दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग ने नशा तस्करी के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। मलेशिया से आए दो विदेशी नागरिकों के पास से 15.38 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया गया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में कीमत लगभग 5.38 करोड़ रुपये आंकी गई है। तस्करों ने नशे की खेप को नए गीजरों के भीतर छिपाकर भारत लाने की कोशिश की थी।
देश की राजधानी दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों ने तस्करों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। कस्टम विभाग ने एक ऐसी तस्करी का खुलासा किया है, जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। दो विदेशी नागरिक घरेलू उपयोग के सामान्य उपकरण दिखने वाले नए गीजरों के भीतर करोड़ों रुपये की ड्रग्स छिपाकर भारत लाने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि उनकी चालाकी कस्टम अधिकारियों की सतर्कता के आगे टिक नहीं सकी।
अधिकारियों ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस तस्करी के पीछे कौन सा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय है।
कुआलालंपुर से दिल्ली तक पहुंची संदिग्ध खेप
कस्टम विभाग के अनुसार, 7 जून को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से फ्लाइट नंबर D7-182 के जरिए दो विदेशी यात्री दिल्ली पहुंचे थे। प्रारंभिक निगरानी के दौरान अधिकारियों को उनके व्यवहार और यात्रा पैटर्न में कुछ असामान्य बातें दिखाई दीं।
दोनों यात्री सामान्य चेकिंग प्रक्रिया पूरी कर ग्रीन चैनल की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन खुफिया इनपुट और प्रोफाइलिंग के आधार पर कस्टम अधिकारियों ने उन्हें रोककर पूछताछ शुरू की।

नए गीजरों ने बढ़ाया शक
जांच के दौरान अधिकारियों ने देखा कि यात्रियों के पास सामान्य लगेज के अलावा दो बिल्कुल नए गीजर भी मौजूद थे। आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों द्वारा इस प्रकार के घरेलू उपकरण साथ लाना असामान्य माना जाता है।
अधिकारियों ने जब यात्रियों से इन गीजरों के संबंध में पूछताछ की तो उनके जवाब संतोषजनक नहीं लगे। इसके बाद जांच को और गहरा किया गया।
यात्रियों के मोबाइल फोन, यात्रा दस्तावेज और अन्य विवरणों की जांच के दौरान अधिकारियों का संदेह और बढ़ गया।
एक्स-रे स्कैन में खुला बड़ा राज
कस्टम अधिकारियों ने दोनों गीजरों की एक्स-रे जांच कराने का निर्णय लिया। स्कैनिंग के दौरान गीजरों के अंदर असामान्य संरचना दिखाई दी, जिससे संकेत मिला कि उनमें कुछ छिपाया गया है।
इसके बाद अधिकारियों ने गीजरों को खोलकर विस्तृत जांच शुरू की।
जैसे ही उपकरणों को काटकर खोला गया, अंदर का दृश्य देखकर जांच टीम भी चौंक गई।
गीजरों के भीतर विशेष रूप से तैयार किए गए छिपाव तंत्र में 145 वैक्यूम-सील पैकेट सावधानीपूर्वक छिपाए गए थे।
145 पैकेटों में भरा था हाइड्रोपोनिक गांजा
बरामद किए गए पैकेटों के भीतर हरे रंग का पत्तेदार पदार्थ मिला। प्रारंभिक परीक्षण और जांच में इसे हाइड्रोपोनिक वीड यानी उच्च गुणवत्ता वाले गांजे के रूप में पहचाना गया।
हाइड्रोपोनिक वीड सामान्य गांजे से अधिक महंगा और अधिक प्रभावशाली माना जाता है। इसे विशेष नियंत्रित वातावरण में उगाया जाता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में इसकी मांग काफी अधिक रहती है।
अधिकारियों के अनुसार बरामद ड्रग्स का कुल वजन 15.38 किलोग्राम पाया गया।

कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश
कस्टम विभाग के अनुमान के अनुसार बरामद हाइड्रोपोनिक वीड की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में कीमत लगभग 5 करोड़ 38 लाख रुपये है।
यानी दो गीजरों के भीतर छिपाई गई यह खेप अकेले कई करोड़ रुपये के अवैध कारोबार से जुड़ी हुई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उच्च गुणवत्ता वाली ड्रग्स आमतौर पर बड़े शहरों और हाई-एंड अवैध नेटवर्क के जरिए सप्लाई की जाती हैं।
NDPS एक्ट के तहत हुई कार्रवाई
कस्टम विभाग ने बरामद मादक पदार्थ को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 के तहत जब्त कर लिया है।
दोनों विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
अब उनसे गहन पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे केवल कैरियर थे या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा।
क्या भारत था अंतिम गंतव्य?
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह खेप भारत में खपाने के लिए लाई गई थी या किसी अन्य देश तक पहुंचाने के लिए।
अधिकारियों का मानना है कि इस मामले के तार अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि दिल्ली या भारत के अन्य शहरों में इस खेप को रिसीव करने वाला कौन था।

पहले भी पकड़ी जा चुकी है बड़ी खेप
यह पहला मौका नहीं है जब IGI एयरपोर्ट पर हाइड्रोपोनिक वीड की बड़ी खेप पकड़ी गई हो।
इससे पहले भी बैंकॉक से आए दो विदेशी यात्रियों के पास से लगभग 48 करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स बरामद की गई थी।
उस मामले में करीब 48 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक वीड जब्त की गई थी।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
तस्करों के बदलते तरीके बने चुनौती
जांच एजेंसियों का कहना है कि तस्कर अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर नए और अत्यधिक तकनीकी तरीके अपना रहे हैं।
घरेलू उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी और अन्य वस्तुओं के भीतर ड्रग्स छिपाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
ऐसे में एयरपोर्ट सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती और भी बड़ी हो गई है।
सतर्कता से टला बड़ा खतरा
यदि कस्टम अधिकारियों ने संदिग्ध गतिविधियों पर ध्यान न दिया होता और गीजरों की तकनीकी जांच न कराई होती, तो यह खेप आसानी से भारत के भीतर पहुंच सकती थी।
कस्टम विभाग की इस कार्रवाई ने न केवल करोड़ों रुपये की ड्रग्स जब्त की है, बल्कि संभावित रूप से एक बड़े नशा नेटवर्क की कड़ी भी उजागर की है।
फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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