दादरी के बालाजी विहार कॉलोनी में फॉल्ट ठीक करते समय लाइनमैन रवि की करंट लगने से मौत हो गई। परिजनों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जीटी रोड पर जाम लगा दिया। पुलिस और विभागीय अधिकारी मौके पर मौजूद।
ग्रेटर नोएडा के दादरी क्षेत्र में सोमवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। बालाजी विहार कॉलोनी में बिजली का फॉल्ट ठीक करने के लिए खंभे पर चढ़े एक लाइनमैन की अचानक करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने मुआवजे की मांग को लेकर जीटी रोड जाम कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रवि पुत्र महिपाल, निवासी जारचा धूममानिकपुर, विद्युत खंड में लाइनमैन के पद पर कार्यरत था। आरोप है कि सोमवार सुबह वह शटडाउन लेकर दादरी स्थित बालाजी विहार कॉलोनी में बिजली के खंभे पर चढ़कर फॉल्ट ठीक कर रहा था। बताया जा रहा है कि फॉल्ट ठीक करने के बाद जैसे ही वह नीचे उतर रहा था, अचानक बिजली की आपूर्ति शुरू हो गई। इससे वह करंट की चपेट में आ गया और बुरी तरह झुलस गया।

मौके पर मौजूद लोगों ने उसे नीचे उतारा, लेकिन तब तक उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना से परिवार में कोहराम मच गया।
घटना की सूचना मिलते ही स्वजन मौके पर पहुंच गए। परिजनों का आरोप है कि शटडाउन लेने के बावजूद बिजली आपूर्ति कैसे बहाल हो गई? उनका कहना है कि यह पूरी तरह विभागीय लापरवाही का मामला है। यदि समुचित सावधानी बरती जाती, तो रवि की जान बचाई जा सकती थी।
आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने उचित मुआवजे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जीटी रोड पर जाम लगा दिया। खबर लिखे जाने तक जाम जारी था, जिससे यातायात प्रभावित रहा।
हुंची। बिजली विभाग के अधिकारी भी घटनास्थल पर मौजूद रहे। परिजनों और प्रशासन के बीच बातचीत का दौर जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिजनों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है और मामले की जांच की जाएगी।

रवि अपने परिवार का मुख्य सहारा था। उसकी अचानक मौत से परिवार आर्थिक और मानसिक संकट में आ गया है। परिजन न सिर्फ मुआवजे की मांग कर रहे हैं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग कर रहे हैं।
यह हादसा एक बार फिर कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों और समन्वय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। क्या शटडाउन की प्रक्रिया का सही पालन हुआ? क्या तकनीकी लापरवाही ने एक परिवार का चिराग बुझा दिया? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
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