग 2.25 लाख पुलिस कर्मियों की भर्ती की गई है।

हाल ही में 35 हजार पुलिस आरक्षियों की भर्ती परीक्षा संपन्न हुई, जिसमें करीब 28 लाख युवाओं ने भाग लिया। इससे पहले 41 हजार होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया भी पूरी की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती केवल योग्यता के आधार पर हुई है और इसी कारण युवाओं का सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं पर भरोसा बढ़ा है।
भर्ती से लेकर ट्रेनिंग तक बदली व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में जब उनकी सरकार बनी, तब कई भर्तियां न्यायालयों में लंबित थीं।
सरकार ने न्यायालय की अपेक्षाओं के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित किया और प्रशिक्षण क्षमता का भी विस्तार किया।
उन्होंने बताया कि पहले एक बार में सीमित संख्या में प्रशिक्षण दिया जा सकता था, लेकिन अब व्यवस्थाओं के विस्तार के कारण गत वर्ष 60,244 पुलिस कर्मियों को उत्तर प्रदेश में ही प्रशिक्षण दिया गया।
यूपी पुलिस में तेजी से बढ़ीं आधुनिक सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए व्यापक निवेश किया गया है।
उन्होंने बताया कि पहले प्रदेश में केवल चार फॉरेंसिक लैब थीं, जो अब बढ़कर 12 हो चुकी हैं। इसके अलावा छह नई ए-ग्रेड फॉरेंसिक लैब निर्माणाधीन हैं।

हर जिले में मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई हैं। बड़े जिलों में तीन और छोटे जिलों में दो मोबाइल फॉरेंसिक वैन संचालित की जा रही हैं।
साइबर सुरक्षा में भी बड़ी छलांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले पूरे प्रदेश में केवल एक साइबर थाना था, जबकि आज सभी 75 जिलों में साइबर थाना और साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों से निपटने में तकनीकी रूप से प्रशिक्षित कर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
अब यूपी रेंग नहीं रहा, दौड़ रहा है
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन चुका है।
उन्होंने बताया कि नौ वर्ष पहले प्रदेश में लगभग 14 हजार बड़े उद्योग थे, जो अब बढ़कर 32 हजार से अधिक हो चुके हैं। वहीं 96 लाख एमएसएमई इकाइयों ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं।

उन्होंने कहा कि बेहतर कानून व्यवस्था और सुरक्षा के माहौल का सीधा असर निवेश और आर्थिक विकास पर पड़ा है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय में तीन गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
ईमानदारी और जवाबदेही की अपेक्षा
मुख्यमंत्री ने नवचयनित अभ्यर्थियों से कहा कि भर्ती प्रक्रिया में उन्हें किसी सिफारिश की आवश्यकता नहीं पड़ी। इसलिए अब शासन भी उनसे पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और गरिमापूर्ण कार्यशैली की अपेक्षा रखता है।
उन्होंने कहा कि कार्यों को टालने की प्रवृत्ति समाप्त करनी होगी और जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना होगा।
कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, डीजी (कारागार) पीसी मीणा, डीजी (भर्ती बोर्ड) एसबी शिरडकर तथा एडीजी तकनीकी सेवाएं नवीन अरोड़ा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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